{"_id":"6242101f2d23f5730d17b580","slug":"basharat-of-kargil-padma-shri-to-namgyal-of-leh-president-praised-the-work-of-both","type":"story","status":"publish","title_hn":"सम्मान: कारगिल के बशारत, लेह के नामग्याल को पद्मश्री, राष्ट्रपति ने की दोनों की कार्यों की तारीफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सम्मान: कारगिल के बशारत, लेह के नामग्याल को पद्मश्री, राष्ट्रपति ने की दोनों की कार्यों की तारीफ
Tue, 29 Mar 2022 02:05 AM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
Published by: विमल शर्मा
Updated Tue, 29 Mar 2022 02:05 AM IST
सार
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कारगिल के रहने वाले आखून असगर अली बशारत को साहित्य एवं शिक्षा जबकि सेरिंग नामग्याल को लकड़ी की शिल्पकारी के लिए पद्म पुरस्कार दिया गया।
विज्ञापन
आखून असगर अली बशारत और सेरिंग नामग्याल को सम्मानित करते राष्ट्रपति।
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लद्दाख की दो शख्सियतों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कारगिल के रहने वाले आखून असगर अली बशारत को साहित्य एवं शिक्षा जबकि सेरिंग नामग्याल को लकड़ी की शिल्पकारी के लिए पद्म पुरस्कार दिया गया।
विज्ञापन
आखून असगर अली बशारत का सबसे मुख्य योगदान बलती भाषा और संस्कृति को पुनर्जीवित व लोकप्रिय करना है। बलती भाषा मुख्य रूप से लद्दाख के कारगिल जिले और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित व बलतीस्तान में बोली जाती है।
विज्ञापन
बशारत को बलती कवि और बलती विशेषज्ञ माना जाता है। वहीं, लेह के सेरिंग नामग्याल पिछले चालीस वर्ष से लकड़ी की शिल्पकला से जुड़े हैं। लद्दाख में यह शिल्पकला कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
विज्ञापन