बगलिहार-II परियोजना से बिजली का उत्पादन शुरु
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर में अक्तूबर में राष्ट्र को समर्पित की जाने वाली 450 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की बगलिहार दो परियोजना उत्तरी ग्रिड से जुड़ गई है। परियोजना से तीन यूनिटों में से एक से डेढ़ सौ मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है।
दूसरी यूनिट से उत्पादन 15 सितंबर तक शुरू हो जाएगा। हालांकि तीसरी यूनिट का अभी कुछ काम बाकी है और वहां से नवंबर तक बिजली उत्पादन शुरू हो पाएगा।
जम्मू कश्मीर पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगलिहार दो परियोजना के उद्घाटन से पूर्व सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
परियोजना में तीन में से एक यूनिट की सफल टेस्टिंग का काम पूरा हो गया है और बिजली उत्पादन भी हो रहा है। परियोजना को उत्तरी ग्रिड से जोड़ दिया गया है और यहां से उत्पादित हो रही बिजली का प्रयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जब परियोजना का उद्घाटन करेंगे तो तीन में से दो यूनिटों से 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा होगा।
150 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू
डेढ़ सौ मेगावाट क्षमता की दूसरी यूनिट को 15 सितंबर तक टेस्टिंग कर यहां से भी 150 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के ईडी अहमद मुज्जफर लंकर का कहना है कि पहली यूनिट से बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है।
उत्तरी ग्रिड से बगलिहार दो परियोजना को जोड़ दिया गया है। दूसरी यूनिट से उत्पादन 15 सितंबर तक शुरू करने की तैयारी है। तीसरी यूनिट से बिजली उत्पादन शुरू होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है।
करीब 3113.19 करोड़ की लागत से बनी बगलिहार दो
बगलिहार दो परियोजना करीब 3113.19 करोड़ की राशि से तैयार हुई है। परियोजना पर साल 2012 में काम शुरू हुआ था। करीब तीन साल में परियोजना का निर्माण किया किया गया है। परियोजना में जर्मनी, बेल्जियम और फ्रांस की आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया गया है।
इससे पूर्व चिनाब दरिया पर बगलिहार एक परियोजना भी चल रही है। यहां से भी 450 मेगावाट बिजली के उत्पादन की क्षमता रहती है। बगलिहार एक परियोजना का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने दस अक्तूबर 2008 को किया था।
यह दोनों परियोजनाएं पाकिस्तान से सिंधु जल समझौते की वजह से रन द वाटर स्कीम पर आधारित हैं। इस वजह से सर्दियों में जल स्तर कम होने पर बिजली उत्पादन की क्षमता भी कम हो जाती है।