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Jammu News: पाकिस्तान को इस बार भी नहीं मिलेगी शक्कर और शरबत
Thu, 22 Jun 2023 01:47 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 22 Jun 2023 01:47 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के रामगढ़ में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के निकट बाबा दलीप सिंह मन्हास की दरगाह (बाबा चमलियाल) पर वीरवार को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जहां दुकानें सज गई हैं वहीं, जम्मू-कश्मीर सहित पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो चुका है। प्रशासन की ओर से तैयारियां पूर्ण कर दी गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। भारत-पाकिस्तान के संबंधों में जारी खटास के चलते लगातार सातवें साल भी पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को शक्कर और शरबत नहीं दी जाएगी।
बाबा की मजार में स्थित तालाब की मिट्टी को शक्कर और कुएं के पानी को शरबत कहा जाता है। मान्यता है कि दोनों को मिला कर लेप करने से चर्म रोग ठीक होते हैं। पाकिस्तानी श्रद्धालु बाबा की मजार की शक्कर व शरबत लेने के लिए सालभर इंतजार करते थे। उन्हें भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान शक्कर की ट्रालियां व शरबत के टैंकर जीरो लाइन पर ले जा कर सौंप देते थे।
दोनों देशों की मिटती थीं दूरिया
जीरो लाइन पर होने वाले मेले के चलते दोनों देशों की दूरियां मिट जाती थीं। आयोजित कार्यक्रम में दोनों देशों के सैन्य व सिविल अधिकारी बैठते थे। एक-दूसरे को उपहार दिए जाते थे। पाकिस्तानी श्रद्धालु बाबा की मजार पर चढ़ाने के लिए चादर पाक रेजरों को देते थे, जिसे पूरे सम्मान के साथ बीएसएफ अधिकारियों को सौंप दिया जाता था। बीएसएफ के बैंड की धुन के बीच चादर को बाबा की मजार पर चढ़ाया जाता था। दोनों देशों के संबंधों में आई खठास के कारण जीरो लाइन पर कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। इस कारण उन्हें सातवें साल भी शक्कर और शरबत नसीब नहीं होगी।
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दरगाह मार्गाें पर लगाए गए हैं स्टाल
मेले के चलते बाबा चमलियाल दरगाह की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए स्टाल लगाए है। जहां उन्हें लंगर के साथ ही ठंडा मीठा मुहैया करवाया जा रहा है। बाबा की दरगाह पर भी लंगर का विशेष प्रबंध किया गया है।
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सांबा। जिले के रामगढ़ में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के निकट बाबा दलीप सिंह मन्हास की दरगाह (बाबा चमलियाल) पर वीरवार को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जहां दुकानें सज गई हैं वहीं, जम्मू-कश्मीर सहित पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो चुका है। प्रशासन की ओर से तैयारियां पूर्ण कर दी गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। भारत-पाकिस्तान के संबंधों में जारी खटास के चलते लगातार सातवें साल भी पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को शक्कर और शरबत नहीं दी जाएगी।
बाबा की मजार में स्थित तालाब की मिट्टी को शक्कर और कुएं के पानी को शरबत कहा जाता है। मान्यता है कि दोनों को मिला कर लेप करने से चर्म रोग ठीक होते हैं। पाकिस्तानी श्रद्धालु बाबा की मजार की शक्कर व शरबत लेने के लिए सालभर इंतजार करते थे। उन्हें भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान शक्कर की ट्रालियां व शरबत के टैंकर जीरो लाइन पर ले जा कर सौंप देते थे।
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दोनों देशों की मिटती थीं दूरिया
जीरो लाइन पर होने वाले मेले के चलते दोनों देशों की दूरियां मिट जाती थीं। आयोजित कार्यक्रम में दोनों देशों के सैन्य व सिविल अधिकारी बैठते थे। एक-दूसरे को उपहार दिए जाते थे। पाकिस्तानी श्रद्धालु बाबा की मजार पर चढ़ाने के लिए चादर पाक रेजरों को देते थे, जिसे पूरे सम्मान के साथ बीएसएफ अधिकारियों को सौंप दिया जाता था। बीएसएफ के बैंड की धुन के बीच चादर को बाबा की मजार पर चढ़ाया जाता था। दोनों देशों के संबंधों में आई खठास के कारण जीरो लाइन पर कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। इस कारण उन्हें सातवें साल भी शक्कर और शरबत नसीब नहीं होगी।
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दरगाह मार्गाें पर लगाए गए हैं स्टाल
मेले के चलते बाबा चमलियाल दरगाह की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए स्टाल लगाए है। जहां उन्हें लंगर के साथ ही ठंडा मीठा मुहैया करवाया जा रहा है। बाबा की दरगाह पर भी लंगर का विशेष प्रबंध किया गया है।