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किसी व्यक्ति या रिश्ते के प्रतरा बनाई गलत धारणा उसमें कड़वा ला देती है
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जम्मू। अभिनव थियेटर में जारी वार्षिक नाट्य उत्सव में बुधवार को डोगरी नाटक सास पुराण का मंचन किया गया। शशि भूषण के निर्देशन में मंचित नाटक में समाज में सास और बहू के बीच रिश्ते को लेकर बने मिथकों को उजागर किया गया है। नाटक दर्शकों को संदेश देता है कि गलत धारणा रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर देती है। गलत धारणा का अक्सर दूसरे लोग फायदा उठाकर आपसी रिश्तों में फूट डाल देते हैं।
नाटक की कहानी एक परिवार से शुरू होती है, जिसमें एक दंपती शहर में अकेला रहता है। नाटक में उस समय मोड़ आता है जब गृहिणी मधु को पता चलता है कि घर में उसकी सास आने वाली है। यह खबर सुनकर वह काफी खुश होती है, लेकिन घर का नौकर कालू मधु के मन में सास के प्रति गलत धारणा बना देता है। वह मधु के सामने सास के कई किस्से पेश करता है। ऐसे ही कई किस्से जुड़ते जाते हैं, जिससे बहू के सामने सास की एक गलत तस्वीर बन जाती है।
जब सास घर पहुंचती है तो बहू को कालू की बातें सिर्फ गलत धारणा लगी। उसे अहसास होता है कि जो वह सोचती रही, वैसा कुछ नहीं है। उसे अहसास होता है कि सास भी मां की तरह ही होती है और सास-बहू का रिश्ता मां-बेटी की तरह ही है। नाटक में ऊषा सलाथिया, दीपक सिंह, सीमा देवी आदि ने अभिनय किया।
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नाटक की कहानी एक परिवार से शुरू होती है, जिसमें एक दंपती शहर में अकेला रहता है। नाटक में उस समय मोड़ आता है जब गृहिणी मधु को पता चलता है कि घर में उसकी सास आने वाली है। यह खबर सुनकर वह काफी खुश होती है, लेकिन घर का नौकर कालू मधु के मन में सास के प्रति गलत धारणा बना देता है। वह मधु के सामने सास के कई किस्से पेश करता है। ऐसे ही कई किस्से जुड़ते जाते हैं, जिससे बहू के सामने सास की एक गलत तस्वीर बन जाती है।
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जब सास घर पहुंचती है तो बहू को कालू की बातें सिर्फ गलत धारणा लगी। उसे अहसास होता है कि जो वह सोचती रही, वैसा कुछ नहीं है। उसे अहसास होता है कि सास भी मां की तरह ही होती है और सास-बहू का रिश्ता मां-बेटी की तरह ही है। नाटक में ऊषा सलाथिया, दीपक सिंह, सीमा देवी आदि ने अभिनय किया।
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