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तितलियों के संरक्षण के लिए जगाई अलख
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जम्मू। पर्यावरण को सुंदर और स्वच्छ रखने के लिए जम्मू-कश्मीर में चार सितंबर से बिग बटरफ्लाई मंथ मनाया जा रहा है। 30 सितंबर को इसका समापन होगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के लोगों को तितलियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के छात्र इस अभियान में हिस्सा ले रहे हैं। पर्यावरण प्रेमी छात्रों के लिए बिग बटरफ्लाई मंथ के तहत तीन स्पर्धाएं करवाई जा रही हैं। इसमें पेंटिंग, फोटोग्राफी और रंगोली है। प्रतिभागी ऑनलाइन मोड से कार्यक्रम में प्रवेश ले रहे हैं। प्रथम और द्वितीय विजेता को पुरस्कार के रूप में नकद राशि मिलेगी। बाकी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
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जम्मू कश्मीर में तितलियों का जुटाया जा रहा आंकड़ा
जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में तितलियों की 300 प्रजातियां हैं। इनमें से 33 की पहचान अभी एक साल में की गई है। तितलियों के संरक्षण के लिए 2020 में पहली बार नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज और बांबे नेचुरल हिस्ट्री समेत 50 संस्थाओं ने वेबिनार और रोचक प्रतियोगिताएं करवाई थीं। विशेषज्ञों के मुताबिक देश भर में तितलियों की 1400 से अधिक प्रजातियां हैं। पिटर्स मेटॉक ने केटलॉक में 2015 में तितलियों की 1318 प्रजातियां बताई थीं। जम्मू विवि के भद्रवाह कैंपस के माउंटेनियर्स एनवायरनमेंट के अध्यक्ष डॉ. नीरज शर्मा ने पाडर (किश्तवाड़) के सुनचाम क्षेत्र के दूर दराज इलाके में जाकर लार्ज एमपरर, ग्रीन कॉपर, ब्लैक बेन फेटलरी हाइब्रोन, सिल्वर स्पॉट आदि तितलियों की पहचान करके तस्वीरों में कैद किया है।
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फल उत्पादन और पर्यावरण के लिए तितलियां जरूरी
प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई छात्र इस अभियान से जुड़े हैं। तितलियों की फोटोग्राफी करके पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में तितलियों का डाटा राष्ट्रीय स्तर पर भेजा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार तितलियां पौधों को खुराक देती हैं, जिससे फल पैदा होता है। लोग कीटनाशकों का प्रयोग करके तितलियों को मार रहे हैं। इससे पूरा ईको सिस्टम बिगड़ रहा है। फूड चेन और फूड वेब की प्राकृतिक प्रक्रिया समाप्त हो रही है।
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प्राकृतिक से छेड़छाड़ से तितलियों पर संकट
पेड़ों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण से भी तितलियों की प्रजातियां खत्म हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के चलते देश में तितलियों की संख्या बढ़ गई है। इसकी वजह प्रदूषण कम होना बताया जा रहा है।
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लोगों को जागरूक करने के लिए हाल ही में जीडीसी रियासी, जीडीसी आरएस पुरा, जीजीएम साइंस कॉलेज जम्मू में तितलियों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम करवाए गए। तितलियों के बगैर पूरा ईकोलॉजिकल बैलेंस गड़बड़ा जाता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए तितलियां जरूरी हैं। लोगों को इनके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। बाग बगीचे लगाने चाहिएं। पंजाब और हिमाचल आदि आसपास के राज्यों में तितलियों पर शोध हुए, लेकिन जम्मू-कश्मीर में पहली बार तितलियों का आंकड़ा जुटाने की पहल की गई है।
-डॉ. शाखा शर्मा, को-ऑर्डिनेटर जम्मू-कश्मीर
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जम्मू कश्मीर में तितलियों का जुटाया जा रहा आंकड़ा
जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में तितलियों की 300 प्रजातियां हैं। इनमें से 33 की पहचान अभी एक साल में की गई है। तितलियों के संरक्षण के लिए 2020 में पहली बार नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज और बांबे नेचुरल हिस्ट्री समेत 50 संस्थाओं ने वेबिनार और रोचक प्रतियोगिताएं करवाई थीं। विशेषज्ञों के मुताबिक देश भर में तितलियों की 1400 से अधिक प्रजातियां हैं। पिटर्स मेटॉक ने केटलॉक में 2015 में तितलियों की 1318 प्रजातियां बताई थीं। जम्मू विवि के भद्रवाह कैंपस के माउंटेनियर्स एनवायरनमेंट के अध्यक्ष डॉ. नीरज शर्मा ने पाडर (किश्तवाड़) के सुनचाम क्षेत्र के दूर दराज इलाके में जाकर लार्ज एमपरर, ग्रीन कॉपर, ब्लैक बेन फेटलरी हाइब्रोन, सिल्वर स्पॉट आदि तितलियों की पहचान करके तस्वीरों में कैद किया है।
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फल उत्पादन और पर्यावरण के लिए तितलियां जरूरी
प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई छात्र इस अभियान से जुड़े हैं। तितलियों की फोटोग्राफी करके पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में तितलियों का डाटा राष्ट्रीय स्तर पर भेजा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार तितलियां पौधों को खुराक देती हैं, जिससे फल पैदा होता है। लोग कीटनाशकों का प्रयोग करके तितलियों को मार रहे हैं। इससे पूरा ईको सिस्टम बिगड़ रहा है। फूड चेन और फूड वेब की प्राकृतिक प्रक्रिया समाप्त हो रही है।
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प्राकृतिक से छेड़छाड़ से तितलियों पर संकट
पेड़ों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण से भी तितलियों की प्रजातियां खत्म हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के चलते देश में तितलियों की संख्या बढ़ गई है। इसकी वजह प्रदूषण कम होना बताया जा रहा है।
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लोगों को जागरूक करने के लिए हाल ही में जीडीसी रियासी, जीडीसी आरएस पुरा, जीजीएम साइंस कॉलेज जम्मू में तितलियों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम करवाए गए। तितलियों के बगैर पूरा ईकोलॉजिकल बैलेंस गड़बड़ा जाता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए तितलियां जरूरी हैं। लोगों को इनके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। बाग बगीचे लगाने चाहिएं। पंजाब और हिमाचल आदि आसपास के राज्यों में तितलियों पर शोध हुए, लेकिन जम्मू-कश्मीर में पहली बार तितलियों का आंकड़ा जुटाने की पहल की गई है।
-डॉ. शाखा शर्मा, को-ऑर्डिनेटर जम्मू-कश्मीर