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Jammu News: उम्मीद का दामन थाम आत्मनिर्भर बनीं अनीता
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अनीता देवी अखनूर
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। हौसले बुलंद हों तो उड़ान के लिए आसमान भी छोटा पड़ जाता है। यह पंक्ति अखनूर के गांव टांडा कोटली की अनीता देवी पर सटीक बैठती है।
उन्होंने पारिवारिक परेशानियों के आगे घुटने न टेककर हौसले के साथ समय का सामना कर खुद को आत्मनिर्भर बनाया। साल 2017 में मिशन उम्मीद से जुड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। छोटी-छोटी बैठकों में केटरिंग का काम लेकर कारोबार की शुरुआत की जो वक्त के साथ बढ़ता गया। खुद के साथ अन्य महिलाओं को भी जोड़कर उन्हें भी रोजगार दिया।
अखनूर में डोगरी व्यंजनों का ढाबा चला रहीं अनीता शहद व आचार उत्पादन का काम भी कर रही हैं। इसकी मांग जम्मू ही नहीं बल्कि पंजाब, राजस्थान आदि राज्यों से भी आती है। अनीता के अनुसार कुछ साल पहले परिवार आर्थिक परेशानी से जूझ रहा था। शुरुआती दौर में खाने के छोटे ऑर्डर लिए। सिलसिला चलता रहा फिर डोगरी व्यंजन अंबल, दाल, क्यूर, सरसों का साग व मक्की की रोटी का ढाबा खोला। इसमें केवल महिला सहयोगी थीं। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। फिर शहद, मसाले और आचार उत्पादन का काम भी शुरू किया। जम्मू व आसपास लगने वाली प्रदर्शनियों में भी भाग लिया। इससे उनके तैयार किए गए उत्पादों की पहुंच जम्मू से बाहर तक पहुंची। अब जम्मू के अलावा अन्य राज्यों से भी शहद, आचार व अन्य उत्पादों के ऑर्डर आते हैं।
अनीता देवी का कहना है कि आज के इस दौर में महिलाएं सशक्त हैं उन्हें अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना चाहिए।
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जम्मू। हौसले बुलंद हों तो उड़ान के लिए आसमान भी छोटा पड़ जाता है। यह पंक्ति अखनूर के गांव टांडा कोटली की अनीता देवी पर सटीक बैठती है।
उन्होंने पारिवारिक परेशानियों के आगे घुटने न टेककर हौसले के साथ समय का सामना कर खुद को आत्मनिर्भर बनाया। साल 2017 में मिशन उम्मीद से जुड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। छोटी-छोटी बैठकों में केटरिंग का काम लेकर कारोबार की शुरुआत की जो वक्त के साथ बढ़ता गया। खुद के साथ अन्य महिलाओं को भी जोड़कर उन्हें भी रोजगार दिया।
अखनूर में डोगरी व्यंजनों का ढाबा चला रहीं अनीता शहद व आचार उत्पादन का काम भी कर रही हैं। इसकी मांग जम्मू ही नहीं बल्कि पंजाब, राजस्थान आदि राज्यों से भी आती है। अनीता के अनुसार कुछ साल पहले परिवार आर्थिक परेशानी से जूझ रहा था। शुरुआती दौर में खाने के छोटे ऑर्डर लिए। सिलसिला चलता रहा फिर डोगरी व्यंजन अंबल, दाल, क्यूर, सरसों का साग व मक्की की रोटी का ढाबा खोला। इसमें केवल महिला सहयोगी थीं। धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया। फिर शहद, मसाले और आचार उत्पादन का काम भी शुरू किया। जम्मू व आसपास लगने वाली प्रदर्शनियों में भी भाग लिया। इससे उनके तैयार किए गए उत्पादों की पहुंच जम्मू से बाहर तक पहुंची। अब जम्मू के अलावा अन्य राज्यों से भी शहद, आचार व अन्य उत्पादों के ऑर्डर आते हैं।
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अनीता देवी का कहना है कि आज के इस दौर में महिलाएं सशक्त हैं उन्हें अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना चाहिए।