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गेंदा और लैवेंडर की खेती कर आय बढ़ाएं किसान
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डोडा। जन अभियान के तहत व्यावसायिक फूलों की खेती पर शनिवार को भल्ला प्रखंड के खिलानी टॉप में पुष्प कृषि विभाग ने प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें किसानों को गेंदा और लैवेंडर की खेती करने की सलाह दी गई, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकें।
जिला विकास पार्षद भद्रवाह पश्चिम युद्धवीर ठाकुर इसमें मुख्य अतिथि थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 40 से अधिक किसानों ने भाग लिया। सहायक पुष्प कृषि अधिकारी पवन कुमार ने पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए गेंदा की खेती, लैवेंडर पौधरोपण, लैवेंडर नर्सरी की स्थापना और कटे हुए फूलों की संरक्षित खेती के बारे में किसानों को जागरूक किया। कहा कि डोडा में हर साल 350 से अधिक किसान गेंदा की खेती कर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। 1000 से अधिक परिवार लैवेंडर की खेती में शामिल हैं। उन्हें पहले पारंपरिक खेती जैसे मक्का, गेहूं, आदि से बहुत कम राशि मिलती थी। लेकिन, लैवेंडर और गेंदा की खेती से वाणिज्यिक फूलों की खेती को अपनाने के बाद उनकी आय चौगुनी हो गई है।
उप निदेशक पुष्प कृषि जम्मू सुनील सिंह ने किसानों को विभाग की केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यातिथि ने विभाग को भविष्य में भी इस तरह के अधिक से अधिक जागरूकता शिविर आयोजित करने की सलाह दी, ताकि अधिक से अधिक किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें और अपनी सामाजिक आर्थिक स्थिति का उत्थान कर सकें।
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जिला विकास पार्षद भद्रवाह पश्चिम युद्धवीर ठाकुर इसमें मुख्य अतिथि थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 40 से अधिक किसानों ने भाग लिया। सहायक पुष्प कृषि अधिकारी पवन कुमार ने पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए गेंदा की खेती, लैवेंडर पौधरोपण, लैवेंडर नर्सरी की स्थापना और कटे हुए फूलों की संरक्षित खेती के बारे में किसानों को जागरूक किया। कहा कि डोडा में हर साल 350 से अधिक किसान गेंदा की खेती कर अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। 1000 से अधिक परिवार लैवेंडर की खेती में शामिल हैं। उन्हें पहले पारंपरिक खेती जैसे मक्का, गेहूं, आदि से बहुत कम राशि मिलती थी। लेकिन, लैवेंडर और गेंदा की खेती से वाणिज्यिक फूलों की खेती को अपनाने के बाद उनकी आय चौगुनी हो गई है।
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उप निदेशक पुष्प कृषि जम्मू सुनील सिंह ने किसानों को विभाग की केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यातिथि ने विभाग को भविष्य में भी इस तरह के अधिक से अधिक जागरूकता शिविर आयोजित करने की सलाह दी, ताकि अधिक से अधिक किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें और अपनी सामाजिक आर्थिक स्थिति का उत्थान कर सकें।
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