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अब डायलिसिस के लिए जाना पड़ेगा दूसरे शहर

Sun, 17 Aug 2014 12:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 17 Aug 2014 12:49 PM IST
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automatic peritoneal dialysis facility in jammu

किडनी के मरीजों को अब और भटकना नहीं पड़ेगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में पेरिटोनियल (होम डायलिसिस) डायलिसिस सुविधा शुरू कर दी गई है।

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रियासत के किसी पहले अस्पताल में यहां लगी दो एपीडी (आटोमेटिक पेरिटोनियल डायलिसिस) मशीनों पर दो मरीजों का डायलिसिस किया गया।

इन आधुनिक मशीनों के स्थापित होने से अब नवजात से लेकर 90 साल तक के मरीज का पेरिटोनियल डायलिसिस सरकारी स्तर पर हो सकेगा।

इससे पहले पीड़ित को इस डायलिसिस के लिए निजी खर्चे पर घर पर या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा था। विभाग के एचओडी डा. एसके बाली के अनुसार उत्तर भारत में सुपर स्पेशलिटी में ऐसी सुविधा शुरू होना बड़ी उपलब्धि है।

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रोज हो रहे हैं सोलह डायलिसिस

automatic peritoneal dialysis facility in jammu

इस दौरान जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सभी यूनिटों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है।

लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए आधुनिक उपकरणों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पहले नेफ्रोलॉजी यूनिट में आठ स्लैड (स्लोलेस एफिशेंट डायलिसिस) मशीनें स्थापित की गई थीं।

इन मशीनों से विभिन्न रोगों से पीड़ित गंभीर मरीजों को डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। इसके बाद यूनिट में अब एपीडी मशीनें लगाई गई हैं।

मौजूदा समय में सुपर स्पेशलिटी में आठ मशीनों पर रोजाना दो शिफ्टों में करीब सोलह डायलिसिस हो रहे हैं। प्रति एक डायलिसिस पर 3-4 घंटे का समय लगता है।

क्या है डायलिसिस सुव‌िधा

automatic peritoneal dialysis facility in jammu

यूनिट में स्थापित मशीनों पर हिमो डायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस के मरीजों को चिकित्सा दी जा रही है। नई मशीनों में पेरिटोनियल डायलिसिस में दस्त, उल्टी, ब्लड की कमी आदि से पीड़ित 10-12 साल के बच्चों का इलाज किया जाता है।

आटोमेटिक मशीन पर मरीज को डाल दिया जाता है। जिससे मशीन खुद ही डायलिसिस प्रक्रिया को पूरा करता है। इससे पहले यह प्रक्रिया मैनुअल पर हो रही थी। जिसमें पर्याप्त स्टाफ और देखभाल करने वालों की जरूरत होती है।

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