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Jammu News: सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण स्वचालित रसोई का प्रोजेक्ट लटका
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू और सांबा जिले के नगर निगम क्षेत्र में आने वाले 200 से अधिक सरकारी स्कूलों में बच्चों को पक्का हुआ मिड-डे-मिल का खाना देने की योजना दो साल से ठंडे बस्ते में है। 2021 में समग्र शिक्षा परियोजना ने अक्षय पात्र फाउंडेशन के साथ एमओयू किया था। इसके तहत सुंजवां में स्वचालित रसोई बनाई जानी थी। नवीनतम मशीनरी लगनी थी। खाना तैयार करने में मानव हस्तक्षेप कम होना था। मगर नक्शा ही पास नहीं हो पाया। मंजूरी नहीं मिलने का कारण बताया जा रहा है कि निर्माण स्थल के लिए जाने वाली सड़क की चौड़ाई 40 फीट तक नहीं है, ऐसे में नगर निगम ने नक्शे पर आपत्ति जताई है। हालांकि नक्शे को आवास और शहरी विकास विभाग के पास भेजा गया है।
योजना का मकसद बच्चों को पक्का हुआ स्वच्छ और पौष्टिक खाना खिलाना था, क्योंकि कई स्कूलों में बनने वाले खाने में सवाल उठ रहे थे। बच्चों को सेहतमंद बनाने से पहले ही योजना अब नक्शे के कारण सरकारी कार्यालयों में भटक रही है। लंबे समय से नक्शा पास न होना संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहा है, क्योंकि नक्शा अगर नियम पर खरा नहीं उतरता है तो दूसरी जमीन भी तलाशी जा सकती थी। इसके अलावा जहां मानकों के अनुरूप सरकारी स्कूल चल रहा है वहां भी रसोई बनाई जा सकती थी।
प्रति बच्चे पर 14 रुपये होने थे खर्च
स्वचालित रसोई पर सात करोड़ रुपये तक खर्च होने है। यहां से खाना तैयार होने के बाद वैन के जरिये स्कूलों तक पहुंचाना था। सरकार ने प्रति बच्चे पर आठ तो फाउंडेशन ने छह रुपए खर्च करने थे। मार्च से कवायद शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक रसोई निर्माण के लिए नक्शे को ही मंजूरी नहीं मिल पाई। प्रदेश में 2004 से स्कूलों में मिड-डे-मील शुरू हुआ, लेकिन खाने की गुणवत्ता पर हमेशा संशय रहता है। बता दें अक्षय पात्र फाउंडेशन मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के 15 हजार से ज्यादा स्कूलों में सेवा देकर 17 लाख छात्रों को भोजन खिला रही है।
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फाउंडेशन की फाइल आई थी। रसोई तक जाने वाली सड़क की चौड़ाई 40 फीट से कम है। ऐसे में मंजूरी नहीं मिली। आवास और शहरी विकास विभाग को मामले से अवगत करवाया है।
राजीव, मुख्य नगर योजनाकार, नगर निगम
रसोई के निर्माण को लेकर नक्शा नगर निगम के पास मंजूरी के लिए भेजा है। सड़क की चौड़ाई को लेकर कोई बात है। लगातार निगम से जानकारी ली जा रही है। अन्य स्थान पर जमीन तय करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
दीप राज, निदेशक, समग्र शिक्षा परियोजना
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जम्मू। जम्मू और सांबा जिले के नगर निगम क्षेत्र में आने वाले 200 से अधिक सरकारी स्कूलों में बच्चों को पक्का हुआ मिड-डे-मिल का खाना देने की योजना दो साल से ठंडे बस्ते में है। 2021 में समग्र शिक्षा परियोजना ने अक्षय पात्र फाउंडेशन के साथ एमओयू किया था। इसके तहत सुंजवां में स्वचालित रसोई बनाई जानी थी। नवीनतम मशीनरी लगनी थी। खाना तैयार करने में मानव हस्तक्षेप कम होना था। मगर नक्शा ही पास नहीं हो पाया। मंजूरी नहीं मिलने का कारण बताया जा रहा है कि निर्माण स्थल के लिए जाने वाली सड़क की चौड़ाई 40 फीट तक नहीं है, ऐसे में नगर निगम ने नक्शे पर आपत्ति जताई है। हालांकि नक्शे को आवास और शहरी विकास विभाग के पास भेजा गया है।
योजना का मकसद बच्चों को पक्का हुआ स्वच्छ और पौष्टिक खाना खिलाना था, क्योंकि कई स्कूलों में बनने वाले खाने में सवाल उठ रहे थे। बच्चों को सेहतमंद बनाने से पहले ही योजना अब नक्शे के कारण सरकारी कार्यालयों में भटक रही है। लंबे समय से नक्शा पास न होना संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहा है, क्योंकि नक्शा अगर नियम पर खरा नहीं उतरता है तो दूसरी जमीन भी तलाशी जा सकती थी। इसके अलावा जहां मानकों के अनुरूप सरकारी स्कूल चल रहा है वहां भी रसोई बनाई जा सकती थी।
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प्रति बच्चे पर 14 रुपये होने थे खर्च
स्वचालित रसोई पर सात करोड़ रुपये तक खर्च होने है। यहां से खाना तैयार होने के बाद वैन के जरिये स्कूलों तक पहुंचाना था। सरकार ने प्रति बच्चे पर आठ तो फाउंडेशन ने छह रुपए खर्च करने थे। मार्च से कवायद शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक रसोई निर्माण के लिए नक्शे को ही मंजूरी नहीं मिल पाई। प्रदेश में 2004 से स्कूलों में मिड-डे-मील शुरू हुआ, लेकिन खाने की गुणवत्ता पर हमेशा संशय रहता है। बता दें अक्षय पात्र फाउंडेशन मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के 15 हजार से ज्यादा स्कूलों में सेवा देकर 17 लाख छात्रों को भोजन खिला रही है।
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फाउंडेशन की फाइल आई थी। रसोई तक जाने वाली सड़क की चौड़ाई 40 फीट से कम है। ऐसे में मंजूरी नहीं मिली। आवास और शहरी विकास विभाग को मामले से अवगत करवाया है।
राजीव, मुख्य नगर योजनाकार, नगर निगम
रसोई के निर्माण को लेकर नक्शा नगर निगम के पास मंजूरी के लिए भेजा है। सड़क की चौड़ाई को लेकर कोई बात है। लगातार निगम से जानकारी ली जा रही है। अन्य स्थान पर जमीन तय करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
दीप राज, निदेशक, समग्र शिक्षा परियोजना