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उप कुलपतियों के कार्यकाल में दो साल का इजाफा

Wed, 08 Apr 2015 11:37 PM IST
Updated Wed, 08 Apr 2015 11:37 PM IST
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assembly to increase the tenure of vice-chancellors for the state universities from 2 years

रियासत सरकार ने जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालयों के उप कुलपतियों के कार्यकाल में दो साल के इजाफे का निर्णय लिया है। इस बाबत शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने द कश्मीर एंड जम्मू यूनिवर्सिटीज संशोधन बिल बुधवार को विधानसभा में पेश किया।

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इसके तहत उप कुलपतियों का कार्यकाल अब पांच साल का होगा जो पहले तीन साल का हुआ करता था। विधेयक के पारित होने और राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
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इसके अलावा मानवाधिकार आयोग और जबावदेही आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाकर पांच साल करने तथा योग्यता आयु 70 से बढ़ाकर 75 साल करने के संबंध में भी दो अलग-अलग संशोधन विधेयक सदन में पेश किए गए।
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नए संशोधन विधेयक के औचित्य पर सरकार की ओर से कहा गया है कि आयोगों के लिए रिटायर जज कम उपलब्ध हो पाते हैं इसलिए उम्र सीमा को 70 से बढ़ाकर 75 वर्ष करने की जरुरत है। विधि मंत्री के बदले ग्रामीण विकास मंत्री अब्दुल हक खान ने जम्मू कश्मीर मानवाधिकार संरक्षण कानून 1977 में संशोधन के लिए बिल पेश किया।

दो आयोगों के अध्यक्षों की योग्यता आयु 5 साल बढ़ेगी

assembly to increase the tenure of vice-chancellors for the state universities from 2 years

आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। अध्यक्ष पद के लिए हाईकोर्ट का रिटायर जज होना जरूरी है जिनकी अधिकतम आयु 70 वर्ष है। अब इसे बढ़ाकर 75 वर्ष किए जाने का प्रावधान बिल में प्रस्तावित है। इस उम्र सीमा के कुछ रिटायर जज उपलब्ध हैं।

बिल में यह भी प्रावधान है कि विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता का पद किसी को नहीं मिलने की स्थिति में विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता को भी सदस्य बनाया जा सकता है। जबाबदेही आयोग एक्ट 2002 में संशोधन के लिए लाए गए बिल में अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने और योग्यता आयु 70 से 75 वर्ष करने का प्रस्ताव है।

इसके तहत कैबिनेट की तीन सदस्यीय सब कमेटी बनाने का प्रस्ताव है जो सर्च कमेटी के रूप में काम करेगी। रिटायर जज की उपलब्धता नहीं रहने के कारण कई साल तक आयोग का अध्यक्ष पद खाली रहा है। उप कुलपतियों के कार्यकाल में बढ़ोरी का औचित्य बताने के क्रम में दूसरे राज्यों का उदाहरण पेश किया गया है।

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