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मोदी-शाह को धमकी नहीं सभ्य तरीके से बनेगी बात, महबूबा के इस बयान से बंटा जम्मू-कश्मीरः पीडीपी के बेग

Fri, 10 Jan 2020 11:51 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 10 Jan 2020 11:51 AM IST
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article 370 removed due to Mehbooba Mufti inflammatory statement  said Muzaffar Hussain Baig of PDP
मुज्जफर हुसैन बेग - फोटो : अमर उजाला

पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं पीडीपी के संस्थापक सदस्य मुज्जफर हुसैन बेग ने कहा कि अनुच्छेद 370 पर पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के भड़काऊ बयानों के कारण ही राज्य दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया।

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बेग ने कहा कि मुफ्ती ने 2017 में केंद्र को चेतावनी दी थी कि अगर अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्राप्त विशेष अधिकारों और सुविधाओं के साथ छेड़छाड़ की गई तो राज्य में तिरंगा पकड़ने वाला कोई नहीं बचेगा। कहा कि, महबूबा ने उनकी गैरहाजिरी में यह बयान दिया। ऐसे ही बयानों के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य से बदलकर केंद्र शासित प्रदेश बन गया है।
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बेग ने मुफ्ती के भड़काऊ बयान की आलोचना करते हुए कहा कि कोई भी अपनी तकलीफें सुनाने के लिए नई दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व को धमकी नहीं दे सकता है। हमें भौंहें चढ़ाकर या प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को धमकी देकर कुछ हासिल नहीं होने वाला। भारत के नागरिक होने के नाते हमें अपनी शिकायतें सभ्य तरीके से उनके सामने रखनी चाहिए। हम इसी तरीके में यकीन रखते हैं।

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फारूक अब्दुल्ला ऐसे नेता हैं जो भारत माता की जय खुलकर कहते हैं

उन्होंने कहा कि यह भड़काऊ बयान था और ऐसा नहीं करना चाहिए था। कई और कश्मीरी नेता भी अनुच्छेद 370 व 35ए पर गलत तस्वीर पेश करते रहे। भारतीय सांसदों के शिष्टमंडल से मिलने से कई नेताओं ने इनकार कर दिया था।

इन सबका नुकसान जम्मू कश्मीर के लोगों को हुआ है। केंद्र सरकार खासतौर से मोदी और शाह को धमकाने से नहीं उनसे आग्रह करने से बात सुलझेगी। पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पांच महीनों से नजरबंद और जेलों में कैद किए गए नेताओं को एक बार में रिहा करने की मांग की है।

कहा कि सरकार नजरबंद नेताओं के मामले में एक या दो नेताओं को कुछ अंतराल के बाद रिहा करने की नीति पर चल रही है। वह भी नजरबंद हुए थे और रिहा किए गए हैं। उन्होंने कहा देश के संविधान व राष्ट्र के लिए समर्पण भाव से काम करने वाले मुख्यधारा के सभी नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए।

तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद हैं। इनमें डॉ. फारूक अब्दुल्ला ऐसे नेता हैं जो भारत माता की जय खुलकर कहते रहे हैं। अगर सरकार को लगता है कि किसी नेता ने देश के विरुद्ध जाकर काम किया हैं तो उस पर अलग से मुकदमा चलाया जा सकता है।

प्रदेश में थर्ड फ्रंट की संभावना से किया इनकार

बेग ने कहा जम्मू कश्मीर के राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनने से यहां रहने वाले हर किसी नागरिक को नुकसान हुआ है। केंद्र शासित प्रदेश में उपराज्यपाल के हाथ में सत्ता रहती है। विधानसभा चुनाव हो और मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल भी बन जाए तो भी उपराज्यपाल की ही मर्जी चलती है।

बेग ने हाल ही में उपराज्यपाल  से मुलाकात करने वाले कश्मीरी सियासी नेताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें यह पता नहीं है कि उपराज्यपाल केंद्र शासित प्रदेश को न तो राज्य का दर्जा दे सकते हैं और न ही डोमिसाइल हक पर कोई फैसला ले सकते है। यह क्षेत्राधिकार केवल केंद्र सरकार व संसद का है। उन्होंने प्रदेश में थर्ड फ्रंट की संभावना से भी इनकार किया।

प्रदेश के नागरिकों को रोजगार, भूमि पर डोमिसाइल हक मिले
बेग ने कहा कि जम्मू कश्मीर प्रदेश के नागरिकों को हिमाचल प्रदेश, असम व अन्य उत्तर पूर्व के प्रदेशों की तरह रोजगार व भूमि पर डोमिसाइल हक मिलना चाहिए। महाराजा के समय में भी ऐसा ही था। उन्होंने आशा प्रकट की कि इस संबंध में केंद्र सरकार जल्द ही उचित कदम उठाएगी।

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