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J&K: अनुच्छेद 35ए पर फिर गरमाया रियासत का माहौल, 30 व 31 अगस्त को घाटी में बंद का आह्वान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 25 Aug 2018 01:44 AM IST
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- फोटो : बासित जरगर
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अनुच्छेद 35-ए पर फिर रियासत का माहौल गरमा गया है। जम्मू संभाग में वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों ने अनुच्छेद को खत्म करने के लिए आवाज बुलंद की। कश्मीर में अलगाववादियों ने अब 30 व 31 अगस्त को घाटी में बंद का आह्वान किया है। पहले 23-27 अगस्त को बंद की कॉल दी गई थी। लेकिन 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई होने की संभावना कम है।
सोमवार के लिए लिस्ट जारी कर दी गई है। पूरक लिस्ट में इस मुद्दे को शामिल किए जाने की संभावना न के बराबर है। कानूनविदों का मानना है कि अब इस मुद्दे पर 31 अगस्त को सुनवाई हो सकती है। यही वजह है कि अलगाववादियों ने अपने बंद के एलान की तारीख आगे टाल दी।
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सोमवार के लिए लिस्ट जारी कर दी गई है। पूरक लिस्ट में इस मुद्दे को शामिल किए जाने की संभावना न के बराबर है। कानूनविदों का मानना है कि अब इस मुद्दे पर 31 अगस्त को सुनवाई हो सकती है। यही वजह है कि अलगाववादियों ने अपने बंद के एलान की तारीख आगे टाल दी।
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अनुच्छेद 35ए की संविधानिक वैधता के खिलाफ एक और याचिका दायर, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर राजी
एकजुट जम्मू नामक एनजीओ ने संविधान के अनुच्छेद 35ए की संविधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए दखल याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष शुक्रवार को एनजीओ के चेयरमैन अंकुर शर्मा द्वारा दायर याचिका का उल्लेख करते हुए इस पर सुनवाई की अपील की गई। पीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए इस पर मुख्य मामले के साथ अगले हफ्ते सुनवाई का निर्णय लिया। याचिका में अनुच्छेद 35ए को असंविधानिक करार देने की अपील की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह प्रावधान समानता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, यह असमानता को बढ़ावा देने वाला है। इससे क्षेत्रवाद, प्रांतवाद और मतभेद को बढ़ावा मिलता है। साथ ही यह प्रावधान दो राष्ट्र की थ्योरी वाला है। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा का चरित्र इस्लामिक ही रहे। इस महीने की शुरुआत में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 35ए के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों ने बुलंद की आवाज, 35-ए हटाने की मांग पर निकाली रैली
बंटवारे के समय पाकिस्तान छोड़कर जम्मू-कश्मीर में आकर बसे वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों ने अनुच्छेद 35-ए हटाने की मांग पर ड्रीमलैंड पार्क से जिला सचिवालय तक रैली निकाली। उन्होंने 35-ए को उनके अधिकारों का हनन बताया। कहा कि इसकी वजह से वे राज्य की नागरिकता व अधिकार से वंचित हैं। वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष लब्बा राम गांधी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय से उम्मीद है कि इसे रद्द कर कोर्ट रिफ्यूजियों के साथ न्याय होगा। राज्य में 35-ए की वजह से उनकी तीन पीढ़ियों ने सिर्फ बर्बादी देखी है। न तो उनके लिए रोजगार है और न ही स्थायी बंदोबस्त। कश्मीर केंद्रित सरकारों ने कभी भी रिफ्यूजियों के हक में बात नहीं की।
अलगाववादियों ने अब 30-31 को बंद का किया ऐलान
अलगाववादियों के संगठन ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने शुक्रवार को 25 और 26 अगस्त को अनुच्छेद 35-ए के समर्थन में बंद की कॉल को स्थगित कर दिया। सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जेआरएल ने अब 30 और 31 अगस्त को बंद का आह्वान किया है। मीरवाइज ने ट्वीट किया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट अब 31 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के स्टेट सब्जेक्ट लॉ को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई करेगा इसलिए अब राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन 30 और 31 अगस्त को होगा। हालांकि, समाज के विभिन्न हिस्सों द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।