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...और जमीन से लिपट कर रोया मीर मोहम्मद
ब्यूरो, अमर उजाला/लाम
Updated Fri, 24 Jun 2016 10:50 AM IST
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जमीन से लिपट कर रोए मीर मोहम्मद
- फोटो : Amar Ujala
खेत में पहुंचते ही शीश झुका कर मिट्टी को चूमा और फिर उसे हाथों में उठाकर खुद को नम आंखों से याद किया। कभी खेत के उस कोने तो कभी दूसरे कोने से लिपट कर रोते मीर मोहम्मद की हालत एक ऐसे बच्चे की तरह थी, जिसकी मां बिछुड़ने के बाद उसे कई साल बाद मिली हो।
पंद्रह साल बाद मोहम्मद अपने खेतों में आकर हद से ज्यादा खुश हो रहा था। जमीन में पांव रखते ही मानो जैसे उसने सारा संसार पा लिया।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में मोहम्मद ने बताया कि वर्ष 2000 में सेना ने उसकी जमीन में माइन लगा दिए। उसके पास अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए उसकी जमीन ही थी। माइन लगने के बाद उसका खेत में जाना बंद हो गया। परिवार में करीब आधा दर्जन सदस्यों की परवरिश का जिम्मा मोहम्मद पर था। ऐसे में वह अपनी जमीन से महरूम हो गया।
उसने बताया कि पंद्रह साल से वह अपनी जमीन से माइन हटने का इंतजार कर रहा था। वीरवार को जैसे ही सैन्य और राजस्व अधिकारियों ने उसे जमीन के कागज सौंपे तो वह खुशी के मारे झूम उठा। उसने कहा कि अब कम से कम अपने परिवार का गुजारा कर सकेगा।
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पंद्रह साल बाद मोहम्मद अपने खेतों में आकर हद से ज्यादा खुश हो रहा था। जमीन में पांव रखते ही मानो जैसे उसने सारा संसार पा लिया।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में मोहम्मद ने बताया कि वर्ष 2000 में सेना ने उसकी जमीन में माइन लगा दिए। उसके पास अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए उसकी जमीन ही थी। माइन लगने के बाद उसका खेत में जाना बंद हो गया। परिवार में करीब आधा दर्जन सदस्यों की परवरिश का जिम्मा मोहम्मद पर था। ऐसे में वह अपनी जमीन से महरूम हो गया।
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उसने बताया कि पंद्रह साल से वह अपनी जमीन से माइन हटने का इंतजार कर रहा था। वीरवार को जैसे ही सैन्य और राजस्व अधिकारियों ने उसे जमीन के कागज सौंपे तो वह खुशी के मारे झूम उठा। उसने कहा कि अब कम से कम अपने परिवार का गुजारा कर सकेगा।
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