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18 हजार फीट की ऊंचाई पर सियाचिन में हिमस्खलन, दो जवान शहीद

Sat, 30 Nov 2019 06:56 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 30 Nov 2019 06:56 PM IST
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Army patrol operating in Southern Siachen Glacier hit by avalanche, 2 personnel succumbed
सियाचिन में शहीद हुए जवान - फोटो : भारतीय सेना

सियाचिन ग्लेशियर में शनिवार को भारी हिमस्खलन में सेना की पेट्रोलिंग पार्टी के दो जवान दबकर शहीद हो गए। एक पखवाड़े में हिमस्खलन की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 18 नवंबर को चार जवान शहीद हो गए थे। सेना के दो पोर्टरों की भी घटना में मौत हुई थी।

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सियाचिन के दक्षिणी इलाके में सेना के जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसी दौरान सुबह भारी हिमस्खलन हो गया। इसकी चपेट में आकर पेट्रोलिंग पार्टी के सभी जवान दब गए। सैन्य प्रवक्ता राजेश कालिया ने बताया कि हिमस्खलन की सूचना मिलते ही एवलांच रेस्क्यू टीम (एआरटी) को मौके पर भेजा गया। 
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साथ ही हेलीकाप्टर को भी हिमस्खलन पीड़ितों को लाने में लगाया गया। व्यापक पैमाने पर सर्च आपरेशन चलाया गया। इस दौरान सभी जवानों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। यहां समुचित इलाज तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद भी दो जवानों ने दम तोड़ दिया।
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शहीद दोनों जवान लद्दाख के निवासी

हिमस्खलन में शहीद हुए दोनों जवान केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के थे। सैन्य प्रवक्ता के अनुसार शहीद होने वालों में नायब सूबेदार छिवांग ग्यालशान व राइफलमैन पदमा नोरग्यास हैं। दोनों लेह जिले के रहने वाले थे।

 

हिमस्खलन की बड़ी घटनाएं

  • 18 नवंबर, 2019 उत्तरी सियाचिन ग्लेशियर में चार जवान शहीद, दो पोर्टरों की भी मौत
  • 10 नवंबर, 2019: कुपवाड़ा में हिमस्खलन की चपेट में आकर दो सैन्य पोर्टरों की मौत
  • 31 मार्च, 2019: कुपवाड़ा में हिमस्खलन में दबकर मथुरा के हवलदार सत्यवीर सिंह शहीद 
  • 3 मार्च, 2019 : कारगिल के बटालिक सेक्टर में हिमस्खलन में पंजाब के नायक कुलदीप सिंह शहीद 
  • 8 फरवरी, 2019: जवाहर टनल पोस्ट के पास हिमस्खलर्न, 10 पुलिसकर्मी लापता, आठ बचाए गए 
  • 3 फरवरी, 2016: हिमस्खलन की चपेट में 10 जवान शहीद, बर्फ में दबे लायंस नायक हनुमनथप्पा को छह दिन बाद निकाला गया लेकिन 11 फरवरी को उन्होंने दम तोड़ दिया 
  • 16 मार्च, 2012: सियाचिन में बर्फ में दबकर छह जवान हुए शहीद 

1984 में हुई थी सेना की तैनाती

दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में भारत ने 1984 में सेना की तैनाती शुरू की थी। दरअसल, इस दौरान पाकिस्तान की ओर से अपने सैनिकों को भेजकर यहां कब्जे की कोशिश की गई थी। इसके बाद से लगातार यहां जवानों की तैनाती रही है।

हर महीने औसतन दो जवान होते हैं शहीद

सियाचिन में हिमस्खलन या प्रतिकूल मौसम की वजह से हर महीने औसतन दो जवानों की मौत हो जाती है। 1984 से लेकर अब तक 900 से अधिक जवान शहीद हो चुके हैं। 

गोलीबारी से कम हिमस्खलन से अधिक गंवाते हैं जान

कराकोरम क्षेत्र में लगभग 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर में तैनात जवान दुश्मनों की गोलीबारी में कम हिमस्खलन और अन्य मौसमी घटनाओं में ज्यादा जान गंवाते हैं। जवानों को यहां फ्रॉस्टबाइट (अधिक ठंड से शरीर के सुन्न हो जाने) और तेज हवाओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही तापमान शून्य से 60 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है।               

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