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कुपवाड़ा में लापता युवकों के मामले में सेना ने शुरू की जांच

Wed, 16 Dec 2015 10:40 PM IST
Updated Wed, 16 Dec 2015 10:40 PM IST
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army orders inquiry into missing 3 villagers case in kupwara

सेना ने कुपवाड़ा से लापता युवकों के मामले की जांच शुरू कर दी है। सेना के 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जब भी इस तरह की घटनाओं का पुलिस और न्यायपालिका द्वारा संज्ञान लिया जाता है तो सेना खुद जांच शुरू कर देती है। हमारी जांच जारी है और अगर सेना का कोई भी दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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एक कार्यक्रम के दौरान श्रीनगर में सेना की 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने बताया कि मध्य कश्मीर में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल यूसमर्ग के नजदीक बजपथरी जंगल क्षेत्र को सेना द्वारा फायरिंग रेंज के वैकल्पिक स्थल के रूप में पहचान की गई है।
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अगर सेना के इस कदम से स्थानीय लोगों को दिक्कतें होती हैं तो सेना इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी। दुआ ने यह भी कहा कि तोस मैदान को सेना द्वारा खाली कर दिया गया था जिसे वह फायरिंग रेंज के तौर पर इस्तेमाल करती थी।
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नए फायरिंग रेंज के फैसले पर हो सकता है पुनर्विचार

army orders inquiry into missing 3 villagers case in kupwara

सेना को प्रशिक्षण के लिए फायरिंग रेंज की आवश्यकता है। इसके लिए विकल्पों की तलाश की जा रही है और बजपथरी उनमें से एक विकल्प है।

श्रीनगर में सितंबर में हुई सिविल मिलेट्री लाइजन कांफ्रेंस में सेना ने अपने ताजा फायरिंग रेंज के लिए वैकल्पिक स्थल के रूप में बजपथरी को अधिसूचित किए जाने की मांग की थी। इस फैसले का शोपियां और पुलवामा जिले के लोग और अलगाववादी संगठन विरोध कर रहे हैं।

करीब एक महीने तक कुपवाड़ा जिले के मनिगाह जंगल क्षेत्र में आतंकियों के खिलाफ चले ऑपरेशन में आतंकियों के फरार हो जाने को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए दुआ ने कहा कि सेना द्वारा ऑपरेशन चलाया गया जिसमें उन्होंने अपना एक अफसर खोया।

सेना द्वारा 2 आतंकियों को भी ढेर किया गया और सेना एक हद से बाहर इस ऑपरेशन को नहीं चलाना चाहती थी। हम नहीं चाहते थे कि स्थानीय लोगों को दिक्कतें हो लेकिन सेना द्वारा आतंकियों की तलाश जारी है।

आतंकियों द्वारा घुसपैठ के प्रयासों को तेज करने को लेकर कोर कमांडर ने जवाब दिया कि बर्फबारी के कारण अधिकतर घुसपैठ के रास्ते बंद हो चुके हैं। लेकिन कुछ रास्ते अभी भी हैं जहां बर्फ कम पड़ी है और उन इलाकों में घुसपैठ के प्रयास बढ़ सकते हैं लेकिन सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।

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