जवानों का जज्बा बरकरार, सियाचिन से नहीं हटेगी सेना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा का कहना है कि सुरक्षा कारणों से सियाचिन से सेना नहीं हटाई जाएगी। यह महत्वपूर्ण सीमा है। देश की सीमाओं की रक्षा करना सेना का कर्तव्य है।
देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सियाचिन से सेना हटाए जाने के बयान के बावजूद भारतीय सेना सीमा से नहीं हटेगी।
उत्तरी कमान के अलंकरण समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सियाचिन में बर्फीले तूफान के कारण दस जवानों के शहीद होने के बाद भी भारतीय सेना के जवानों के हौसले बुलंद हैं। देश की रक्षा के लिए तत्पर इन जवानों का जज्बा बरकरार है।
पठानकोट हमले के बाद सुरक्षा पर मंथन
देश जान गया है कि जवान किन कठिनाइयों के बीच सियाचिन में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। लांस नायक हनुमंथप्पा और नौ अन्य जवानों की शहादत सेना के लिए इतिहास बन गया है। कहा कि सीमा पार दो-तीन सौ आतंकी अब भी लांचिंग पैड पर घुसपैठ के लिए मौजूद हैं।
आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने के लिए सेना नियंत्रण रेखा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सतर्क है। पठानकोट हमले के बाद पूरे देश की सीमाओं व आंतरिक सुरक्षा पर पुनर्मंथन हुआ है। पठानकोट हमले के बाद सेना के ही कुछ जवानों का आईएसआई के साथ मिले होने की सूचनाएं हैं।
संदिग्ध जवानों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि कोई दुश्मन एजेंट सेना में भर्ती नहीं हो सके। हुड्डा ने कहा कि 25 साल से सेना आतंकवाद से लड़ रही है। अब आतंकी घटनाओं में कमी आई है लेकिन ट्रेंड में बदलाव आया है। इन बदलाव के कारण सेना की चुनौतियां बढ़ गई हैं। शिक्षित युवाओं को आतंकी संगठन भर्ती कर रहे हैं। इन युवाओं को मुख्यधारा में लाने का सेना प्रयास कर रही है।
अब लद्दाख में लिब्रेशन आर्मी की घुसपैठ नहीं
लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने हाल ही में चीन दौरे के दौरान अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों में मधुर संबंध हो, इसके लिए चीन भी तैयार है। पिछले कुछ समय से हालात में सुधार हुआ है। अब लद्दाख में लिब्रेशन आर्मी की घुसपैठ नहीं होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि चीनी सीमा पर बेहतर ढांचा तैयार है। सड़क तैयार हैं। भारतीय सीमा में ऐसा ढांचा नहीं है। बेहतर ढांचा तैयार करने के लिए भारत सरकार भी कटिबद्ध है। हालांकि, मौजूद सुविधाओं के बीच जवान सीमा की रक्षा करने में सक्षम हैं।
चालीस फुट बर्फ और माइनस 40 डिग्री तापमान के बीच ढांचागत सुविधा काफी जरूरी है। इसके लिए सरकार के पास कई प्रस्ताव हैं। जवानों को इन दुर्गम क्षेत्रों में विशेष भत्ता बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव है।