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Jammu kashmir News : कश्मीरियत की एक और मिसाल, मुस्लिम लोक गायक गुलजार गनई ने गाये शिव भजन
Thu, 30 Jun 2022 03:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 30 Jun 2022 03:40 AM IST
सार
गुलजार गनई कहते हैं कि हम मुसलमान हैं, लेकिन हमने ऋषि-मुनियों, सूफी-संतों की धरती की अपनी परंपरा को जिंदा रखा है। हम चाहते हैं कि यह परंपरा आगे भी जारी रहे, ताकि हमारे बच्चे भी इससे अवगत हो सकें। गुलजार ने कहा, कश्मीर का भाईचारा सदियों से मशहूर रहा है और हम हमेशा इसे ऐसे ही जिंदा रखने में अपना पूरा योगदान देते रहेंगे।
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गुलजार गनई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कश्मीर की धरती जोकि सूफी, संतों और ऋषि मुनियों की धरती के तौर पर जानी जाती है। इसमें आज भी वही भाव पनप रहा है, जहां एक बार बार फिर से धर्मनिरपेक्षता और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल दोहराई गई है। कश्मीर के एक प्रसिद्ध मुस्लिम लोक गायक गुलजार गनई ने शिव भजन गाकर कश्मीरियत की मिसाल पेश की है। इन भजनों को उस दिन रिकॉर्ड किया गया जब जम्मू से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर जाने के लिए शिवभक्तों का पहला जत्था रवाना हुआ।
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गुलजार ने विशेष रूप से अमर उजाला के साथ बात करते हुए कहा, उन्होंने दो भजन गाए हैं, जोकि कश्मीर भाषा में हैं। यह कलाम कृष्ण जू राजधान जोकि बुजुर्ग कश्मीरी शायर हैं और दूसरा आलोक का है। उन्होंने कहा कि ऐसे भजन गाना हमारी परंपरा रही है। मोहम्मद अब्दुल्ला तिब्बत बकाल साहब सूफियाना मौसिकी के दिग्गज थे, जिन्होंने ये भजन अपने समय में रेडियो में गाये थे। हमने भी उनसे और अन्य दिग्गजों से सीखा है और आज भी हमने उस परंपरा को संजोये रखा है।
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गुलजार ने कहा, जो राजधान साब का कलाम है वह इस तरह है ‘बेलतय मादल वीना गुलाब पम्पोश दस्तय’। उन्होंने बताया कि कश्मीरी में इसका मतलब है बेलतय, मादल, वीना, गुलाब और पम्पोश सभी फूल हैं और शायर कहता है कि मैं यह सभी फूल इकट्ठे कर अपने शंकर भगवान को अर्पित करूं। दूसरा कलाम जोकि आलोक जी का है, ‘हल्मो हल्मो गुलाब शंकरस पूजि लागॉव’ का मतलब है कि झोली भर के सभी गुलाब अपने शंकर भगवान की पूजा में लगाऊं।
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गुलजार ने कहा कि हम खुशकिस्मत हैं कि आज श्री अमरनाथ यात्रा चल रही है। कोरोना में देश प्रभावित हुआ है, लेकिन आज जो दिन आया है, मैं एक लोक संगीतकार हूं और मैंने अपने फन से शिव भक्तों का स्वागत किया है। कहा कि हम सूफी संगीतकार हैं। उन्होंने कहा कि हम मुसलमान है लेकिन हमने अपनी परंपरा को जिंदा रखा है। हमारे पैगंबर मोहम्मद साहब ने भी हमेशा प्यार का पैगाम दिया है। शंकर भगवान ने भी प्यार मोहब्बत का संदेश दिया है। जहां-जहां अमन है वहां तरक्की होती है, इसलिए हम भी चाहते हैं कि यहां हमारी युवा पीढ़ी अमन शांति देखे, क्योंकि हमने बुरा दौर देखा है।
उन्होंने कहा कि यह ऋषि मुनियों की वाणी है और उन्होंने प्यार मोहब्बत का संदेश दिया। हम चाहते हैं कि यह परंपरा आगे भी जारी रहे, ताकि हमारे बच्चे भी इससे अवगत हो सकें। गुलजार ने कहा, कश्मीर का भाईचारा सदियों से मशहूर रहा है और हम हमेशा इसे ऐसे ही जिंदा रखने में अपना पूरा योगदान देते रहेंगे।