सरकार कर रहा है जम्मू के साथ ये बड़ा भेदभाव
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पूर्व मंत्री गुलचैन सिंह चाढ़क ने सरकार पर जम्मू के साथ एक और भेदभाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पहले बीएड का एक साल का कोर्स होता था, जिसे जम्मू यूनिवर्सिटी में बढ़ाकर दो साल कर दिया गया, लेकिन कश्मीर यूनिवर्सिटी में अभी भी एक साल का कोर्स है।
पूर्व मंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यह जम्मू के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव है। कश्मीर के विद्यार्थी एक साल में कोर्स पूरा करेंगे, जबकि नौकरी के दौरान दोनों की मान्यता बराबर होगी। अब जम्मू के विद्यार्थियों को या तो दो साल में कोर्स पूरा करना होगा, अन्यथा उन्हें कश्मीर जाकर एक साल में कोर्स करना होगा।
चूंकि दोनों यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राज्यपाल और प्रो चांसलर मुख्यमंत्री हैं, इसलिए रियासत के दोनों संभागों में स्थित यूनिवर्सिटी में एक जैसे नियम लागू किए जाने चाहिएं।
नियम एक जैसे होने चाहिए
चाढ़क ने कहा कि इस संबंध में जस्टिस वर्मा की सिफारिशों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में कोर्स दो साल का करने के निर्देश दिए हैं। वह दो साल के कोर्स के विरोधी नहीं हैं, लेकिन नियम एक जैसे होने चाहिए।
जम्मू में कई निजी बीएड कालेज हैं, जिसमें रियासत के बाहर से विद्यार्थी बीएड करने के लिए आते हैं। यदि जम्मू में दो साल लगेंगे तो बाहरी राज्यों के विद्यार्थी भी कश्मीर से कोर्स करने के लिए पहुंचेंगे। यह एक षड्यंत्र है।
कश्मीर के कालेजों में पहले ही नन अटैंडिंग कैटेगरी के तहत बीएड के कोर्स हो रहे हैं। कालेज विद्यार्थियों से फीस सहित अन्य शुल्क ले लेते हैं और उन्हें सिर्फ परीक्षा देने के लिए आना पड़ता है।