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पाकिस्तान की आतंकियों को भेजने की एक और करतूत आई सामने
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जम्मू कश्मीर के सांबा जिले के भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ को बनाई गई सुरंग के पा?
- फोटो : SAMBA
जम्मू। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरंग मिलने से पाकिस्तान की आतंकियों को भारतीय सीमा में भेजने की एक और करतूत सामने आई है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान की शह पर बनाई गई सुरंग का पता लगा है। इससे पहले भी सात बार सुरंग पकड़ी जा चुकी है। एलओसी पर सख्ती के बाद पाकिस्तान ने आतंकियों को धकेलने के लिए दोबारा से अंतरराष्ट्रीय सीमा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। पुलवामा हमले में शामिल आतंकी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा से ही घुसपैठ कर दाखिल हुए थे। इसकी पुष्टि एनआईए की ओर से दाखिल चार्जशीट में हो चुकी है।
सूत्रों के अनुसार एलओसी पर सख्ती के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा का इस्तेमाल आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए शुरू कर दिया है। इसके तहत सुरंग भी खोदी जा रही है। सुरंग बिना पाकिस्तानी रेंजर्स की सहमति के नहीं खोदी जा सकती है। इससे पाकिस्तान की मिलीभगत सामने आती है। पाकिस्तान की सहमति का एक और पुख्ता सबूत यह है कि सुरंग के मुहाने को ढंकने के लिए जिस बोरी का इस्तेमाल किया गया है उस पर पाकिस्तान का नाम है।
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की ओर से लगातार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नई साजिशें की जा रही हैं। इसके तहत सीमा पार से ड्रोन के जरिये हथियारों की सप्लाई की कोशिश को कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में नाकाम किया जा चुका है। इनपुट बार्डर इलाकों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन के जरिये हमले का भी है। इसी की वजह से अतिरिक्त सतर्कता भी बरती जा रही है। इसके साथ ही हथियारों व ड्रग की तस्करी में सुरंग का इस्तेमाल किए जाने की साजिश से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इन दोनों ही माध्यम से मिली राशि का इस्तेमाल आतंकी घटनाओं में किया जाता रहा है।
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बीएसएफ ने चलाया था ऑपरेशन सुदर्शन
नगरोटा हमले के बाद जिसमें आतंकियों के अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ की खबरें आई थी, बीएसएफ की ओर से बार्डर इलाकों में ऑपरेशन सुदर्शन चलाया गया था। इसके तहत बार्डर से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों तथा ढोक (झोपड़ी) में रहने वालों की सूची बनाई गई थी। यह फुलप्रूफ इंतजाम करने की कोशिश की गई थी कि यदि घुसपैठ की कोशिश हो तो उसका आसानी से पता लगाया जा सके।
बरसात का महीना सुरंग बनाने को मुफीद
बरसात का महीना सुरंग बनाने के लिए मुफीद होता है क्योंकि मिट्टी गीली होती है। इससे सुरंग खोदने में आसानी रहती है। साथ ही इसकी भनक भी नहीं लग पाती है। सुरंग बनाने में लकड़ी के सपोर्ट का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि वह गिर न सके। पिछले दिनों पकड़ी गई सुरंग में लकड़ी के सपोर्ट का इस्तेमाल किया गया था।
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बॉर्डर इलाकों में लगातार एंटी टनलिंग का काम जारी है। इसी वजह से पाकिस्तान की मौजूदा साजिश का पर्दाफाश हुआ है। सुरंग बिना पाकिस्तान की मदद के नहीं खोदी जा सकती है।
-एनएस जमवाल, आईजी-बीएसएफ
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सूत्रों के अनुसार एलओसी पर सख्ती के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा का इस्तेमाल आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए शुरू कर दिया है। इसके तहत सुरंग भी खोदी जा रही है। सुरंग बिना पाकिस्तानी रेंजर्स की सहमति के नहीं खोदी जा सकती है। इससे पाकिस्तान की मिलीभगत सामने आती है। पाकिस्तान की सहमति का एक और पुख्ता सबूत यह है कि सुरंग के मुहाने को ढंकने के लिए जिस बोरी का इस्तेमाल किया गया है उस पर पाकिस्तान का नाम है।
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सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की ओर से लगातार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नई साजिशें की जा रही हैं। इसके तहत सीमा पार से ड्रोन के जरिये हथियारों की सप्लाई की कोशिश को कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में नाकाम किया जा चुका है। इनपुट बार्डर इलाकों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन के जरिये हमले का भी है। इसी की वजह से अतिरिक्त सतर्कता भी बरती जा रही है। इसके साथ ही हथियारों व ड्रग की तस्करी में सुरंग का इस्तेमाल किए जाने की साजिश से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इन दोनों ही माध्यम से मिली राशि का इस्तेमाल आतंकी घटनाओं में किया जाता रहा है।
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बीएसएफ ने चलाया था ऑपरेशन सुदर्शन
नगरोटा हमले के बाद जिसमें आतंकियों के अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ की खबरें आई थी, बीएसएफ की ओर से बार्डर इलाकों में ऑपरेशन सुदर्शन चलाया गया था। इसके तहत बार्डर से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों तथा ढोक (झोपड़ी) में रहने वालों की सूची बनाई गई थी। यह फुलप्रूफ इंतजाम करने की कोशिश की गई थी कि यदि घुसपैठ की कोशिश हो तो उसका आसानी से पता लगाया जा सके।
बरसात का महीना सुरंग बनाने को मुफीद
बरसात का महीना सुरंग बनाने के लिए मुफीद होता है क्योंकि मिट्टी गीली होती है। इससे सुरंग खोदने में आसानी रहती है। साथ ही इसकी भनक भी नहीं लग पाती है। सुरंग बनाने में लकड़ी के सपोर्ट का भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि वह गिर न सके। पिछले दिनों पकड़ी गई सुरंग में लकड़ी के सपोर्ट का इस्तेमाल किया गया था।
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बॉर्डर इलाकों में लगातार एंटी टनलिंग का काम जारी है। इसी वजह से पाकिस्तान की मौजूदा साजिश का पर्दाफाश हुआ है। सुरंग बिना पाकिस्तान की मदद के नहीं खोदी जा सकती है।
-एनएस जमवाल, आईजी-बीएसएफ