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Jammu News: पशु चट कर रहे हरियाली, रात में की जा रही खेतों की रखवाली
Tue, 04 Feb 2025 02:22 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Tue, 04 Feb 2025 02:22 AM IST
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परगवाल में रात को टाॅर्च और डंडा लेकर किसान फसल की रखवाली कर रहे हैं। कुछ किसानों ने तो खेतों क
- फोटो : paragwal
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खेतों में सरहद जैसी पहरेदारी, किसान टार्च और डंडा लेकर कर रहे चौकीदारी
दरिया चिनाब के बीच बने टापू से निकलता है 50 से 70 जंगली जानवरों का झुंड
परगवाल। कड़ाके की ठंड में जंगली जानवरों से फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। परगवाल के किसान हाथ में टॉर्च और डंडा लेकर खेतों में सरहद जैसी चौकीदारी कर रहे हैं।
जरा सी देर होने पर मवेशी फसलों को चट कर जाते हैं। अंधेरा होते ही किसान खेत की रखवाली के लिए खेतों में आ जाते हैं। कुछ किसानों ने तो खेतों के बीच झोपड़ियां बना ली हैं, जहां बैठकर पूरी रात फसलों की देखरेख करते हैं। गांव सजवाल और गवाढ़ के पास चौकीदारी कर रहे किसानों ने बताया कि 50 से 70 जंगली जानवरों का झुंड दरिया चिनाब के बीच बने टापू से निकलता है और थोडी देर में ही खेत को तबाह कर भाग जाता है। मजबूरी ही है जो यहां खींच लाती है।
किसान वारी सिंह, सुभाष सिंह, बहादुर सिंह और कालू राम ने बताया कि पूरी रात बैठकर रखवाली करनी पड़ती है। कई बार तो ठंड लगने से बीमार भी हो चुके हैं। अगर फसल नहीं बचेगी तो गुजारा कैसे होगा। किसान ही है जो इतना कष्ट झेलकर भी मुस्कराता है। संवाद
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दरिया चिनाब के बीच बने टापू से निकलता है 50 से 70 जंगली जानवरों का झुंड
परगवाल। कड़ाके की ठंड में जंगली जानवरों से फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। परगवाल के किसान हाथ में टॉर्च और डंडा लेकर खेतों में सरहद जैसी चौकीदारी कर रहे हैं।
जरा सी देर होने पर मवेशी फसलों को चट कर जाते हैं। अंधेरा होते ही किसान खेत की रखवाली के लिए खेतों में आ जाते हैं। कुछ किसानों ने तो खेतों के बीच झोपड़ियां बना ली हैं, जहां बैठकर पूरी रात फसलों की देखरेख करते हैं। गांव सजवाल और गवाढ़ के पास चौकीदारी कर रहे किसानों ने बताया कि 50 से 70 जंगली जानवरों का झुंड दरिया चिनाब के बीच बने टापू से निकलता है और थोडी देर में ही खेत को तबाह कर भाग जाता है। मजबूरी ही है जो यहां खींच लाती है।
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किसान वारी सिंह, सुभाष सिंह, बहादुर सिंह और कालू राम ने बताया कि पूरी रात बैठकर रखवाली करनी पड़ती है। कई बार तो ठंड लगने से बीमार भी हो चुके हैं। अगर फसल नहीं बचेगी तो गुजारा कैसे होगा। किसान ही है जो इतना कष्ट झेलकर भी मुस्कराता है। संवाद
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