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Jammu News: दुर्घटनाओं का कारण बन रहे लावारिस पशुओं को पहुंचाया जाए गोशाला
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अखनूर के पन्नू में बनाई गई गोशाला ।
- फोटो : RSPURA
अखनूर। कस्बे में घूम रहे लावारिस पशुओं को गोशाला में रखने के लिए क्षेत्र के लोग आगे आ गए हैं। म्यूनिसिपल कमेटी से आग्रह किया है कि इन पशुओं जो सड़कों पर दुघर्टना की वजह बनते हैं उन्हें गोशाला में रखा जाए। ताकि छह माह से बनी गोशाला का इस्तेमाल हो।
कस्बे के पन्नु चौक में 45 लाख की लागत से लावारिस पशुओं को रखने के लिए गोशाला बनाई गई। इसके बने छह माह बीत गए हैं, मगर म्यूनिसिपल कमेटी शहर के बाजार में घूम लावारिस पशुओं को गोशाला में पहुंचाने की तरफ ध्यान नही दे रही है। क्षेत्र के विभिन्न संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लावारिस घूम रहे पशुओं को गोशाला में पहुुंचाने की मांग की है।
क्षेत्र गोशाला सेवक रवि वर्मा ने बताया कि कस्बे में सैकड़ों की संख्या में लावारिस पशु घूमते देखे जा सकते हैं। गोशाला निर्माण होने पर इनको उसमें रखने की आस जगी थी, मगर इस दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।
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दुकानदार अशोक लंगर ने बताया कि सड़कों और बाजारों में घूम रहे लावारिस पशु अक्सर दुघर्टनाओं का कारण बनते हैं, मगर म्यूनिसिपल कमेटी इनको गोशाला में नहीं पहुंचा रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता राकेश शर्मा ने बताया कि गोशाला बनाने का एक ही उद्देश्य था कि लावारिस पशुओं को रखा जाए, मगर छह माह बाद भी उन्हें रखा नहीं जा रहा है।
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कस्बे के पन्नु चौक में 45 लाख की लागत से लावारिस पशुओं को रखने के लिए गोशाला बनाई गई। इसके बने छह माह बीत गए हैं, मगर म्यूनिसिपल कमेटी शहर के बाजार में घूम लावारिस पशुओं को गोशाला में पहुंचाने की तरफ ध्यान नही दे रही है। क्षेत्र के विभिन्न संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लावारिस घूम रहे पशुओं को गोशाला में पहुुंचाने की मांग की है।
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क्षेत्र गोशाला सेवक रवि वर्मा ने बताया कि कस्बे में सैकड़ों की संख्या में लावारिस पशु घूमते देखे जा सकते हैं। गोशाला निर्माण होने पर इनको उसमें रखने की आस जगी थी, मगर इस दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।
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दुकानदार अशोक लंगर ने बताया कि सड़कों और बाजारों में घूम रहे लावारिस पशु अक्सर दुघर्टनाओं का कारण बनते हैं, मगर म्यूनिसिपल कमेटी इनको गोशाला में नहीं पहुंचा रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता राकेश शर्मा ने बताया कि गोशाला बनाने का एक ही उद्देश्य था कि लावारिस पशुओं को रखा जाए, मगर छह माह बाद भी उन्हें रखा नहीं जा रहा है।