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Earthquake In Ladakh: लद्दाख और कारिगल में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 4.7 रही तीव्रता
Tue, 04 Jul 2023 09:31 AM IST
शाहरुख खान
एएनआई, जम्मू-कश्मीर
एएनआई, जम्मू-कश्मीर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 04 Jul 2023 09:31 AM IST
सार
Ladakh Earthquake News : लेह और कारगिल से 401 किलोमीटर उत्तर में रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप सुबह 7 बजकर 38 मिनट पर भूकंप आया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और कारगिल में मंगलवार की सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.7 मापी गई। सुबह करीब 7:38 पर लद्दाख और कारगिल से 401 किलोमीटर उत्तर में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, मंगलवार को लद्दाख के लेह और कारगिल से 401 किलोमीटर उत्तर में रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप सुबह 7 बजकर 38 मिनट पर भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने ट्वीट किया कि भूकंप की तीव्रता 4.7 रही। अभी तक किसी के हताहत होने या घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, अभी ब्योरे की प्रतीक्षा है।
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नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, मंगलवार को लद्दाख के लेह और कारगिल से 401 किलोमीटर उत्तर में रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप सुबह 7 बजकर 38 मिनट पर भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने ट्वीट किया कि भूकंप की तीव्रता 4.7 रही। अभी तक किसी के हताहत होने या घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, अभी ब्योरे की प्रतीक्षा है।
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क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
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जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।
कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।