अनंतनाग भाजपा जिला उपाध्यक्ष की हत्या में खुलासा, गृह मंत्रालय के पत्र के बाद भी हटा ली गई सुरक्षा
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अनंतनाग में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गुल मोहम्मद मीर की हत्या में प्रशासनिक चूक सामने आई है। शुरूआती जांच में यह बात सामने आई है कि उनके जीवन को साफ खतरा होने के बाद भी ध्यान नहीं दिया गया। इस बीच हाल ही में डोरू से गिरफ्तार जैश आतंकी हिलाल नायकू की मीर के हत्या मामले में शिनाख्त परेड कराई जाएगी। क्योंकि मीर के परिवार वालों ने दावा किया है कि हिलाल भी हत्या करने वाले गिरोह में शामिल था। पुलिस जल्द ही शिनाख्त परेड कराने की तैयारी में है। ज्ञात हो कि मीर की वैरीनाग इलाके के नौगाम में घर के बाहर चार मई को आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वे भाजपा के टिकट पर 2008 व 2014 का चुनाव लड़ चुके थे।
घटना की शुरूआती जांच में यह बात सामने आई है कि गृह मंत्रालय ने फरवरी में राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मीर को सुरक्षा मुहैया कराने को कहा गया था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। गृह मंत्रालय ने पत्र के साथ मीर का ज्ञापन भी भेजा था जिसमें उनकी सुरक्षा बढ़ाने की खुफिया रिपोर्ट थे। इसके बावजूद सुरक्षा पूरी तरह से हटा ली गई। पुलिस ने गृह विभाग के उस पत्र का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि यदि सुरक्षा कर्मी अपने मूल विभाग में पांच अप्रैल तक नहीं लौटते हैं तो उनकी तनख्वाह के बराबर की राशि संबंधित एसपी या कमांडेंट के वेतन से काट लिया जाएगा। इस आदेश के बाद कई जिलों में सुरक्षा हटा ली गई।
मीर के पुत्र जहूर अहमद मीर ने कहा कि उनके पिता की सुरक्षा दो महीने पहले हटाई गई। इसे वापस लेने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने भाजपा नेताओं से लेकर एसएसपी अनंतनाग तक को पत्र लिखा लेकिन उन्होंने असमर्थता जताई। उन्होंने एडीजी सुरक्षा मुनीर खान के पास जाने को कहा। अधिकारियों के अनुसार मीर का नाम उस सूची में था जिसे मुख्य सचिव ने फरवरी में जारी किया था जिसमें कई नेताओं की सुरक्षा हटा ली गई थी। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षा हटाने संबंधी फैसले का विरोध किया था। बाद में मुख्य सचिव ने सुरक्षा के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी का पुनर्गठन करते हुए पुलिस अधिकारियों को इससे निकाल दिया। इनके स्थान पर गृह सचिव शालीन काबरा को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया, जिसकी भारी आलोचना हुई।
राज्यपाल प्रशासन की हुई थी जमकर आलोचना
मीर की हत्या के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक के प्रशासन की जमकर आलोचना हुई थी। एडीजी मुनीर खान को चूक का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले राज्यपाल ने मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम को जांच का जिम्मा सौंपा था, लेकिन राजनीतिक दलों ने घाटी में कुछ लोगों की सुरक्षा हटाकर हालात खराब करने का आरोप लगाया था। इसके बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच संबंधी आदेश को वापस ले लिया गया था।
सुरक्षा हटने के बाद राजनीतिक लोग बने आसान निशाना
सुरक्षा हटाए जाने के बाद से राजनीतिक लोग आतंकियों के लिए आसान निशाना बन गए हैं। कुलगाम में चार अप्रैल को पंच अब्दुल मजीद डार की आतंकियों ने हत्या कर दी। 14 मार्च को आतंकियों ने गोली मारकर नेकां कार्यकर्ता मोहम्मद इस्माइल वानी को घायल कर दिया। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिला में सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुमंद मजीद भट की आतंकियों ने हत्या कर दी।