ऑनलाइन स्टडी बच्चों को दे रही तनाव, मुश्किल में अभिभावक और शिक्षक, इन बातों का रखें ध्यान
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कोरोना संक्रमण के बीच जम्मू-कश्मीर में ऑनलाइन स्टडी (शिक्षा) बच्चों को डिप्रेशन दे रही है। बच्चों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव के लक्षण बढ़े हैं। सीमित सुविधाओं में ऑनलाइन स्टडी बच्चों के साथ अभिभावकों और शिक्षकों को भी परेशान कर रही है। इस श्रेणी में जिनके पास ऑनलाइन स्टडी के स्रोत हैं या जिनके पास नहीं हैं, दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं। अभिभावक अपने लाडलों की ऐसी कई समस्याएं लेकर मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
केस 1
जानीपुर निवासी 11 वर्षीय रोहित के स्वभाव में पिछले कई दिनों से चिड़चिड़ापन बढ़ा है। किसी चीज पर मना करने पर गुस्सा नाक पर रहता है। गैर जरूरी चीजों के लिए जिद बढ़ी है। ऑनलाइन स्टडी में घंटों मोबाइल से जुड़े रहने के कारण शारीरिक वजन भी बढ़ गया है। अनिद्रा की समस्या बढ़ी है। मां बाप उसके इस व्यवहार में आए बदलाव से परेशान हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन स्टडी के चलते उनका बेटा काफी देर तक मोबाइल पर ही व्यतीत करता है, जिसके बाद उसके मानसिक और शारीरिक व्यवहार में बदलाव आया है।
केस 2
गांधीनगर निवासी 9 वर्षीय रागिनी पिछले डेढ़ माह से ऑनलाइन स्टडी कर रही है। चूंकि इतने लंबे समय पर पहली बार ऑनलाइन स्टडी की गई, जिससे मोबाइल से मना करने पर उसमें गुस्सा हावी हो जाता है। कुछ समझाने पर भड़क जाती है। घरवाले उसके इस व्यवहार से परेशान हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन स्टडी में घंटों तक एक ही जगह पर बैठकर गतिविधियां करने से उसकी ऐसी हालत हुई है।
स्क्रीम टाइम बढ़ने से सही ढंग से विश्लेषण नहीं कर पा रहे बच्चे
मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा के अनुसार ऑनलाइन स्टडी में एक वर्ग में ऐसे बच्चे हैं मोबाइल, स्मार्ट फोन, डेस्कटॉप, आईपैड से जुड़े हैं। इससे उनका स्क्रीम टाइम बढ़ा है। मोबाइल स्क्रीन से घंटों जुड़े रहने के कारण वह सही ढंग से विश्लेषण नहीं कर पा रहे हैं।
इसके विपरीत बड़ी संख्या में बच्चे ऑनलाइन स्टडी के साथ गेम व अन्य साइटों से जुड़ गए हैं। इससे उनकी स्क्रीन टाइम की आदत बढ़ी है। इन परिस्थितियों में उन्हें मोबाइल से मना करने पर वे गुस्से और तनाव से परेशान हो रहे हैं। उनके अनुसार उनकी क्लीनिक और फोन पर अभिभावक ऑनलाइन स्टडी से जुड़ी अपने बच्चों की ऐसी समस्याओं को लेकर संपर्क कर रहे हैं।
एक वर्ग में ऐसे बच्चे हैं, जिनके पास स्मार्टफोन, लैपटॉप, डेस्कटॉप और आईपैड जैसे स्रोत नहीं हैं और वे ऑनलाइन स्टडी से पिछड़ रहे हैं। ऐसे बच्चों को अपने भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। ये बच्चे अधिक डिप्रेशन में जा रहे हैं, उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है।
ज्यादा स्क्रीन टाइम के प्रभाव
- घंटों मोबाइल से जुड़े रहने के कारण आंखों पर असर पड़ रहा है
- आंखें लाल होना, देखने में समस्या, सिरदर्द, आंखों में थकावट बढ़ी है
- एक ही जगह कई घंटे बैठे रहने से वजन में बढ़ोतरी हुई है
- असंतुलित डाइट से बच्चों में शारीरिक समस्याएं बढ़ रहीं
क्या करें अभिभावक
अभिभावक ऑनलाइन स्टडी को लेकर एक शेड्यूल बनाएं। इसमें बच्चों को ऑनलाइन एडिक्शन से बचाने के लिए उनकी सुपरविजन करें। जरूरत के मुताबिक ही उन्हें मोबाइल का इस्तेमाल करने दें और यह गतिविधियां अपने सामने करवाएं। ऑनलाइन स्टडी के साथ किताबें भी पढ़ाएं।
शिक्षकों के सामने चुनौती
ऑनलाइन स्टडी को लेकर बच्चों और अभिभावकों के साथ शिक्षक भी परेशान हैं। खासतौर पर सरकारी स्तर पर शिक्षक इसके लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं। अधिकांश स्कूलों में ऑनलाइन सुविधा नहीं है। उन्हें बच्चों को ऑनलाइन स्टडी के बारे में समझाने में मुश्किल हो रही है।