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अमरनाथ यात्रा: शिवभक्तों की सेहत का ख्याल रखेंगे पीजी और डीएनबी डाॅक्टर
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। तीन जुलाई से शुरू हो रही श्री अमरनाथ यात्रा की तैयारियां तेज की गई हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र सरकार और प्रदेश प्रशासन का पूरा ध्यान इस तीर्थयात्रा पर है। इस बार शिवभक्तों की सेहत का पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) और डीएनबी (डिप्लोमेट आफ नेशनल बोर्ड) डाॅक्टर ख्याल रखेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य निदेशालय आपात प्रबंधन कार्ययोजना तैयार कर रहा है। यदि देश भर से पर्याप्त डॉक्टर यात्रा के दाैरान सेवाएं देने के लिए नहीं आते हैं तो पीजी और डीएनबी डॉक्टरों को तैनात किया जाएगा।
निदेशालय ने स्वैच्छिक सेवाएं देने वाले चिकित्सा स्टाफ के नाम भी मांगे हैं। कश्मीर में जम्मू संभाग से सामान्य तौर पर 10-12 डाक्टर और 70-80 पैरा मेडिकल स्टाफ को अमरनाथ यात्रा में ड्यूटी के लिए भेजा जाता हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग में पहले ही डाॅक्टरों की कमी चल रही है। इससे आपात प्रबंधन आंतरिक व्यवस्था में पीजी और डीएनबी डाॅक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी।
जम्मू संभाग के जिला अस्पतालों और मेडिकल काॅलेजों में देशभर से आए करीब 300 डाॅक्टर डीएनबी कर रहे हैं। इसी तरह सैकड़ों पीजी डाॅक्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं। वर्तमान में जम्मू संभाग में जीएमसी जम्मू के अलावा जीएमसी कठुआ, राजोरी, डोडा और उधमपुर में पीजी और डीएनबी डाॅक्टर उपलब्ध हैं। कार्ययोजना में इन डाॅक्टरों की आपातस्थिति में 15-15 दिन की रोस्टर ड्यूटी लगाने का प्रावधान होगा। यह तभी किया जाएगा जब देश के विभिन्न हिस्सों से अपेक्षा से कम डाॅक्टर यात्रा में सेवाएं देने पहुंचेंगे।
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सामान्य तौर पर देशभर से 700-800 डाॅक्टरों की तीर्थयात्रा के दौरान कश्मीर में तैनात किया जाता है। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि स्वैच्छिक तौर पर सेवाएं देने वाले डाॅक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की सूची तैयार की जा रही है, जिसे जून के मध्य तक फाइनल कर लिया जाएगा। इस बार पीजी और डीएनबी डाॅक्टरों की सेवाएं लेने का भी प्रावधान किया गया है और यह बैकअप योजना में रहेगा।
वहीं, श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के एक सूत्र ने बताया कि रोजाना 1000 से 1200 तक अग्रिम यात्री पंजीकरण हो रहा है। पहलगाम आतंकी हमले से पहले यह दैनिक आंकड़ा 15 हजार से अधिक चल रहा था। अब तक साढ़े तीन लाख से अधिक यात्री पंजीकरण करवा चुके हैं।
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जम्मू। तीन जुलाई से शुरू हो रही श्री अमरनाथ यात्रा की तैयारियां तेज की गई हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र सरकार और प्रदेश प्रशासन का पूरा ध्यान इस तीर्थयात्रा पर है। इस बार शिवभक्तों की सेहत का पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) और डीएनबी (डिप्लोमेट आफ नेशनल बोर्ड) डाॅक्टर ख्याल रखेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य निदेशालय आपात प्रबंधन कार्ययोजना तैयार कर रहा है। यदि देश भर से पर्याप्त डॉक्टर यात्रा के दाैरान सेवाएं देने के लिए नहीं आते हैं तो पीजी और डीएनबी डॉक्टरों को तैनात किया जाएगा।
निदेशालय ने स्वैच्छिक सेवाएं देने वाले चिकित्सा स्टाफ के नाम भी मांगे हैं। कश्मीर में जम्मू संभाग से सामान्य तौर पर 10-12 डाक्टर और 70-80 पैरा मेडिकल स्टाफ को अमरनाथ यात्रा में ड्यूटी के लिए भेजा जाता हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग में पहले ही डाॅक्टरों की कमी चल रही है। इससे आपात प्रबंधन आंतरिक व्यवस्था में पीजी और डीएनबी डाॅक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी।
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जम्मू संभाग के जिला अस्पतालों और मेडिकल काॅलेजों में देशभर से आए करीब 300 डाॅक्टर डीएनबी कर रहे हैं। इसी तरह सैकड़ों पीजी डाॅक्टरों की सेवाएं ली जा रही हैं। वर्तमान में जम्मू संभाग में जीएमसी जम्मू के अलावा जीएमसी कठुआ, राजोरी, डोडा और उधमपुर में पीजी और डीएनबी डाॅक्टर उपलब्ध हैं। कार्ययोजना में इन डाॅक्टरों की आपातस्थिति में 15-15 दिन की रोस्टर ड्यूटी लगाने का प्रावधान होगा। यह तभी किया जाएगा जब देश के विभिन्न हिस्सों से अपेक्षा से कम डाॅक्टर यात्रा में सेवाएं देने पहुंचेंगे।
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सामान्य तौर पर देशभर से 700-800 डाॅक्टरों की तीर्थयात्रा के दौरान कश्मीर में तैनात किया जाता है। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि स्वैच्छिक तौर पर सेवाएं देने वाले डाॅक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की सूची तैयार की जा रही है, जिसे जून के मध्य तक फाइनल कर लिया जाएगा। इस बार पीजी और डीएनबी डाॅक्टरों की सेवाएं लेने का भी प्रावधान किया गया है और यह बैकअप योजना में रहेगा।
वहीं, श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के एक सूत्र ने बताया कि रोजाना 1000 से 1200 तक अग्रिम यात्री पंजीकरण हो रहा है। पहलगाम आतंकी हमले से पहले यह दैनिक आंकड़ा 15 हजार से अधिक चल रहा था। अब तक साढ़े तीन लाख से अधिक यात्री पंजीकरण करवा चुके हैं।