रक्षा बंधन के साथ समाप्त हुई अमरनाथ यात्रा
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44 दिनों तक चली वर्ष 2014 की वार्षिक अमरनाथ यात्रा रक्षाबंधन के दिन छड़ी मुबारक के पूजन के बाद संपन्न हो गई।
पवित्र गुफा में हुई पूजा में दशनामी अखाड़े के महंत दिपेंद्र गिरि के अलावा राज्य के राज्यपाल एन एन वोहरा समेत शिवभक्तों ने शिवलिंग एंव छड़ी मुबारक के दर्शन किए।
इससे पहले सुबह छड़ी को पंचतरणी से पवित्र गुफा ले जाया गया।
12 अगस्त को समाप्त होगी यात्रा
12 अगस्त को लिद्दर नदी के किनारे पूजन तथा विसर्जन कार्यक्रम के बाद इस साल की यात्रा के समापन की विधिवत घोषणा की जाएगी।
यात्रा के दौरान मरने वालों की संख्या अधिकारिक तौर पर 46 बताई गई है। इनमें 39 भक्त, दो साधु तथा पांच सेवादार शामिल हैं।
44 दिनों तक चली पवित्र अमरनाथ यात्रा श्रद्धालुओं के आखिरी दर्शन के साथ संपन्न हो गई। अब किसी भी श्रद्धालु को गुफा की ओर जाने की अनुमति नहीं होगी।
दशनामी अखाडे़ वापस जाएगी छड़ी मुबारक
श्रवण पूर्णिमा पर आखिरी दल ने गुफा में स्थापित हिमलिंग के दर्शन किए। इससे पूर्व अमरनाथ छड़ी को लेकर साधु-संतों का दल सुबह पवित्र गुफा में पहुंचा।
गुफा के समीप छड़ी पूजन का विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें राज्यपाल, दशनामी अखाडे़ के महंत दिपेंद्र गिरि तथा कई साधु भी शामिल हुए।
छड़ी पूजन के बाद छड़ी वापसी का सफर शुरू हो गया, छड़ी को श्रीनगर स्थित दशनामी अखाडे़ में रखा जाएगा।
श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार गिरावट
अमरनाथ यात्रा में पिछले साल की तुलना में इस बार (3.72 लाख, (कुल 3,72,909) 22 हजार ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। इसमें जम्मू आधार शिविर से 53000 श्रद्धालु रवाना हुए।
जुलाई के मध्य में हुई बालटाल हिंसा और सिलेंडर फटने की घटनाओं के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार गिरावट आई। इस बार 29 जुलाई को ही 31 दिन की यात्रा में भोले के भक्तों ने पिछले साल के 3.50 लाख के आंकड़े को पार कर लिया था।
वर्ष यात्रियों की संख्या
2005 3.88 लाख
2006 3.47 लाख
2007 2.96 लाख
2008 5.33 लाख
2009 3.81 लाख
2010 4.55 लाख
2011 6.36 लाख
2012 6.20 लाख
2013 3.50 लाख