दुगना हुआ अमरनाथ यात्रियों की मौत का आंकड़ा
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बाबा बर्फानी के दर्शन की दुर्गम यात्रा में इस बार मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। यात्रा की शुरुआत से अब तक कुल 28 यात्रियों की मौत हो चुकी है। ऊंचाई पर आक्सीजन की कमी से दिल के दौरे ज्यादातर मामलों में मौत का कारण रहे हैं।
पिछले साल 55 दिनों की यात्रा में कुल 13 श्रद्धालुओं की मौत हुईं थी, लेकिन इस बार यात्रा के 17 दिनों में ही यह आंकड़ा दोगुने से अधिक हो गया है। श्राइन बोर्ड के चीफ एक्जक्यूटिव अफसर यात्रा के क्रम में 25 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि की है।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में दो यात्रियों की पत्थर गिरने से मौत हुई थी और बाद में सभी मौत हार्ट अटैक से हुई हैं। श्राइन बोर्ड ने यात्रियों के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। यात्रा से पहले मेडिकल जांच और प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है।
यात्रियों की लापरवाही से हो रही हैं मौतें
फिर भी कई मामलों में यात्री खुद अपनी जांच पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। यात्रा मार्ग दुर्गम है। इसलिए मेडिकल जांच को अधिक महत्व देना यात्रियों के लिए भी जरूरी है।
कई बार लोगों को पहाड़ की ऊंचाई पर नई तरह की शारीरिक समस्याएं पैदा हो जाती हैं जो आमतौर पर उन्हें पहले नहीं झेलनी पड़ती है।
ऊंचे पहाड़ी मार्ग के बर्फीले रास्ते पर थकावट के बाद आक्सीजन की कमी में कुछ लोग एडजस्ट नहीं कर पाते हैं। ऐसी समस्याएं लोअर क्षेत्रों में नहीं होती। लिहाजा मेडिकल जांच को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
कब-कब कितनी मौतें हुई
अमरनाथ गुफा समुद्र तल से 3900 मीटर यानी 12 हजार 760 फीट की ऊंचाई पर है। यात्रा मार्ग पहाड़ों से घिरा है। 2011 में अमरनाथ यात्रा के क्रम में 106 यात्रियों की मौत हुईं थी।
साल 2012 में 93 यात्रियों की जान गई थी। मौत का आंकड़ा बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यात्रियों के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है।
विकलांगों, बुजुर्गों और बच्चों को यात्रा की इजाजत नहीं दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने यात्रा मार्ग को सुगम बनाने के भी निर्देश दिए थे।