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MSME for Bharat: जम्मू में इन कमियों से जूझ रहे उद्योग, सीएम की अपील; उपमुख्यमंत्री ने की ये प्रमुख घोषणाएं

Sat, 20 Sep 2025 11:01 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 20 Sep 2025 11:01 PM IST
सार

अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में उद्यमियों ने हाईवे बंदी, जर्जर सड़कें, बिजली संकट व बाढ़ बीमा अस्वीकृति पर चिंता जताई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उद्योग जगत जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए आगे आए। पर्यटन की सफलता को मजबूत औद्योगिक विकास से जोड़ने के लिए हर प्रयास करेंगे।

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Amar Ujala MSME for Bharat Conclave entrepreneurs expressed concern in jammu
जम्मू-कश्मीर में एमएसएमई फॉर भारत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में एमएसएमई सेक्टर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कारोबारी कह रहे हैं कि टैक्स का बोझ, कच्चे माल पर महंगाई, योजनाओं का टोटा और ढांचागत कमी ने उनकी हालत खराब कर दी है। जीएसटी रिफंड और टर्नओवर इंसेंटिव समय पर न मिलने से कारोबारियों की पूंजी फंस गई है। नई केंद्रीय क्षेत्र योजना (एनसीएसएस) बंद हो जाने और भूमि आवंटन में पारदर्शिता न होने से निवेश ठप पड़ गया है। उद्योगों की ऐसी कई मुश्किलों को उद्यमियों ने शनिवार को अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में रखा।
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कॉन्क्लेव के पहले सत्र में उद्यमियों ने कहा कि उद्योग पूरी तरह परिवहन पर निर्भर हैं लेकिन हाईवे बंद रहना, सड़कों की जर्जर हालत और बिजली संकट कारोबार की कमर तोड़ रहा है। बीमा कंपनियां बाढ़ रिस्क कवर से इन्कार करती हैं जबकि हाल के वर्षों में ऑपरेशन सिंदूर, आतंकी हमले और बाढ़ ने उद्योगों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है। कारोबारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हालात अगर ऐसे ही रहे तो स्थानीय उद्योग बंद होंगे, सर्विस सेक्टर डगमगाएगा और रोजगार की तलाश में युवा बड़ी संख्या में पलायन करेंगे।
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- राकेश वजीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ज्यादातर कच्चा माल बाहर से आता है। लागत पहले ही बढ़ी हुई है ऐसे में और टैक्स लगाना ठीक नहीं। उन्होंने सर्विस सेक्टर को टैक्स से छूट और बेहतर बिजली व्यवस्था की मांग की।
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- राहुल सहाय ने कहा कि स्थानीय उद्योग धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। एनसीएसएस का फायदा औद्योगिक इकाइयों तक नहीं पहुंच पाया। उद्योग परिवहन पर निर्भर हैं और हाईवे बंद होते ही काम ठप पड़ जाता है। जब कोई यूनिट लगाने में ही 100 दिन से ज्यादा लग जाएं तो कारोबार आसान कैसे हो सकता है।

- संजय बंसल ने कहा कि एनसीएसएस बंद होना उद्योगों के लिए बड़ा झटका है। बीमा कंपनियां बाढ़ रिस्क कवर नहीं देतीं। भूमि आवंटन की प्रक्रिया अपारदर्शी है। टर्नओवर इंसेंटिव और एसजीएसटी रिफंड भी समय पर नहीं मिलता।

- संदीप मित्तल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और बाढ़ से उद्योगों को भारी नुकसान हुआ। कारोबारियों को मुआवजा मिलना चाहिए। जीएसटी रिफंड में बहुत परेशानी है, इस पर तिमाही बैठक होनी चाहिए। औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों की मरम्मत भी तुरंत जरूरी है।

- विराज मल्होत्रा ने कहा कि जीएसटी क्लेम मिलने में सालभर लग जाता है। पूंजी फंसने से कामकाज ठप पड़ रहा है। नए उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है लेकिन पुराने उद्योगों की सुध कोई नहीं ले रहा। पहलगाम हमले, बाढ़ और ऑपरेशन सिंदूर से कारोबार अप्रैल से ही संकट में है।

- साहिल महाजन का कहना था कि जम्मू में बड़े शहरों की तरह भारी वाहनों के लिए ऑटोमोबाइल सर्विस क्लस्टर होना चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकार का फोकस है लेकिन ढांचा तैयार ही नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि बैंकों को दावों का निस्तारण तय समयसीमा में करना चाहिए।

- प्रवीण परगाल ने कहा कि उद्योगों के सामने सबसे बड़ी समस्या टर्नओवर इंसेंटिव और जीएसटी रिफंड की है। 2017 से फंसा भुगतान अब तक नहीं मिला है।

- हरविंदर सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर चारों ओर से जमीन से घिरा है, ऐसे में कच्चा माल मंगाना और भेजना बहुत महंगा पड़ता है। सरकार के सभी विभागों को स्थानीय उत्पादों की खरीद करनी चाहिए और नई इकाइयों को सस्ती जमीन उपलब्ध करानी चाहिए।

पुराने उद्योगों को तवज्जो, महिला उद्यमियों के लिए होगा अलग औद्योगिक क्षेत्र
सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की चुनौतियां, समाधान और संभावनाओं पर मंथन के लिए शनिवार को अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत के क्षेत्रीय काॅन्क्लेव का आयोजन किया गया। होटल विवांता सिटी सेंटर में आयोजित कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने उद्यमियों और उद्योगों के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि पुराने उद्योगों को तवज्जो दी जाएगी और महिला उद्यमियों के लिए अलग से औद्योगिक क्षेत्र होगा।

उपमुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला उद्यमियों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़े हैं। हमने तय किया है कि नए उद्योग लगाने के बजाय पुरानी इंडस्ट्रीज को सहयोग प्रदान कर और मजबूत किया जाएगा। युवाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे।

उद्यमियों से भरे सभागार में उपमुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उधमपुर में महिलाओं के लिए महिला औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। उद्यमी निवेश के लिए इधर-उधर न भटकें इसके लिए जल्द ही सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा। उद्यमी अपनी समस्या सरकार के समक्ष उठा सकें इसके लिए एडवाइजरी बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड में उद्यमी भी सदस्य होंगे। उनके वाजिब सलाह के मुताबिक औद्योगिक नीतियां तय की जाएंगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा, शुक्रवार को श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने उद्योगों की बेहतरी के लिए अधिकारियों के साथ दो घंटे तक बैठक की। इसमें सामने आया कि पूर्व में उद्योग लगाने वाले उद्यमियों के साथ नाइंसाफी हुई है। भूमि आवंटन के नाम पर पूरा पैसा ले लिया गया लेकिन जमीन आज तक किसी को नहीं मिली। कई साल से इंसेंटिव नहीं मिलने के उद्यमियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इससे संबंधित रिकाॅर्ड तलब किया है। निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उद्याेग विभाग के निदेशक डॉ.अरुण मन्हास और श्रम आयुक्त चरणजीत सिंह को निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी पॉलीटेक्निक और आईटीआई छात्रों को स्थापित होने वाले नए उद्योगों में प्राथमिकता पर रोजगार दिया जाए।

पंजाब से माल मंगाने पर मंडी टैक्स लगाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी पक्षों के साथ बैठक कर समाधान निकाला जाएगा। अन्य समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही विभिन्न संगठनों के प्रमुख उद्यमियों, प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर अन्य समस्याओं का भी समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने पुलिस महकमे और श्रम विभाग को निर्देश दिया कि बेवजह उद्यमियों को परेशान करने के बजाय उनका सहयोग कर जम्मू-कश्मीर को विकास के पथ पर ले जाएं।

उपमुख्यमंत्री ने की ये प्रमुख घोषणाएं
- उधमपुर में महिलाओं के लिए अलग औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र में सिर्फ महिला उद्यमियों को ही भूमि आवंटित की जाएगी।
- इंडस्ट्री लगाने की अनुमति के लिए जल्द ही सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया जाएगा।
- उद्यमियों की दिक्कतों को दूर करने के लिए एडवाइजरी बोर्ड का गठन किया जाएगा।
- पॉलीटेक्निक और आईटीआई के छात्रों को नए स्थापित होने वाले उद्योगों में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाएगा।
- कई साल से उद्यमियों के फंसे इंसेंटिव की जांच के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से रिकॉर्ड तलब किया गया।

नहीं रहा इंस्पेक्टर राज, कारोबारियों को मिलेगी पूरी सहूलियत
सरकार की ओर से बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के तहत लेबर रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं। फैक्ट्री एक्ट में कई सुधार किए गए हैं, ताकि कारोबारियों को ज्यादा सुविधा मिल सके। कारोबारियों की मांग पर श्रमिकों से रोजाना तीन शिफ्टों में काम कराने की अनुमति भी दी गई है। कारोबारियों ने पर्यटन स्थलों पर दुकानों को ज्यादा समय तक खोलने की मांग रखी थी। इसी को देखते हुए दुकानों को 24 घंटे खोलने के लिए भी कानून में बदलाव किए जा रहे हैं। अब प्रदेश में इंस्पेक्टर राज नहीं है। कारोबारी निडर होकर हमसे सीधे संपर्क कर सकते हैं और अपनी समस्या रख सकते हैं।चरणदीप सिंह, : श्रम आयुक्त, जम्मू

जीएसटी की वजह से बहुत से उद्योग बंद होने के कगार पर : रतन लाल
नेशनल काॅन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने कहा कि उद्यमियों की कई समस्याएं ऐसी हैं जो लंबे समय से चली आ रही हैं उनका कोई हल नहीं निकल पाया है। जीएसटी की वजह से बहुत से उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच गए। बदकिस्मती है कि स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने के बजाय बाहर से आ रहे उद्योग को लगाए जाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा दे ताकि यहां के लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके। इस दिशा में सरकार को सार्थक प्रयास करना चाहिए।

उद्यमियों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी : एसपी अजय शर्मा
जम्मू दक्षिण से पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में उद्योग बढ़े इसके लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस काफी संजीदा रहती है। पहलगाम आतंकी हमला हुआ तो पुलिस ने महसूस किया कि यह हमारी आर्थिक गतिविधियों को खत्म करने की एक साजिश थी। विभाग की जब भी उच्च स्तरीय बैठक होती है तो पुलिस भविष्य में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करती है। नागरिकों की सुरक्षा नहीं होगी तो उसका उद्योग पर पड़ेगा। ऐसे में पुलिस सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। ऑपरेशन सिंदूर और बाढ़ के दौरान उद्योग को नुकसान हुआ है। पुलिस अपनी बैठकों इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से सोचती है। नई औद्योगिक संपदा में पार्किंग, सीसीटीवी जैसे बुनियादी सुविधा हो। इसके लिए आर्किटेक्चर वैसा होना चाहिए।

कुछ देरी हो सकती है पर हमारी नीयत और संकल्प सही : अरुण मन्हास
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक डॉ. अरुण मन्हास ने कहा कि जम्मू कश्मीर में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए क्रांतिकारी सुधार लाए जा रहे हैं। अग्निशमन की एनओसी की मान्यता एक साल से बढ़ाकर दो साल कर दी है। नई व्यवस्था में चार कनाल के प्लाॅट में एक कनाल जमीन बचाने के प्रावधान पर काम हो रहा है। उद्योग और श्रम विभाग संतुलित माहौल के साथ साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उद्यमियों की समस्याओं के समाधान में कुछ देरी हो सकती है लेकिन हम नीयत और संकल्प में कमी महसूस नहीं होने देंगे।

जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए आगे आए उद्योग जगत: सीएम
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उद्योग जगत जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए आगे आए। पर्यटन की सफलता को मजबूत औद्योगिक विकास से जोड़ने के लिए हर प्रयास करेंगे। सीएम शनिवार को श्रीनगर में कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) उत्तरी क्षेत्रीय परिषद 2025-26 की चौथी बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी औद्योगिक विकास पर पूरा ध्यान नहीं दिया गया है। सरकार जम्मू-कश्मीर में निवेश इकोसिस्टम को मजबूत कर असंतुलन को दूर करने के लिए दृढ़ है। पर्यटन विकास की कहानी का एक हिस्सा है लेकिन औद्योगिकीकरण पर भी विशेष ध्षयान देने की जरूरत है। हम यहां उद्योग के लिए काम करना आसान और अधिक फायदेमंद बनाएंगे।

सीएम ने कहा कि कठुआ, सांबा, बाड़ी ब्राह्मणा और कश्मीर में लस्सीपोरा जैसे औद्योगिक केंद्र हैं। सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम में कमियों को दूर करेंगे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सिंगल विंडो वास्तव में सिंगल विंडो हो। मैंने उद्योग विभाग को निवेशकों के साथ सीधे बातचीत और इस सिस्टम को हमेशा के लिए ठीक करने के लिए उनके अनुभव से सीखने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी क्षेत्रों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में सस्ती जमीन और बिजली, जीएसटी रिफंड लाभ और कुशल श्रम की उपलब्धता है। कार्यक्रम में सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की अध्यक्ष अंजलि सिंह, सीआईआई दिल्ली राज्य परिषद के अध्यक्ष पुनीत कौरा, सीआईआई जम्मू-कश्मीर परिषद के उपाध्यक्ष एमए अलीम और सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की निदेशक रचना जिंदल शामिल थे। कार्यक्रम में क्षेत्र के उद्योग जगत के नेताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

जम्मू-कश्मीर शांत, सुरक्षित और व्यापार के लिए खुला है
सीएम ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर शांत, सुरक्षित और व्यापार के लिए खुला है। हां, मुश्किल समय भी आया था लेकिन वे बीत चुके हैं। पहलगाम जैसी दुखद घटनाएं अपवाद हैं सामान्य नहीं। इनकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

सीएम ने निवेशकों से सब्सिडी पर आधारित मॉडल से आगे सोचने और उन क्षेत्रों में निवेश करने का आग्रह किया जिनमें जम्मू-कश्मीर की अपनी ताकत है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में केवल 4 फीसदी दूध प्रोसेस होता है जबकि गुजरात में 80%। यह वैल्यू एडिशन के लिए एक बेहतरीन अवसर है। हम कच्चा माल पैदा करते हैं। हमारे पास बाजार है फिर भी हम अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं करते। उन्होंने कहा कि औद्योगिकीकरण और पर्यटन मिलकर हमारे युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। बेरोजगारी को बड़ी चुनौती बताते हुए उमर ने कहा कि राज्य केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर नहीं रह सकता।

निवेशक खुलकर फीडबैक दें, सरकार कमियों पर काम करेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीआईआई सदस्य फीडबैक दें ताकि सरकार कमियों को दूर कर सके। जो लोग जम्मू-कश्मीर में निवेश कर रहे हैं वे बताएं कि क्या अच्छा रहा और क्या नहीं। जो लोग निवेश करने में हिचकिचा रहे हैं वे कारण बताएं। अगर यह हमारे अधिकार क्षेत्र में है तो हम इसे ठीक करेंगे। आपका फीडबैक यहां एक व्यापार-अनुकूल भविष्य बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।

एमएसएमई-चार प्रमुख पैनलिस्ट
औद्योगिक पैकेज में 25 प्रतिशत स्थानीय उद्यमियों के लिए आरक्षित हो : अरुण गुप्ता

चैंबर आफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू के अध्यक्ष अरुण गुुप्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए आने वाले किसी भी औद्योगिक पैकेज में 25 प्रतिशत स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। प्रदेश के लिए आए 28400 करोड़ रुपये के पैकेज में चुनिंदा लोगों को ही लाभ दे दिया गया जबकि बड़े पैमाने पर स्थानीय उद्यमियों को नजरअंदाज किया गया। स्थानीय उद्यमियों को अपनी इकाइयां लगाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करवाई गई। स्थानीय उद्यमियों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया जाए।

मार्च 2026 में खत्म हो रहे टर्नओवर प्रोत्साहन का विस्तार हो : वीरेंद्र जैन
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज जम्मू के चेयरमैन वीरेंद्र जैन ने कहा कि मार्च 2026 में खत्म हो रहे टर्नओवर प्रोत्साहन का विस्तार किया जाए। सरकार को ब्याज सवेंशन पर भी सोचना चाहिए। कोई भी उद्योग नीति बनाने में स्थानीय हितधारकों को शामिल किया जाए। लंबित टर्नओवर प्रोत्साहन और जीएसटी प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाए।

एमएसएमई को भूमि आवंटन मामले प्राथमिकता पर हल हों : ललित महाजन
बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान ललित महाजन ने कहा कि सूक्ष्म, लघु व मध्यम (एमएसएमई) को राहत देने के लिए 200 कनाल से कम भूमि आवंटन मामलों को हल किया जाए। वर्ष 2022 के बाद से भूमि आवंटन के लिए कोई बैठक नहीं बुलाई गई है। 200 कनाल से ऊपर वाले मामलों में 67 प्रतिशत औद्योगिक पैकेज इस्तेमाल कर लिया गया जबकि स्थानीय उद्यमियों को नजरअंदाज किया गया। सरकार के पास जो पैसा है उसे मौजूदा इकाइयों को प्रोत्साहित करने पर खर्च किया जाए।

महिला उद्यमिता के बढ़ावे पर जोर : रुचिका
फिक्की फ्लो जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख की पूर्व प्रधान रुचिका गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को वास्तविक सिंगल विंडो सिस्टम से ऋण उपलब्ध करवाया जाए। मेंटरशिप मिले ताकि उनके लिए व्यवसाय करना आसान हो सके। जागरूकता के लिए नियमित ओरिएंटेशन कार्यक्रम हों, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ पा सकें। नियमित रूप से क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और वर्कशाप आयोजित हो। जैसे सोशल मीडिया मार्केटिंग, डिजिटल टूल्स का उपयोग आदि सिखाया जाए। महिला उद्यमियों का व्यापक डेटाबेस बने और उन्हें मान्यता मिले।

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