जम्मू कश्मीर में अमित शाह के गेम प्लान से सभी चित
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रियासत में सत्ता के दांव पेच के बीच भाजपा के गेम प्लान से सभी सियासी पार्टियां चित हो गईं हैं। मास्टर माइंड अमित शाह की गुगली ने पीडीपी, नेकां और कांग्रेस को बुरी तरह छकाया। सियासी पंडितों का मानना है कि भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं।
पहला सरकार बनाने के लिए पीडीपी और नेकां पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम किया तो दूसरा सियासत में केंद्र की हनक का संदेश देने की कोशिश। जानकारों का कहना है कि भाजपा अपने मकसद में कामयाब हो गई है और राज्य में पावर आफ इक्वेशन को अपने पक्ष में करने में सफल रही है।
पार्टी उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक दरअसल जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने की पृष्ठभूमि राज्य कोर कमेटी की हाईकमान के साथ पांच जनवरी को हुई बैठक के बाद ही तैयार हो गई थी। कोर कमेटी के अड़ियल रुख के बाद पार्टी नेतृत्व ने इस मसले को कुछ दिन तक टालने का ही मन बन लिया।
इस बीच, सरकार बनाने के लिए बातचीत का विकल्प खुला रखा। लगातार पार्टी नेता यह कहते रहे कि जल्द ही रियासत में जनता की भावनाओं के अनुरूप भाजपा की सरकार बनेगी।
सियासत में केंद्र की हनक का संदेश देने की कोशिश
दरअसल, कोर कमेटी ने सरकार बनाने के लिए हाईकमान को तो अधिकृत कर दिया, साथ ही मजबूती के साथ अपना पक्ष भी रखा कि जम्मू की भावनाओं का अनादर नहीं होना चाहिए।
जम्मू को उसका हक मिलना चाहिए। कोर कमेटी का तर्क है कि भले ही पीडीपी ने तीन सीटें अधिक हासिल की हैं, लेकिन, पार्टी को मिला मत प्रतिशत पीडीपी से अधिक है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से जनता ने भाजपा को सरकार बनाने का जनादेश दिया है।
विधानसभा चुनाव के पहले से ही भाजपा ने आक्रामक रुख अख्तियार कर रखा था। पहली बार सरकार बनाने के लिए मैदान में उतरने के दावे के साथ ही पार्टी ने तीनों खित्तों-जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में भरपूर कोशिश की। हर कदम फूंक फूंककर रखा।
वोट बैंक गड़बड़ाने न पाए, इसकी वजह से अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दे को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया। सिर्फ पूरे चुनाव में रियासत के विकास के नाम पर वोट की अपील की गाई। पार्टी ने पूरी ताकत झोंकी और नतीजा भी सामने आया।
पिछली बार से सदस्यों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई। नंबर गेम में पीडीपी से तीन सीटों से पीछे रहने वाली भाजपा ने परिणाम की घोषणा के बाद से ही सरकार गठन के प्रयास शुरू कर दिए।