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हिमाचल में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद जम्मू-कश्मीर में अलर्ट, जांच के बाद ही पोल्ट्री वाहनों को प्रवेश
Wed, 06 Jan 2021 02:01 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Wed, 06 Jan 2021 02:01 PM IST
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bird flu
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल में 17 सौ के लगभग प्रवासी पक्षियों की बर्ड फ्लू से मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। हिमाचल से सटे जम्मू संभाग के अभयारण्यों और वेटलैंड के साथ ही जलाशयों से पक्षियों की सैंपल जांच शुरू हो गई है। बर्ड वॉचर्स के अलावा स्थानीय लोगों की भी मदद ली जाएगी। वहीं, लखनपुर में पोल्ट्री वाहनों को जांच के बाद ही प्रवेश देने के आदेश दिए गए हैं।
रंजीत सागर झील के साथ-साथ बनी और जसरोटा वन्यजीव अभयारण्य में पहुंचे प्रवासी पक्षियों पर नजर रखी जा रही है। केंद्र की ओर से जारी एडवाइजरी में वाइल्ड लाइफ डिवीजनों को एवियन इंफ्लूएंजा के लक्षणों और इस दौरान बरती जानी वाली सावधानियों की जानकारी दी गई है। इसके तहत बताया गया है कि प्रभावित पक्षी इस बीमारी में दौरे पड़ने, हैजा, सिर मुड़ना और पैरालिसिस जैसे लक्षण दर्शाते हैं। यह बीमारी तेजी से फैलती है, जिससे लकवा और लड़खड़ाहट होती है। साफ किया गया है कि प्रभावित पोल्ट्री से यह फ्लू जंगली पक्षियों और फिर जंगली पक्षियों से पोल्ट्री में भी फैल सकता है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि सभी जंगली पक्षियों के नमूने मूल्यवान हैं। ऐसे में नमूने एकत्रित करने, पैकिंग और परिवहन को प्रशिक्षित पशुपालन/पशु चिकित्सा कर्मचारियों के सहयोग से किया जाना चाहिए। एडवाइजरी के दौरान सिर्फ संरक्षित स्थानों ही नहीं, बैक यार्ड पोल्ट्री तक पर भी नजर रखने की हिदायत दी गई है। सभी प्रदेशों और राज्यों को आपात योजना तैयार करने और प्रदेश स्तरीय कमेटियों की निगरानी तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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कम स्टाफ से निगरानी में चुनौती
हिमाचल में बड़े पैमाने पर प्रवासी पक्षियों की मौत के बाद हिमाचल से सटे जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों पर सबसे अधिक निगरानी रखने का अलर्ट जारी किया गया है। रंजीत सागर झील में इस साल पहली बार बड़ी संख्या में जहां प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाला है, वहीं बनी वन्यजीव अभयारण्य और चंबा जिले के संरक्षित इलाकों में प्रवासी पक्षी और जानवर का आना जाना रहता है। चिंताजनक बात है कि यहां विभाग के पास सीमित स्टाफ है। आबादी वाले क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की निगरानी रखने में मदद लेने को कहा गया है।
वर्तमान में पोल्ट्री के चार-पांच वाहन आ रहे
पशुपालन निदेशालय ने लखनपुर रिंडरपेस्ट चेक पोस्ट पर पोल्ट्री से जुड़े वाहनों को सैंपलिंग शुरू कर दी है। लखनपुर की आरपी चेकपोस्ट में लोकल सैंपल के अतिरिक्त एक सैंपल जम्मू में जांच के लिए भेजा जाता है। हालांकि इसकी जांच रिपोर्ट पहुंचने में एक सप्ताह से भी अधिक का समय लग जाता है। बावजूद इसके एहतियात बरतते हुए लखनपुर में मरे हुई पोल्ट्री पाए जाने पर वाहनों को प्रदेश में दाखिल न होने देने के निर्देश दिए गए हैं। रिंडरपेस्ट चेकपोस्ट में तैनात सहायक वेटरनेरी सर्जन डॉ. रामपाल भगत ने बताया कि निदेशालय के निर्देश के बाद सतर्कता बढ़ा दिए गए हैं। फिलहाल जम्मू श्रीनगर हाईवे बंद होने से चार से पांच वाहन ही प्रदेश में दाखिल हो रहे हैं।
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रंजीत सागर झील के साथ-साथ बनी और जसरोटा वन्यजीव अभयारण्य में पहुंचे प्रवासी पक्षियों पर नजर रखी जा रही है। केंद्र की ओर से जारी एडवाइजरी में वाइल्ड लाइफ डिवीजनों को एवियन इंफ्लूएंजा के लक्षणों और इस दौरान बरती जानी वाली सावधानियों की जानकारी दी गई है। इसके तहत बताया गया है कि प्रभावित पक्षी इस बीमारी में दौरे पड़ने, हैजा, सिर मुड़ना और पैरालिसिस जैसे लक्षण दर्शाते हैं। यह बीमारी तेजी से फैलती है, जिससे लकवा और लड़खड़ाहट होती है। साफ किया गया है कि प्रभावित पोल्ट्री से यह फ्लू जंगली पक्षियों और फिर जंगली पक्षियों से पोल्ट्री में भी फैल सकता है।
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एडवाइजरी में कहा गया है कि सभी जंगली पक्षियों के नमूने मूल्यवान हैं। ऐसे में नमूने एकत्रित करने, पैकिंग और परिवहन को प्रशिक्षित पशुपालन/पशु चिकित्सा कर्मचारियों के सहयोग से किया जाना चाहिए। एडवाइजरी के दौरान सिर्फ संरक्षित स्थानों ही नहीं, बैक यार्ड पोल्ट्री तक पर भी नजर रखने की हिदायत दी गई है। सभी प्रदेशों और राज्यों को आपात योजना तैयार करने और प्रदेश स्तरीय कमेटियों की निगरानी तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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कम स्टाफ से निगरानी में चुनौती
हिमाचल में बड़े पैमाने पर प्रवासी पक्षियों की मौत के बाद हिमाचल से सटे जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों पर सबसे अधिक निगरानी रखने का अलर्ट जारी किया गया है। रंजीत सागर झील में इस साल पहली बार बड़ी संख्या में जहां प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाला है, वहीं बनी वन्यजीव अभयारण्य और चंबा जिले के संरक्षित इलाकों में प्रवासी पक्षी और जानवर का आना जाना रहता है। चिंताजनक बात है कि यहां विभाग के पास सीमित स्टाफ है। आबादी वाले क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की निगरानी रखने में मदद लेने को कहा गया है।
वर्तमान में पोल्ट्री के चार-पांच वाहन आ रहे
पशुपालन निदेशालय ने लखनपुर रिंडरपेस्ट चेक पोस्ट पर पोल्ट्री से जुड़े वाहनों को सैंपलिंग शुरू कर दी है। लखनपुर की आरपी चेकपोस्ट में लोकल सैंपल के अतिरिक्त एक सैंपल जम्मू में जांच के लिए भेजा जाता है। हालांकि इसकी जांच रिपोर्ट पहुंचने में एक सप्ताह से भी अधिक का समय लग जाता है। बावजूद इसके एहतियात बरतते हुए लखनपुर में मरे हुई पोल्ट्री पाए जाने पर वाहनों को प्रदेश में दाखिल न होने देने के निर्देश दिए गए हैं। रिंडरपेस्ट चेकपोस्ट में तैनात सहायक वेटरनेरी सर्जन डॉ. रामपाल भगत ने बताया कि निदेशालय के निर्देश के बाद सतर्कता बढ़ा दिए गए हैं। फिलहाल जम्मू श्रीनगर हाईवे बंद होने से चार से पांच वाहन ही प्रदेश में दाखिल हो रहे हैं।