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Kashmir: श्रीनगर में बिगड़ रही हवा की गुणवत्ता, सर्दियों में बढ़ा प्रदूषण, आंकड़ों में हुआ खुलासा

Fri, 24 Feb 2023 04:22 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 24 Feb 2023 04:22 PM IST
सार

स्किम्स के एक डॉक्टर ने बताया था कि सालाना लगभग 10 हजार मौतों के लिए पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) के संपर्क में आने को जिम्मेदार ठहराया जाता है और इसका मुकाबला करके इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

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air quality Deteriorating  in Srinagar increased pollution in winter data revealed
Dal Lake Srinagar - फोटो : बासित जरगर

विस्तार

श्रीनगर जिले में पिछले तीन वर्षों से हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। लस्जन क्षेत्र में सबसे अधिक प्रदूषित हवा है। यह खुलासा जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के आंकड़ों से हुआ है। सर्दियों में हवा ज्यादा प्रदूषित हुई है।

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श्रीनगर के सभी चार स्टेशनों पर रेस्पिरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम या पीएम10) के स्तर में पिछले तीन वर्षों में तेजी से वृद्धि हुई है। राज बाग स्टेशन पर वर्ष 2021-22 के लिए पीएम-10 स्तर का वार्षिक औसत 139.26 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था, जबकि यह 60 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर होना चाहिए था। इसी स्टेशन पर यह वर्ष 2019-20 में 73.88 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर और वर्ष 2020-21 में 89.61 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था।
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खोनमोह स्टेशन पर वर्ष 2021-22 में 162.86 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर, जबकि उसी स्टेशन पर यह वर्ष 2019-20 में 120.03 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर और वर्ष 2020-21 में 163.97 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था।
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खर्यू स्टेशन पर वर्ष 2021-22 के लिए 132.65 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था, जबकि इसी स्टेशन पर यह वर्ष 2019-20 में 119.48 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था और वर्ष 2020-21 में 127.98 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर।

लस्जन स्टेशन पर वर्ष 2021-22 के लिए 227.80 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था, जबकि इसी स्टेशन पर यह वर्ष 2019-20 में 197.74 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था और वर्ष 2020-21 में 235.29 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर था।

आंकड़ों के अनुसार, उच्चतम आरएसपीएम स्तर सर्दियों के महीनों में दर्ज किए गए हैं क्योंकि वर्ष 2021 में राजबाग और खोनमोह में आरएसपीएम स्तर दिसंबर के महीने में क्रमशः 237.41 और 255.43 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर थे जबकि नवंबर में ख्रीयू और लस्जन में स्तर सबसे अधिक था - ख्रीयू में 176.6 और लस्जन में 330.08 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार श्रीनगर में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर अनुमेय निशान से नीचे पाया गया है। राजबाग, खोनमोह, खर्यू और लस्जन में औसत नाइट्रोजन डाइऑक्साइड 40 माइक्रो ग्राम पर क्यूबिक मीटर के वार्षिक अनुमेय स्तर की तुलना में स्तर वर्ष 2021 में क्रमशः 20.27, 20.09, 22.10, 20.84 था, जबकि सभी स्टेशनों पर सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर 11 से नीचे था।

प्रदूषण नियंत्रित करने की जरूरत

शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) के एक डॉक्टर ने बताया था कि सालाना लगभग 10 हजार मौतों के लिए पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) के संपर्क में आने को जिम्मेदार ठहराया जाता है और इसका मुकाबला करके इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वाहनों, निर्माण, ईंट भट्ठों, सीमेंट कारखानों की बढ़ती संख्या के कारण वायु प्रदूषण जम्मू-कश्मीर का मुख्य मुद्दा है, जो प्रदूषण का उत्सर्जन करते हैं और हमारी वायु को काफी प्रदूषित करते हैं।


उन्होंने कहा कि जो उपाय वायु प्रदूषण को कम करने में योगदान दे सकते हैं, उनमें कम वाहनों का उपयोग करना, अनलेडेड पेट्रोल का उपयोग कम करना, बायोमास ईंधन का उपयोग कम करना, कांगड़ी का कम उपयोग और वेंटेड हीटर का उपयोग करना शामिल है। डॉक्टर ने कहा कि वायु प्रदूषण शरीर के हर एक अंग को प्रभावित कर रहा है।

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