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AIIMS Jammu: 50 डिग्री पारे में दीवारें बनेंगी ढाल, इस योजना से एम्स जम्मू में नहीं होगा गर्मी का अहसास

Fri, 09 Feb 2024 04:59 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Fri, 09 Feb 2024 04:59 PM IST
सार

एम्स परियोजना से जुड़े अधिकारी चरणजीत सिंह ने बताया कि विजयपुर और सांबा बेल्ट कंडी क्षेत्र है। जिससे अगले 30 से 40 साल के इसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए एम्स के सभी भवनों की बाहरी दीवारों पर जीआरसी क्लेडिंग प्रणाली स्थापित की जा रही है।

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AIIMS Jammu vijaypur: Walls will become shield in 50 degree mercury with grc cladding system
एम्स भवन के बाहरी दीवार पर जीआरसी क्लेडिंग प्रणाली के तहत लगाई गई लाल रंग की विशेष तरह की टायल।

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) विजयपुर के सभी 42 भवनों को जीआरसी क्लेडिंग प्रणाली से लैस किया जा रहा है। इसमें 90 प्रतिशत तक भवनों की दीवारों पर आठ इंच के अंतर में लोहे के फ्रेम के साथ विशेष तरह की ग्लास इंफोर्स कंकरीट टाइल स्थापित की गई हैं। इस टाइल की खासियत है कि बाहर के 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान के साथ कड़ाके की ठंड में न्यूनतम तापमान में भी भवनों के भीतरी क्षेत्र में तापमान को सामान्य रखने में मदद करेगी। जिससे एम्स के भीतर चिकित्सा स्टाफ, मरीजों और तीमारदारों को राहत होगी। इस टाइल पर 30 साल तक व्हाइटवाॅश की जरूरत नहीं होगी और इसमें बारिश के साथ धूल-मिट्टी साफ हो जाएगी।

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एम्स परियोजना से जुड़े अधिकारी चरणजीत सिंह ने बताया कि विजयपुर और सांबा बेल्ट कंडी क्षेत्र है। जिससे अगले 30 से 40 साल के इसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए एम्स के सभी भवनों की बाहरी दीवारों पर जीआरसी क्लेडिंग प्रणाली स्थापित की जा रही है। क्लेडिंग प्रणाली इमारत का सुंदरता बढ़ाने के साथ थर्मल इन्सुलेशन और मौसम प्रतिरोध प्रदान करती है। इससे अधिक गर्मी या सर्दी के दौरान एम्स के भीतर वातावरण को सामान्य रखने में मदद मिलेगी, जिसका चिकित्सा देखभाल पर सीधा बेहतर प्रभाव देखा जाएगा।

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AIIMS Jammu vijaypur: Walls will become shield in 50 degree mercury with grc cladding system
एम्स विजयपुर जम्मू - फोटो : संवाद

राजस्थान की माइक्रो सिलिका रेत का किया जा रहा प्रयोग

दीवारों पर लगाई जा रही विशेष तरह की टाइल में व्हाइट सीमेंट के साथ माइक्रो सिलिका रेत का प्रयोग किया जा रहा है, जो राजस्थान की प्राकृतिक रेत है। माइक्रो सिलिका का उपयोग उच्च शक्ति वाले कंक्रीट बनाने के लिए किया जाता है, जो अक्सर इमारतों, सड़कों और पुल जैसी प्रमुख परियोजनाओं में आवश्यक होता है। यह उच्च शक्ति वाले कंक्रीट की आवश्यकता को पूरा करती है। वैसे यह रेत रोड़ी उदयपुर में भी पाई जाती है, लेकिन उसकी तुलना में राजस्थान की प्राकृतिक रेत की गुणवत्ता बेहतर है। इनके मिश्रण से कंकरीट की विशेष तरह की टाइल का निर्माण एम्स विजयपुर के भीतर ही किया जा रहा है।

टाइल लगाने का काम 90 फीसदी तक पूरा

एम्स के सभी भवनों पर साइज की जरूरत के मुताबिक टाइल का लाल और ग्वालियर सफेद रंग में निर्माण किया जा रहा है। एम्स के उत्तरी क्षेत्र में लाल रंग और दक्षिण क्षेत्र में लाल और ग्वालियर सफेद रंग के मिश्रण वाली टाइल लगाई जा रही है। इसका 90 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है और मार्च तक बाकी काम पूरा कर लिया जाएगा। यह टाइल एक स्टोन की तरह दिखती है। इसमें प्रति स्कवेयर फीट टाइल को लोहे के साथ तैयार करने में लगभग 500 रुपये खर्च पड़ रहा है।

देश के किसी भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जीआरसी क्लेडिंग प्रणाली का उपयोग नहीं किया गया है। एम्स विजयपुर में इसके कई फायदे मिलेंगे। - डाॅ. शक्ति गुप्ता, निदेशक, एम्स विजयपुर जम्मू  

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