अमर उजाला संवाद: 'एआई भविष्य की जरूरत लेकिन समझदारी से इस्तेमाल बेहद जरूरी, शिक्षा और सुरक्षा में लाएगा बदलाव'
जम्मू-कश्मीर में अमर उजाला के संवाद में विशेषज्ञों और छात्रों ने एआई के भविष्य, संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षा, सुरक्षा और मीडिया में बदलाव लाएगा, लेकिन इसका समझदारी से और जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल जरूरी है।
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विस्तार
अमर उजाला की ओर से शुक्रवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के भविष्य और प्रभाव विषय पर विशेषज्ञ, शिक्षकों और छात्रों ने विस्तार से अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में एआई के बिना काम करना मुश्किल होगा और यह तकनीक कामकाज, शिक्षा और सूचना के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने वाला है। इसलिए इसका समझदारी से इस्तेमाल बेहद जरूरी है। संवाद में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील प्रदेश में एआई की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
फेक न्यूज, मिस-इनफॉरमेशन, डिस-इनफॉरमेशन और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में एआई प्रभावी साबित हो सकता है। साथ ही यह तकनीक प्रदेश की अलग-अलग भाषाओं और बोलियों को समझने में मदद करेगी, जिससे सही और भरोसेमंद जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी।विशेषज्ञों ने कहा कि कोविड के बाद शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। पढ़ाई को आसान बनाने के लिए कई ऐप और डिजिटल टूल सामने आए हैं लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उसका सही और जिम्मेदार उपयोग। फिलहाल एआई हिंदी और अंग्रेजी में बेहतर तरीके से काम कर रहा है, लेकिन डोगरी, गुज्जरी और अन्य स्थानीय भाषाओं में इसके विकास की जरूरत है।
संवाद के दौरान यह चिंता भी जताई गई कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल से मानवीय सोच और समझ कमजोर न हो। वक्ताओं ने कहा कि एआई को इंसान का सहायक बनाकर इस्तेमाल करना चाहिए, न कि पूरी तरह उस पर निर्भर हो जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई किसी की नौकरी नहीं छीनेगा, बल्कि इससे नए तरह के रोजगार के अवसर पैदा होंगे। आने वाले समय में डाटा की भूमिका और अहम होगी क्योंकि जिसके पास बेहतर और ज्यादा डाटा होगा, वही एआई का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल कर पाएगा।
विशेषज्ञों ने बताया कि एआई कोई साधारण मशीन नहीं है, बल्कि यह खुद को लगातार विकसित करता रहता है। भविष्य में असली चुनौती इंसान और मशीन के बीच नहीं, बल्कि सीखते रहने वाले और न सीखने वाले इंसानों के बीच होगी। इसलिए आगे टिके रहने के लिए एआई सीखना जरूरी है। इसके साथ ही एआई से तैयार होने वाले कंटेंट पर सेंसरशिप और कॉपीराइट जैसे नियम लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया, ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, सुरक्षा, मीडिया और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में एआई बड़े बदलाव लाएगा लेकिन इसके साथ नैतिकता, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
संवाद में ये रहे शामिल
संवाद आईआईएम जम्मू के प्रोफेसर श्याम नारायण, ब्रिगेडियर नीरज सोनी, क्लस्टर यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर चंद्रशेखर गुप्ता, डॉ. निहारिका शर्मा और डॉ. रूचि चाढ़क ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग से शिक्षक सचिन गोयल और अमोल शर्मा, आईआईटी से शोधार्थी शंकर बेहरा और दिलदार अली मौजूद रहे। वहीं जम्मू यूनिवर्सिटी के छात्र ईशु भारती पंडित और क्लस्टर यूनिवर्सिटी के छात्र स्नेहा हंस, अतीक्षाकोतवाल, पूजा देवी, रिद्धि शर्मा, नीतिश सिंह भाऊ, सुहलदीप सिंह रैना, तानिश, रितिक रोशन, कमल परिहार, सक्षम शर्मा और शिवकरण शर्मा मौजूद रहे।