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बारिश ने रुकवाया धान कटाई का काम
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परगवाल में धान खरीद केंद्र में अपनी धान की जांच करते किसान
ज्यौड़ियां। क्षेत्र में तीन दिन से खराब मौसम के चलते धान की कटाई के काम की गति धीमी पड़ गई है। क्षेत्र में धान की बासमती किस्म की कटाई चल रही है। लगभग 75 प्रतिशत कटाई का काम शेष है। बुधवार को सुबह भी लगभग आठ बजे से हो रही बारिश से धान की कटाई का काम रुका पड़ा है।
मौसम खराब होता देख किसानों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। क्षेत्र के किसान एक दूसरे से मौसम की जानकारी लेते नजर आए। किसान गुलबदन सिंह निवासी सीमावर्ती गांव पलांवाला ने बताया कि दो-तीन दिन से खराब मौसम को देखकर डर लग रहा है कि कहीं मौसम के कारण हमारी फसल का नुकसान न हो जाए। क्योंकि हम लोग दो-तीन साल से मौसम की मार झेलते आ रहे हैं। हमारा क्षेत्र भी नमी वाला है। थोड़ी सी बारिश होने पर पानी खेतों में जमा हो जाता है, और फसल खराब होने का डर रहता है।
किसान व पार्षद दीपक सिंह ने बताया कि क्षेत्र में छोटी धान को तो हमने समेट लिया है, लेकिन बासमती अभी 75 प्रतिशत बाहर खेतों में है। कुछ काट दी है, जिसको झाड़ना शेष है। कुछ खेतों में अभी खड़ी़ है। मौसम हमें डरा रहा है। किसान नानक चौधरी ने बताया कि धान की कटाई का काम हमने रोक दिया है। क्योंकि हमें डर है कि कहीं बारिश से फसल खराब न हो जाए।
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रुक-रुक कर हो रही बारिश से ठंड बढ़ी
बासमती की फसल को होगा नुकसान
बिश्नाह। क्षेत्र में बुधवार को दोपहर बाद शुरू हुई बारिश यहां रुक-रुक कर होती रही। इससे जहां ठंड बढ़ गई वहीं इस बारिश के बाद ज्यादातर लोगों द्वारा गर्म कपड़े भी निकालकर पहन लिए गए। जहां मौसम इस करवट के बाद रुक-रुक कर हो रही बारिश से धान की अधिकांश फसल जो अभी तक खेतों में है। उसको नुकसान होने का अनुमान है।
किसानों द्वारा बासमती धान 370 वैरायटी ज्यादातर किसानों द्वारा लगाई जाती है। हालांकि कुछ किसानों ने फसल काट ली है। अभी कुछ फसल काट रहे थे। दोनों ही कटी हुई फसल और न कटी हुई फसल को इस बारिश से नुकसान हो सकता है। वहीं कोटली चाड़का के किसान स्वर्ण सिंह ने बताया कि अगर बारिश 10 दिन और न होती, तो सभी किसानों की बासमती वैरायटी की धान घरों में पहुंच जात। अब मुश्किल हो गई है। देखते हैं कि मौसम अगर और ज्यादा खराब होता है तो फिर ज्यादा नुकसान होगा। अगर यहीं मौसम साफ हो जाता है तो मामूली नुकसान की आशंका है।
परगवाल में बारिश से किसान परेशान
परगवाल। इन दिनों हो रही बारिश से सीमा क्षेत्र परगवाल के किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है। वहीं बुधवार को हुई बारिश ने धान खरीद केंद्र में भी किसानों का पीछा नहीं छोड़ा। खुले आसमान के नीचे पड़ी धान भीगने से किसानों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है। मंडियों में उचित प्रबंध न होने पर किसानों ने सरकार के प्रति रोष जाहिर किया है।
किसानों का कहना है कि सरकारी मंडियों में उचित प्रबंध न होने से उनकी धान भीग गई है, क्योंकि मंडियों में पानी की निकासी न होने से कई जगह बारिश का पानी जमा हो गया है। किसान मुल्तान सिंह काका राम जोगिंदर राम का कहना था कि वह कुछ दिन पहले अपनी फसल लेकर मंडी आए थे, लेकिन बहुत सारे किसान धान लेकर पहुंचे थे जिस कारण वह अपनी फसल बेच नहीं पाए। क्योंकि मंडी में पहले धान की सफाई करके धान खरीदी जाती है। बुधवार को हुई बारिश से उनकी परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है।
दिनभर हुई बूंदाबांदी ने ठंड बढ़ाई
संवाद न्यूज़ एजेंसी
आरएस पुरा /मीरां साहिब। उपजिला में बुधवार को छाए बादलों के चलते हुई बूंदाबांदी के चलते सर्दी में हुई बढ़ोतरी देखने को मिली। दिन निकलने के साथ ही छाए बादलों के मध्य बारिश की संभावना थी। दोपहर को आरंभ हुई बूंदाबांदी ने ठंड बढ़ा दी है।
हल्की बारिश के बाद अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई है। वहीं बादल छाए देखकर किसान धान की फसल को ढकने के लिए तिरपालों को लेकर इधर-उधर भागते रहे। अभी तक लग पचास प्रतिशत धान की कटाई हो पाई है। ऐसे में किसानों की चिंताएं और बढ़ गईं। पहाड़ों में हुई बर्फबारी व मैदानी क्षेत्र में हल्की बारिश के उपरांत लोग भी अब गर्म कपड़े पहनने आरंभ कर हैं। मौसम विभाग के अनुसार 10 नवंबर तक बूंदाबांदी हो सकती है, और 11 नवंबर से रात का तापमान बढ़े़गा। इस संबंध में कृषि मौसम विज्ञान विभागाध्यक्ष ने बताया कि 10 नवंबर तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने की संभावना है। 10 नवंबर के दौरान बीच बीच में हवाएं चलने तथा कहीं कहीं बूंदाबांदी होने की भी संभावना है। इसके बाद 11 नवंबर से हवाओं की दिशा में भी बदलाव संभावित जो उत्तर पूर्वी से उत्तर पश्चिमी होने की संभावना है, जिससे पहाड़ों की तरफ से ठंडी हवाएं चलने से राज्य में ज्यादातर क्षेत्रों में रात के तापमान में हल्की गिरावट होने की संभावना है।
चार दिन से खराब मौसम ने किसानों की नींद उड़ाई
रामगढ़। सीमावर्ती गांव नंदपुर, रंजीतपूरा, दग छनी, अवताल, केसो, कमोर कैंप, जेडरा, चक छटाका, खौड सलालीया में तीन दिन से खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि अगर बारिश हो गई तो हमारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। बारिश होने से न तो कंबाइन मशीनें चलेंगी और न तो हाथों से धान की कटाई हो पाएगी। हमें गेहूं की फसल बीजने में भी देरी हो जाएगी।
किसान नेता विजय चौधरी, बीडीसी चेयरमैन दर्शन सिंह, ओमप्रकाश, मोहन सिंह का कहना है कि अगर बारिश हो गई तो किसानों को काफी नुकसान होगा। धान को समेटने का काम जोरशोर से चल रहा है। किसान तिलक राज का कहना है कि आज हमें चिंता सता रही है कि हम परिवार का गुजारा कैसे कर पाएंगे। अगर बारिश हो गई तो हमारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। बुधवार दोपहर बाद बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे दूसरे राज्यों से आई कंबाइन मशीनें भी बारिश की बजाय खेतों में नहीं चलीं।
सीमावर्ती क्षेत्र में बारिश से धान की फसल को नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। बादल देख कर किसान चिंता में डूब जाते हैं। बुधवार सुबह से ही बूंदाबांदी हो रही है, जिससे किसानों को उनकी धान की फसल की चिंता बनी हुई है। पिछले दिनों हुई बारिश और तेज हवा के कारण जिले में कुछ गांवों में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। धान की बालियां गिर गई हैं और बारिश से धान के किसानों का भारी नुकसान हुआ है।
अच्छी-खासी फसल पर अंतिम चरण में प्राकृतिक प्रकोप से किसान परेशान हैं। इस वर्ष समय-समय पर बरसात हो जाने से धान की फसल काफी अच्छी थी। किंतु जब धान में बाली लगने लगी और दाना पड़ने लगा, तभी तेज हवा चलने तथा बारिश होने से धान की फसल जमीन पर लेट गई। बारिश व तेज हवाओं के कारण धान की बासमती 1121 ब 370 को काफी नुकसान पहुंचा है। तहसील राजपुरा के सीमावर्ती क्षेत्र गांव मंगू चक और सारथीयां खुर्द, चलेआरी, चचवाल व रिगाल क्षेत्र के किसान इससे प्रभावित हुए हैं। किसान सुभाष चंद ने बताया कि हवा चलने से 50 से 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है। हवा के चलते फसल खेतों में लेट गई है। खेतों में पानी भरा है और फसल सड़ गई है तथा बालियां भी नहीं निकलेंगी।
किसान लालचंद ने बताया कि दोहरा नुकसान हो सकता है। धान का तो नुकसान हुआ ही रबी की बुआई भी पिछड़ेगी। नुकसान का किसानों को फसल बीमा का क्लेम मिलना चाहिए, क्योंकि इस आपदा के रेंज में काफी बड़ा इलाका आया है। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों के अनुसार बारिश के चलते धान काटते समय नुकसान होगा। जो फसल बची है पानी में भीगे धान का उचित मूल्य नहीं मिलता है।
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बारिश व तेज हवाओं से धान की फसल को नुकसान होने की जानकारी मिली है। पटवारी नुकसान की सूची बना रहे है। सूची बनने पर ही पता चलेगा कि कितना नुकसान हुआ है।
-सुभाष चंद्र, तहसीलदार, राजपुरा।
बारिश से कंड़ी क्षेत्र के किसान खुश
विजयपुर। क्षेत्र में हुई बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली। कुछ दिनों से गर्मी का प्रकोप जारी था। इस कारण मक्खी, मच्छरों में भी बढ़ोतरी हो गई थी, बुधवार को हुई बारिश से किसानों के अलावा लोगों ने भी राहत की सांस ली। किसानों ने बताया कि इस समय कंडी क्षेत्र में बारिश की बहुत जरूरत थी। क्योंकि गेहूं की बिजाई करने के लिए बारिश चाहिए थी। कंडी क्षेत्र मात्र बारिश के पानी पर ही निर्भर रहता है। इस बारिश से किसानों को काफी लाभ मिला है। वहीं बारिश के बाद सर्दी बढ़ गई है। लोगों ने गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दिए। संवाद
परगवाल में बारिश से ठंड बढ़ी
पररगवाल। सीमा क्षेत्र परगवाल में बुधवार को हुई बारिश से क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है। लोग सर्दी से बचने के लिए गर्म कपड़ों और अलाव का सहारा लेते दिखे। हालांकि बारिश शाम को रुक गई, लेकिन उसके बाद चली हवा ने ठंड का अहसास दिला दिया। लोगों का कहना था कि पिछले दिनों पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी और मैदानी इलाकों में हुई बारिश के बाद चली हवाओं से ठंड का प्रकोप बढ़ा है। संवाद
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मौसम खराब होता देख किसानों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। क्षेत्र के किसान एक दूसरे से मौसम की जानकारी लेते नजर आए। किसान गुलबदन सिंह निवासी सीमावर्ती गांव पलांवाला ने बताया कि दो-तीन दिन से खराब मौसम को देखकर डर लग रहा है कि कहीं मौसम के कारण हमारी फसल का नुकसान न हो जाए। क्योंकि हम लोग दो-तीन साल से मौसम की मार झेलते आ रहे हैं। हमारा क्षेत्र भी नमी वाला है। थोड़ी सी बारिश होने पर पानी खेतों में जमा हो जाता है, और फसल खराब होने का डर रहता है।
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किसान व पार्षद दीपक सिंह ने बताया कि क्षेत्र में छोटी धान को तो हमने समेट लिया है, लेकिन बासमती अभी 75 प्रतिशत बाहर खेतों में है। कुछ काट दी है, जिसको झाड़ना शेष है। कुछ खेतों में अभी खड़ी़ है। मौसम हमें डरा रहा है। किसान नानक चौधरी ने बताया कि धान की कटाई का काम हमने रोक दिया है। क्योंकि हमें डर है कि कहीं बारिश से फसल खराब न हो जाए।
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रुक-रुक कर हो रही बारिश से ठंड बढ़ी
बासमती की फसल को होगा नुकसान
बिश्नाह। क्षेत्र में बुधवार को दोपहर बाद शुरू हुई बारिश यहां रुक-रुक कर होती रही। इससे जहां ठंड बढ़ गई वहीं इस बारिश के बाद ज्यादातर लोगों द्वारा गर्म कपड़े भी निकालकर पहन लिए गए। जहां मौसम इस करवट के बाद रुक-रुक कर हो रही बारिश से धान की अधिकांश फसल जो अभी तक खेतों में है। उसको नुकसान होने का अनुमान है।
किसानों द्वारा बासमती धान 370 वैरायटी ज्यादातर किसानों द्वारा लगाई जाती है। हालांकि कुछ किसानों ने फसल काट ली है। अभी कुछ फसल काट रहे थे। दोनों ही कटी हुई फसल और न कटी हुई फसल को इस बारिश से नुकसान हो सकता है। वहीं कोटली चाड़का के किसान स्वर्ण सिंह ने बताया कि अगर बारिश 10 दिन और न होती, तो सभी किसानों की बासमती वैरायटी की धान घरों में पहुंच जात। अब मुश्किल हो गई है। देखते हैं कि मौसम अगर और ज्यादा खराब होता है तो फिर ज्यादा नुकसान होगा। अगर यहीं मौसम साफ हो जाता है तो मामूली नुकसान की आशंका है।
परगवाल में बारिश से किसान परेशान
परगवाल। इन दिनों हो रही बारिश से सीमा क्षेत्र परगवाल के किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है। वहीं बुधवार को हुई बारिश ने धान खरीद केंद्र में भी किसानों का पीछा नहीं छोड़ा। खुले आसमान के नीचे पड़ी धान भीगने से किसानों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है। मंडियों में उचित प्रबंध न होने पर किसानों ने सरकार के प्रति रोष जाहिर किया है।
किसानों का कहना है कि सरकारी मंडियों में उचित प्रबंध न होने से उनकी धान भीग गई है, क्योंकि मंडियों में पानी की निकासी न होने से कई जगह बारिश का पानी जमा हो गया है। किसान मुल्तान सिंह काका राम जोगिंदर राम का कहना था कि वह कुछ दिन पहले अपनी फसल लेकर मंडी आए थे, लेकिन बहुत सारे किसान धान लेकर पहुंचे थे जिस कारण वह अपनी फसल बेच नहीं पाए। क्योंकि मंडी में पहले धान की सफाई करके धान खरीदी जाती है। बुधवार को हुई बारिश से उनकी परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है।
दिनभर हुई बूंदाबांदी ने ठंड बढ़ाई
संवाद न्यूज़ एजेंसी
आरएस पुरा /मीरां साहिब। उपजिला में बुधवार को छाए बादलों के चलते हुई बूंदाबांदी के चलते सर्दी में हुई बढ़ोतरी देखने को मिली। दिन निकलने के साथ ही छाए बादलों के मध्य बारिश की संभावना थी। दोपहर को आरंभ हुई बूंदाबांदी ने ठंड बढ़ा दी है।
हल्की बारिश के बाद अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई है। वहीं बादल छाए देखकर किसान धान की फसल को ढकने के लिए तिरपालों को लेकर इधर-उधर भागते रहे। अभी तक लग पचास प्रतिशत धान की कटाई हो पाई है। ऐसे में किसानों की चिंताएं और बढ़ गईं। पहाड़ों में हुई बर्फबारी व मैदानी क्षेत्र में हल्की बारिश के उपरांत लोग भी अब गर्म कपड़े पहनने आरंभ कर हैं। मौसम विभाग के अनुसार 10 नवंबर तक बूंदाबांदी हो सकती है, और 11 नवंबर से रात का तापमान बढ़े़गा। इस संबंध में कृषि मौसम विज्ञान विभागाध्यक्ष ने बताया कि 10 नवंबर तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने की संभावना है। 10 नवंबर के दौरान बीच बीच में हवाएं चलने तथा कहीं कहीं बूंदाबांदी होने की भी संभावना है। इसके बाद 11 नवंबर से हवाओं की दिशा में भी बदलाव संभावित जो उत्तर पूर्वी से उत्तर पश्चिमी होने की संभावना है, जिससे पहाड़ों की तरफ से ठंडी हवाएं चलने से राज्य में ज्यादातर क्षेत्रों में रात के तापमान में हल्की गिरावट होने की संभावना है।
चार दिन से खराब मौसम ने किसानों की नींद उड़ाई
रामगढ़। सीमावर्ती गांव नंदपुर, रंजीतपूरा, दग छनी, अवताल, केसो, कमोर कैंप, जेडरा, चक छटाका, खौड सलालीया में तीन दिन से खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि अगर बारिश हो गई तो हमारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। बारिश होने से न तो कंबाइन मशीनें चलेंगी और न तो हाथों से धान की कटाई हो पाएगी। हमें गेहूं की फसल बीजने में भी देरी हो जाएगी।
किसान नेता विजय चौधरी, बीडीसी चेयरमैन दर्शन सिंह, ओमप्रकाश, मोहन सिंह का कहना है कि अगर बारिश हो गई तो किसानों को काफी नुकसान होगा। धान को समेटने का काम जोरशोर से चल रहा है। किसान तिलक राज का कहना है कि आज हमें चिंता सता रही है कि हम परिवार का गुजारा कैसे कर पाएंगे। अगर बारिश हो गई तो हमारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। बुधवार दोपहर बाद बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे दूसरे राज्यों से आई कंबाइन मशीनें भी बारिश की बजाय खेतों में नहीं चलीं।
सीमावर्ती क्षेत्र में बारिश से धान की फसल को नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। बादल देख कर किसान चिंता में डूब जाते हैं। बुधवार सुबह से ही बूंदाबांदी हो रही है, जिससे किसानों को उनकी धान की फसल की चिंता बनी हुई है। पिछले दिनों हुई बारिश और तेज हवा के कारण जिले में कुछ गांवों में धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। धान की बालियां गिर गई हैं और बारिश से धान के किसानों का भारी नुकसान हुआ है।
अच्छी-खासी फसल पर अंतिम चरण में प्राकृतिक प्रकोप से किसान परेशान हैं। इस वर्ष समय-समय पर बरसात हो जाने से धान की फसल काफी अच्छी थी। किंतु जब धान में बाली लगने लगी और दाना पड़ने लगा, तभी तेज हवा चलने तथा बारिश होने से धान की फसल जमीन पर लेट गई। बारिश व तेज हवाओं के कारण धान की बासमती 1121 ब 370 को काफी नुकसान पहुंचा है। तहसील राजपुरा के सीमावर्ती क्षेत्र गांव मंगू चक और सारथीयां खुर्द, चलेआरी, चचवाल व रिगाल क्षेत्र के किसान इससे प्रभावित हुए हैं। किसान सुभाष चंद ने बताया कि हवा चलने से 50 से 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है। हवा के चलते फसल खेतों में लेट गई है। खेतों में पानी भरा है और फसल सड़ गई है तथा बालियां भी नहीं निकलेंगी।
किसान लालचंद ने बताया कि दोहरा नुकसान हो सकता है। धान का तो नुकसान हुआ ही रबी की बुआई भी पिछड़ेगी। नुकसान का किसानों को फसल बीमा का क्लेम मिलना चाहिए, क्योंकि इस आपदा के रेंज में काफी बड़ा इलाका आया है। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों के अनुसार बारिश के चलते धान काटते समय नुकसान होगा। जो फसल बची है पानी में भीगे धान का उचित मूल्य नहीं मिलता है।
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बारिश व तेज हवाओं से धान की फसल को नुकसान होने की जानकारी मिली है। पटवारी नुकसान की सूची बना रहे है। सूची बनने पर ही पता चलेगा कि कितना नुकसान हुआ है।
-सुभाष चंद्र, तहसीलदार, राजपुरा।
बारिश से कंड़ी क्षेत्र के किसान खुश
विजयपुर। क्षेत्र में हुई बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली। कुछ दिनों से गर्मी का प्रकोप जारी था। इस कारण मक्खी, मच्छरों में भी बढ़ोतरी हो गई थी, बुधवार को हुई बारिश से किसानों के अलावा लोगों ने भी राहत की सांस ली। किसानों ने बताया कि इस समय कंडी क्षेत्र में बारिश की बहुत जरूरत थी। क्योंकि गेहूं की बिजाई करने के लिए बारिश चाहिए थी। कंडी क्षेत्र मात्र बारिश के पानी पर ही निर्भर रहता है। इस बारिश से किसानों को काफी लाभ मिला है। वहीं बारिश के बाद सर्दी बढ़ गई है। लोगों ने गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दिए। संवाद
परगवाल में बारिश से ठंड बढ़ी
पररगवाल। सीमा क्षेत्र परगवाल में बुधवार को हुई बारिश से क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है। लोग सर्दी से बचने के लिए गर्म कपड़ों और अलाव का सहारा लेते दिखे। हालांकि बारिश शाम को रुक गई, लेकिन उसके बाद चली हवा ने ठंड का अहसास दिला दिया। लोगों का कहना था कि पिछले दिनों पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी और मैदानी इलाकों में हुई बारिश के बाद चली हवाओं से ठंड का प्रकोप बढ़ा है। संवाद