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Jammu News: कश्मीर की चेरी की मिठास अब सऊदी अरब व यूएई में
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की प्रीमियम चेरी अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर रुख कर चुकी है। हाल ही में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए कश्मीर की चेरी की पहली वाणिज्यिक खेप रवाना की गई है, जिससे राज्य के बागवानों को बड़ा बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर लिखा कि हमारे चेरी किसानों के लिए एक बड़ा बाजार खुल गया है और उन्हें अब अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।
बता दें कि चेरी की खेप को भारतीय रेलवे की पार्सल वैन के माध्यम से जम्मू-कटड़ा से मुंबई भेजा गया। कश्मीर से ट्रकों के माध्यम से चेरी को कटरा रेलवे स्टेशन पर लाया गया था। यहां से पार्सल के माध्यम से फल को बांद्रा भेजा गया था। पहली खेप में 24 टन चेरी को बांद्रा भेजा गया है। पहले सड़क मार्ग से चेरी देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचती थी। इससे न सिर्फ उत्पाद की गुणवत्ता पर असर पड़ता था, बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी महंगा होता था।
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कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सेब, केसर और अखरोट जैसे अन्य कश्मीरी उत्पादों को भी वैश्विक मंच मिलेगा।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर की प्रीमियम चेरी अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर रुख कर चुकी है। हाल ही में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए कश्मीर की चेरी की पहली वाणिज्यिक खेप रवाना की गई है, जिससे राज्य के बागवानों को बड़ा बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर लिखा कि हमारे चेरी किसानों के लिए एक बड़ा बाजार खुल गया है और उन्हें अब अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।
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बता दें कि चेरी की खेप को भारतीय रेलवे की पार्सल वैन के माध्यम से जम्मू-कटड़ा से मुंबई भेजा गया। कश्मीर से ट्रकों के माध्यम से चेरी को कटरा रेलवे स्टेशन पर लाया गया था। यहां से पार्सल के माध्यम से फल को बांद्रा भेजा गया था। पहली खेप में 24 टन चेरी को बांद्रा भेजा गया है। पहले सड़क मार्ग से चेरी देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचती थी। इससे न सिर्फ उत्पाद की गुणवत्ता पर असर पड़ता था, बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी महंगा होता था।
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कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सेब, केसर और अखरोट जैसे अन्य कश्मीरी उत्पादों को भी वैश्विक मंच मिलेगा।