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लैवेंडर की सुगंध से महक रहा भद्रवाह
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भद्रवाह में लैवेंडर की खेती करता कृषक परिवार। संवाद
- फोटो : UDHAMPUR
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भद्रवाह/उधमपुर। भद्रवाह के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में रहने वाले किसान मक्की की खेती छोड़ कर लैवेंडर की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मौजूदा समय में करीब 200 किसानों ने लैवेंडर की खेती करने में कामयाबी हासिल कर ली है और मक्की की खेती के मुकाबले में 100 गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। यह किसान प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करते नजर आ रहे हैं। जिले में लैवेंडर की खेती से बैंगनी क्रांति आती नजर आ रही है।
डोडा के किसान सरकार की एरोमा मिशन के तहत लैवेंडर की खेती कर रहे हैं। छोटे किसानो की आमदनी में बढ़ोतरी को लेकर काउंसिल आफ सांइटिफिक एंड इंडस्ट्रीज रिसर्च गवर्नमेंट आफ इंडिया ने 2018 में डोडा, किश्तवाड़ और राजोरी जिले में एरोमा मिशन को लांच किया था। भद्रवाह के तिपरी, लेहरोत, किल्लर, कौंडला, हिमोत, सरतिंगल, बुटला, नालथी, नक्षरी गांव के 200 किसानों ने लैवेंडर की खेती शुरू की और मौजूदा समय में इन किसानों के खेत लैवेंडर की खेती के साथ महक रहे हैं। हर तरफ बैंगनी रंग की लैवेंडर की खेती नजर आ रही है।
आठ सौ लीटर तेल निकालने में मिली कामयाबी
सीआईएसआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर सुमित गैरोला ने बताया कि मार्च 2020 तक जम्मू संभाग के किसानों को आठ लाख लैवेंडर के पौधे निशुल्क दिए जा चुके हैं। भद्रवाह के किसानों ने लैवेंडर की खेती में सफलता पाकर 2018 से 2020 तक लैवेंडर की खेती कर 800 लीटर लैवेंडर का तेल निकालने में कामयाबी हासिल की है। इसकी कीमत करीब 80 लाख रुपये है। भद्रवाह के किसानों को 2010 से भद्रवाह के किसानों को सुगंधित फसलों की खेती करने को प्रेरित कर रहे हैं। अब किसानों ने इसको गंभीरता से लेकर काम शुरू किया है। मौजूदा समय में 100 एकड़ से भी अधिक जमीन पर 200 किसान लैवेंडर की खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। यह किसान प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करते नजर आ रहे हैं। किसानों को लैवेंडर से दस हजार रुपये लीटर के हिसाब से दाम मिल रहे हैं।
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पहले वह मक्की की खेती कर मामूली लाभ हासिल करते थे, लेकिन अब लैवेंडर की खेती कर 100 गुना अधिक लाभ हासिल कर रहे हैं। उनकी तरह कई किसान अब लैवेंडर की खेती कर अच्छा पैसा कमा रहे हैं।
ओम राज, सरपंच, नियोता करयान पंचायत
लैवेंडर की खेती की तरफ महिलाओं ने भी विशेष तौर ध्यान दिया है। महिलाएं कम समय में अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। लैवेंडर की खेती से भद्रवाह में बैंगनी क्रांति आती नजर आ रही है।
-बबली देवी, निवासी तिपरी
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डोडा के किसान सरकार की एरोमा मिशन के तहत लैवेंडर की खेती कर रहे हैं। छोटे किसानो की आमदनी में बढ़ोतरी को लेकर काउंसिल आफ सांइटिफिक एंड इंडस्ट्रीज रिसर्च गवर्नमेंट आफ इंडिया ने 2018 में डोडा, किश्तवाड़ और राजोरी जिले में एरोमा मिशन को लांच किया था। भद्रवाह के तिपरी, लेहरोत, किल्लर, कौंडला, हिमोत, सरतिंगल, बुटला, नालथी, नक्षरी गांव के 200 किसानों ने लैवेंडर की खेती शुरू की और मौजूदा समय में इन किसानों के खेत लैवेंडर की खेती के साथ महक रहे हैं। हर तरफ बैंगनी रंग की लैवेंडर की खेती नजर आ रही है।
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आठ सौ लीटर तेल निकालने में मिली कामयाबी
सीआईएसआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर सुमित गैरोला ने बताया कि मार्च 2020 तक जम्मू संभाग के किसानों को आठ लाख लैवेंडर के पौधे निशुल्क दिए जा चुके हैं। भद्रवाह के किसानों ने लैवेंडर की खेती में सफलता पाकर 2018 से 2020 तक लैवेंडर की खेती कर 800 लीटर लैवेंडर का तेल निकालने में कामयाबी हासिल की है। इसकी कीमत करीब 80 लाख रुपये है। भद्रवाह के किसानों को 2010 से भद्रवाह के किसानों को सुगंधित फसलों की खेती करने को प्रेरित कर रहे हैं। अब किसानों ने इसको गंभीरता से लेकर काम शुरू किया है। मौजूदा समय में 100 एकड़ से भी अधिक जमीन पर 200 किसान लैवेंडर की खेती कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। यह किसान प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करते नजर आ रहे हैं। किसानों को लैवेंडर से दस हजार रुपये लीटर के हिसाब से दाम मिल रहे हैं।
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पहले वह मक्की की खेती कर मामूली लाभ हासिल करते थे, लेकिन अब लैवेंडर की खेती कर 100 गुना अधिक लाभ हासिल कर रहे हैं। उनकी तरह कई किसान अब लैवेंडर की खेती कर अच्छा पैसा कमा रहे हैं।
ओम राज, सरपंच, नियोता करयान पंचायत
लैवेंडर की खेती की तरफ महिलाओं ने भी विशेष तौर ध्यान दिया है। महिलाएं कम समय में अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। लैवेंडर की खेती से भद्रवाह में बैंगनी क्रांति आती नजर आ रही है।
-बबली देवी, निवासी तिपरी