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किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए कर्ज की किश्तें माफ करने की मांग
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ज्यौड़ियां। कोरोना के चलते किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बैंक से फसल बीजने के लिए लोन की किश्त को किसानों ने माफ करने की मांग की है। किसानों ने बताया कि मंदी के चलते वह किश्त अदा नहीं कर पा रहे हैं। इस संबंध में किसानों ने तहसीलदार को पत्र भी दिया है, और अनुरोध किया है कि उनके कर्ज की किश्त माफ मराई जाए।
किसानों ने बताया कि कभी बेमौसम बारिश, तो सूखा, लगातार बढ़ती मंहगाई और अब कोरोना से आर्थिक हालत दिन पर दिन कमजोर होती जा रही है। हमारी समस्या को सरकार समझे और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए लोन की किश्त को माफ किया जाए। किसानों ने कहा कि तीन चार सीजन से हमें खेती में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे हमारी आर्थिक स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। किसानों ने बताया कि सरकार ने हमारे खातों में जो दो-दो हजार रुपये डाल कर मदद की है। उसके हम सरकार के आभारी हैं, लेकिन दो हजार में क्या होने वाला है। इसलिए सरकार को चाहिये कि हमारे किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए लोन की किश्त को माफ किया जाए।
इस विषय में किसान बलबीर सिंह, स्वर्ण सिंह, बहादुर सिंह आदि ने बताया कि उनकी जमीन भारत-पाक सीमा पर स्थित है। पिछले सात-आठ साल से हमें कभी भी खेतीबाड़ी से मुनाफा नहीं हुआ है। कभी गोलाबारी की मार तो कभी मौसम की मार और अब कोरोना के भय से हमारा घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हम कैसे खेतीबाड़ी कर पाएंगे।
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किसानों ने बताया कि कभी बेमौसम बारिश, तो सूखा, लगातार बढ़ती मंहगाई और अब कोरोना से आर्थिक हालत दिन पर दिन कमजोर होती जा रही है। हमारी समस्या को सरकार समझे और किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए लोन की किश्त को माफ किया जाए। किसानों ने कहा कि तीन चार सीजन से हमें खेती में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे हमारी आर्थिक स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। किसानों ने बताया कि सरकार ने हमारे खातों में जो दो-दो हजार रुपये डाल कर मदद की है। उसके हम सरकार के आभारी हैं, लेकिन दो हजार में क्या होने वाला है। इसलिए सरकार को चाहिये कि हमारे किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए लोन की किश्त को माफ किया जाए।
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इस विषय में किसान बलबीर सिंह, स्वर्ण सिंह, बहादुर सिंह आदि ने बताया कि उनकी जमीन भारत-पाक सीमा पर स्थित है। पिछले सात-आठ साल से हमें कभी भी खेतीबाड़ी से मुनाफा नहीं हुआ है। कभी गोलाबारी की मार तो कभी मौसम की मार और अब कोरोना के भय से हमारा घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हम कैसे खेतीबाड़ी कर पाएंगे।
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