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Jammu News: निदेशक की खाली कुर्सी से किसानों को नहीं मिल पा रहे उपकरण
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एक तरफ धान की फसल पर मौसम की मार पड़ी है तो वहीं कृषि विभाग का लापरवाह रवैया किसानों का दर्द और बढ़ा रहा है। खरीफ के बाद अब रबी सीजन में भी कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही, क्योंकि 19 दिन से निदेशक का पद खाली है। इस वजह से किसानों को गेहूं, सब्जियां और चारा के लिए सब्सिडी की मशीनरी नहीं मिल रही। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कोई भी मशीन देने के लिए जिला स्तर पर निदेशक की मंजूरी लेनी होती है। पहले तो 6 महीने से नई योजना की वजह से मशीनरी नहीं दी गई और निदेशक नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है। किसी अधिकारी को अतिरिक्त पदभार नहीं मिलने से विभाग में भी काम सही तरीके से नहीं हो रहा। केके शर्मा 30 सितंबर को रिटायर हुए थे।
निदेशक की नियुक्ति कब होगी का जवाब मांगने के लिए कृषि उत्पादन विभाग के आयुक्त सचिव शैलेंद्र कुमार से संपर्क नहीं हो पाया। वह जब भी पक्ष रखेंगे तो प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। उधर, किसान संघ के अध्यक्ष राजेश शर्मा का कहना है कि बारिश और आंधी से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसका आंकलन करने कोई नहीं आ रहा। जब विभाग का मुखिया ही नहीं है तो कैसे मदद मिलेगी। प्रधान तेजिंदर सिंह का कहना है कि निदेशक की नियुक्ति न होना इस बात का प्रमाण है कि कृषि विभाग किसानों को लेकर गंभीर नहीं है।
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जम्मू। एक तरफ धान की फसल पर मौसम की मार पड़ी है तो वहीं कृषि विभाग का लापरवाह रवैया किसानों का दर्द और बढ़ा रहा है। खरीफ के बाद अब रबी सीजन में भी कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही, क्योंकि 19 दिन से निदेशक का पद खाली है। इस वजह से किसानों को गेहूं, सब्जियां और चारा के लिए सब्सिडी की मशीनरी नहीं मिल रही। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कोई भी मशीन देने के लिए जिला स्तर पर निदेशक की मंजूरी लेनी होती है। पहले तो 6 महीने से नई योजना की वजह से मशीनरी नहीं दी गई और निदेशक नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है। किसी अधिकारी को अतिरिक्त पदभार नहीं मिलने से विभाग में भी काम सही तरीके से नहीं हो रहा। केके शर्मा 30 सितंबर को रिटायर हुए थे।
निदेशक की नियुक्ति कब होगी का जवाब मांगने के लिए कृषि उत्पादन विभाग के आयुक्त सचिव शैलेंद्र कुमार से संपर्क नहीं हो पाया। वह जब भी पक्ष रखेंगे तो प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। उधर, किसान संघ के अध्यक्ष राजेश शर्मा का कहना है कि बारिश और आंधी से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसका आंकलन करने कोई नहीं आ रहा। जब विभाग का मुखिया ही नहीं है तो कैसे मदद मिलेगी। प्रधान तेजिंदर सिंह का कहना है कि निदेशक की नियुक्ति न होना इस बात का प्रमाण है कि कृषि विभाग किसानों को लेकर गंभीर नहीं है।
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