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दुजाना की मौत के बाद कश्मीर में फिर उपज सकते हैं हिंसा के हालात, एजेंसियां सतर्क

Thu, 03 Aug 2017 07:51 PM IST
बृजेश कुमार सिंह,अमर उजाला/जम्मू
बृजेश कुमार सिंह,अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 03 Aug 2017 07:51 PM IST
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AGENCIES MADE A SPECIFIED PLAN FOR KASHMIR UNREST
कश्मीर में तैनात जवान - फोटो : फाइल फोटो

इस बार आतंकी की मौत के बाद घाटी हिंसा की आग में नहीं झुलसेगी। हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में उत्पन्न हालात दोबारा पैदा न होने पाएं, इसे लेकर राज्य सरकार ने कमर कस ली है। लश्कर कमांडर अबु दुजाना के मारे जाने के बाद घाटी में शांति बनाए रखने के लिए मंत्रियों तथा विधायकों को कश्मीरी अवाम के बीच रहने की हिदायत दी गई है।

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इन्हें लोगों के बीच रहकर हिंसा से दूर रहने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। खासकर पीडीपी के लोगों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को कहा गया है। इसके साथ ही स्कूल एवं कालेज प्रबंधन को भी बच्चों को संयमित रखने तथा हिंसा से दूर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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सूत्रों ने बताया कि अबु दुजाना के मारे जाने के तत्काल बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सभी सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों से बात कर हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की हिदायत दी। साथ ही अधिकतम सीमा तक संयम बरतने और अनावश्यक बल प्रयोग से बचने को कहा, ताकि जानी नुकसान न होने पाए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से सभी जिलों खासकर दक्षिणी कश्मीर में हालात की जानकारी ली और इन इलाकों पर विशेष ध्यान रखने को कहा। 

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हिंसक प्रदर्शनों की आशंका में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

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कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन - फोटो : फाइल फोटो

पीडीपी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंत्रियों तथा विधायकों से अपने-अपने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास करने को कहा। इसके लिए उन्हें जनता के बीच जाकर उनकी बातों को सुनने को कहा।

हाल के दिनों में स्कूल तथा कालेज के छात्र-छात्राओं के सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी की घटना में शामिल होने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी को देखते हुए सभी स्कूल व कालेज प्रबंधन को इस पर नजर रखने को कहा गया है। खासकर छात्राओं पर। कालेज में मिलने-जुलने आने वाले बाहरी लोगों पर पैनी निगाह रखने के निर्देश हैं।

आशंका है कि महिला अलगाववादी भीड़ में शामिल होकर छात्राओं को पत्थरबाजी के लिए भड़काने की कोशिश कर सकती हैं। छात्र-छात्राओं को हिंसा से दूर रखने के लिए सुरक्षाबलों ने शिक्षण संस्थानों के बाहर पहरा लगा रखा है। वीरवार से शिक्षण संस्थानों के खुलने पर और सतर्कता बरती जाएगी।

बुरहान के मारे जाने के बाद पांच महीने चला था हिंसा चक्र

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कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन - फोटो : फाइल फोटो
बुरहान के मारे जाने के बाद पिछले साल घाटी में हालात बेकाबू हो गए थे। हिंसक प्रदर्शनों तथा बंद का सिलसिला लगभग पांच महीने तक चला था। पर्यटन बिल्कुल ठप हो गया था। रियासत सरकार को लगभग 16 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था।
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