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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   After the target killing in Shopian, the workers started leaving the valley, the workers gathered at the Jammu

Shopian Target Killing: लक्षित हत्याओं से सहमे श्रमिक छोड़ने लगे घाटी, जम्मू रेलवे स्टेशन पर मजदूरों की भीड़

Thu, 20 Oct 2022 02:14 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 20 Oct 2022 02:14 AM IST
सार

जम्मू रेलवे स्टेशन पर पहुंचे श्रमिकों में सबसे ज्यादा यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के हैं। श्रमिकों ने कहा कि हम मेहनतकश लोग हैं, फिर हमें क्यों निशाना बनाया जा रहा है। पिछले साल भी अक्तूबर में ही आतंकियों ने श्रमिकों की हत्या की थी।

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After the target killing in Shopian, the workers started leaving the valley, the workers gathered at the Jammu
घाटी में टारगेट किलिंग के बाद जम्मू पहुंचे श्रमिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में कश्मीरी पंडित और दो गैर कश्मीरी श्रमिकों की लक्षित हत्या के बाद हजारों श्रमिक घाटी छोड़ कर जम्मू पहुंचने लगे हैं।  बुधवार को कश्मीर संभाग के विभिन्न जिलों से एक हजार से अधिक श्रमिक जम्मू रेलवे स्टेशन पहुंचे। अगले कुछ दिनों तक श्रमिकों के आने का सिलसिला और बढ़ सकता है।

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आमतौर पर दिवाली और छठ के लिए इस समय श्रमिक घर लौटते ही हैं परंतु हाल की घटनाओं ने इनमें दहशत पैदा कर दी है। जिसके कारण इस बार यह जल्दी लौट रहे हैं। शोपियां में 60 घंटे के भीतर तीन लक्षित हत्याओं से पनपे भय के माहौल के बीच श्रमिक अपने कामकाज छोड़ घाटी छोड़ रहे हैं।
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जम्मू रेलवे स्टेशन पर घाटी से आ रहे श्रमिकों की भीड़ उमड़ रही है। इन श्रमिकों में सबसे ज्यादा यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के हैं। श्रमिकों ने कहा कि हम मेहनतकश लोग हैं, फिर हमे क्यों निशाना बनाया जा रहा है। पिछले साल भी अक्तूबर में ही आतंकियों ने श्रमिकों की हत्या की थी।
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उस समय भी हमें घाटी छोड़नी पड़ी थी। कश्मीर बाहरी राज्यों के लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। श्रमिक वहां काम करने जाते हैं मरने नहीं। जब भी श्रमिकों को मारने की खबर मिलती है तो डर लगता है। गांव से फोन आने शुरू हो जाते हैं। डर के माहौल में हमारे सामने कश्मीर घाटी छोड़ लौटने के सिवाए दूसरा कोई विकल्प नहीं होता।

डर के माहौल में काम करना मुश्किल 

कश्मीर में 2014 से काम करने जा रहा हूं। लक्षित हत्या की खबर सुनकर डर लग रहा है। गांव से लोग फोन कर लौटने को कह रहे हैं। पिछले दो साल से माहौल काफी खराब होता जा रहा है। श्रमिकों को मारा जा रहा है। कश्मीर में आम दिनों में काम डर के बीच ही करते हैं। ठेकेदार समय पर पैसा नहीं देता है। पैसा मांगो तो डराता है। -बाबर, श्रमिक बिहार 

ठेकेदार समय पर पैसा नहीं देता

दो साल से स्थिति काफी खराब होती जा रही है। श्रमिकों को निशाना बनाया जा रहा है। डर के कारण हम वापस जा रहे हैं। अब कश्मीर में दोबारा काम करने नहीं आएंगे। ठेकेदार समय पर पैसा नहीं देता है। हमें डराया जाता है। आतंकी किसी को मारते समय किसी का धर्म नहीं देखते है। वह मानवता के दुश्मन हैं। -आलमगीर, श्रमिक बिहार 

श्रमिकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा 

घाटी में डर है, इस बात से इन्कार नहीं कर सकते। कश्मीरी पंडित और श्रमिक आतंकियों के निशाने पर हैं। हर बार लक्षित हत्याएं होती हैं। पहले श्रमिकों को नहीं मारा जाता था, लेकिन पिछले तीन वर्षों से लगातार श्रमिकों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे भय ज्यादा बढ़ गया है, परिवार के सदस्य भी चिंतित हैं। सुरक्षा के अभाव में कश्मीर छोड़ना ही विकल्प दिख रहा है। -शिवानंद मेहता, श्रमिक बिहार 

जम्मू आना ही सुरक्षित समझा 

हमने दिवाली और छठ के लिए घर जाना था, लेकिन उसमें अभी पांच दिन थे। शोपियां में तीन लोगों की हत्या के बाद हमने जम्मू आना ही सुरक्षित समझा। कुछ दिन जम्मू में रुकेंगे, लेकिन कश्मीर में एक भी दिन रुकना हमारे लिए सुरक्षित नहीं है। परिवार के लोग चिंतित रहते हैं। कश्मीर में कभी भी हालात सामान्य नहीं रहे, लेकिन इस बार काफी बिगड़ गए हैं। पहले प्रवासी कामगारों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता था, लेकिन अब आतंकी उन्हें निशाना बना रहे हैं। -केलू मेहता श्रमिक, बिहार

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