25 साल बाद जम्मू कश्मीर को मिलेगी अपने हिस्से की बिजली, विद्युत संकट से मिलेगी राहत
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पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इसके लिए जम्मू कश्मीर पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन (जेकेपीटीसी) को पत्र लिखा है। इसके बाद जेकेपीटीसी ने इस लाइन के आसपास रहने वाले लोगों को नोटिस जारी कर लाइन के आसपास स्थाई या अस्थाई निर्माण न करने व बिजली लाइन से दूर रहने की सलाह दी है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो अभी इस लाइन को रंजीत सागर बांध के साथ टैप नहीं किया गया है और टेस्ट चार्जिंग के लिए इसे हीरानगर ग्रिड से बैक फीड किया जाएगा। ऐसे में इन लाइनों में जल्द ही करंट दौड़ना शुरू हो जाएगा।
120 मेगावाट बिजली मिलेगी
रंजीत सागर बांध से होने वाले 600 मेगावॉट बिजली उत्पादन में से 20 फीसदी 120 मेगावाट बिजली का प्रदेश में इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, यह बिजली जम्मू कश्मीर को उत्पादन की कीमत चुकाकर मिलेगी।
हिमाचल हासिल करता है उत्पादन से 4.6 प्रतिशत मुफ्त बिजली
अधिकारियों ने बताया कि थैं-हीरानगर ट्रांसमिशन लाइन को रंजीत सागर बांध के पूरा होने तक तैयार कर लिया गया था, लेकिन जम्मू कश्मीर और पंजाब के बीच कई मुद्दों पर असहमति के चलते इस लाइन को बांध के साथ टैप नहीं किया जा सका था। इस ट्रांसमिशन लाइन के हीरानगर ग्रिड के साथ जुड़ने के बाद इंटरकनेक्टेड अन्य ग्रिड को भी बिजली सप्लाई जरूरत के समय उपलब्ध करवाई जा सकेगी।
वर्षों पूर्व हुए रंजीत सागर झील को लेकर पंजाब और जम्मू कश्मीर सरकार के बीच 20 फीसदी बिजली खरीद को लेकर हुआ समझौता सबसे हैरान करने वाला था। जम्मू-कश्मीर ने जिस समझौते पर वर्ष 1979 में हामी भरी थी, उसके अनुसार बांध से बीस फीसदी उत्पादन का हक जम्मू-कश्मीर का है, लेकिन यह हक बसबार रेट पर बिजली खरीद कर ही हासिल किया जा सकता है। हालांकि, हिमाचल सरकार ने समय रहते अनुबंध में सुधार करा लिया और वर्तमान में बसबार रेट पर हिमाचल के हिस्से की बिजली में से 4.6 फीसदी बिजली मुफ्त मिल रही है।