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50 वर्षों बाद घाटी में 40 फीसदी अधिक बारिश

Wed, 05 Aug 2015 11:43 AM IST
Updated Wed, 05 Aug 2015 11:43 AM IST
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after 50 years, 40 percent more rain in kashmir valley

कश्मीर घाटी में करीब 50 वर्षों बाद मानसून का ऐसा जबर्दस्त असर देखने को मिल रहा है। मजबूत मानसून के कारण सामान्य से 40 फीसदी से अधिक बारिश राज्य भर में हुई है।

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इसके अलावा घाटी में कई  जगहों पर पिछले एक माह के भीतर बादल फटने की घटनाओं के साथ-साथ तेज आंधी और भारी बारिश (थंडरस्टोर्म) के चलते जानी और माली नुकसान भी हुआ है।
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श्रीनगर समेत घाटी के लगभग सभी हिस्सों में अप्रैल से लेकर अभी तक कोई ऐसा दिन नहीं गुजरा, जब 24 घंटों के दौरान एक बार जोरदार बारिश न हुई हो। मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोटस ने बताया कि इस वर्ष राज्य में मानसून 24 जून को घोषित किया गया था।
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जो सामान्य रूप से सात जुलाई को होना चाहिए था। पहली जून से लेकर 4 अगस्त तक राज्य में सामान्य से 40 प्रतिशत बारिश ज्यादा हुई है और इसके पीछे एक ही कारण है वह है मजबूत मानसून।

सामान्य से 247 प्रतिशत सामान्य से ज्यादा बार‌िश

after 50 years, 40 percent more rain in kashmir valley

लोटस ने आंकड़ों के हवाले से बताया कि श्रीनगर में सामान्य तौर पर 102 मिमी बारिश होनी चाहिए जबकि इस बार 355 मिमी वर्षा हुई।  जो 247 प्रतिशत सामान्य से ज्यादा है। वहीं लेह में 17 मिमी  बारिश सामान्य रूप से होनी चाहिए जबकि इस बार 54 मिमी हुई है जो सामान्य से 200 प्रतिशत ज्यादा है।

इसके अलावा जम्मू में सामान्य तौर पर 435 मिमी बारिश होनी चाहिए जबकि इस बार 565 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई जो सामान्य से 30 प्रतिशत ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि अधिकतर लोगों को भ्रम है कि मानसून पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों से टकराने के  बाद  कश्मीर और लद्दाख में दाखिल होने में विफल रहता है लेकिन यह भ्रम भर है। अगर मानसून मजबूत हो तो उसका अच्छा खासा प्रभाव कश्मीर समेत लद्दाख में भी देखने को मिलता है।

जलवायु परिवर्तन बदलाव के लिए जिम्मेदार

after 50 years, 40 percent more rain in kashmir valley

अन्य विशेषज्ञ घाटी में मौसम में बदलाव के पीछे जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग के हेड प्रोफेसर शकील रोमशू के अनुसार एक शोध किया गया है जिसके अनुसार 24 कारणों में से 19 ऐसे कारण सिद्ध होते हैं जिनसे यह बात साबित होती है कि उत्तर भारत खासकर हिमालयन रेंज में जलवायु परिवर्तन से मौसम में बदलाव आया है।

इस सब बदलाव के चलते बाढ़, सूखा, मूसलाधार बारिश और बादल फटने जैसी घटनाएं घटती दिख रही हैं और अगर प्रकृति को सुरक्षित न किया गया तो मानव जाति को बेहद मुश्किल हालातों का सामना भविष्य में करना पड़ेगा।

कई अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस प्रकार से आए दिन बादल फटने की घटनाओं की खबर से लोगों में भय पैदा हो गया है वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है।

उनके अनुसार आए दिन बादल फटने की खबरें जो आ रही हैं, वह वास्तव में तेज आंधी के साथ भारी बारिश (थंडरस्टोर्म) है जिससे अचानक बाढ़ आती है। इसका कारण है मजबूत मानसून। इसलिए लोगों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं।

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