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Jammu News: जम्मू कश्मीर में हिमनद के खतरे को कम करने को उचित उपाय होंगे
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उच्च स्तरीय एफजीएमसी समिति का गठन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में चिन्हित हिमनद झीलों में हिमनद के खतरे को कम करने के लिए उचित उपाय किए जाएंगे। इसके लिए साइट विशिष्ट सर्वोत्तम तकनीकी उपायों और विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को तय किया जाएगा। इस दिशा में उच्च स्तरीय केंद्रित हिमानी झील विस्फोट बाढ़ (फोकस्ड ग्लेशियल लेक आउटब्रस्ट फ्लड), (जीएलओएफ) निगरानी समिति (एफजीएमसी) का गठन किया गया है।
समिति चिन्हित हिमनद झीलों में हिमनद के खतरे को कम करने के लिए अपने सुझाव देगी। जीएलओएफ के संदर्भ में कमजोर हिमनद झीलों की पहचान की जाएगी। हिमनदों के पीछे हटने और संबंधित खतरों के अध्ययन और प्रबंधन के लिए मानव संसाधन सृजन/क्षमता निर्माण पर आवश्यक कार्रवाई के सुझाव लिए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में हिमनदों के खतरे को कम करने के लिए किसी अन्य विशिष्ट उपाय का सुझाव देने के लिए, प्रस्तावित समिति आवश्यकता पड़ने पर प्रमुख विशेषज्ञों/संगठनों से भी परामर्श कर सकती है। समिति को आपदा प्रबंधन, राहत व पुनर्वास विभाग द्वारा सेवा प्रदान की जाएगी। समिति में प्रधान सचिव गृह विभाग को चेयरमैन बनाया गया है। सचिव आपदा प्रबंधन विभाग को सदस्य सचिव और सदस्यों में निदेशक पर्यावरण यूटी, प्रो. ए रामसो उपकुलपति इस्लामिक यूनिवर्सिटी आफ साइंसेस एंड टेक्नोलाजी जेएंडके, उप इंस्पेक्टर जनरल आईटीबीपी श्रीनगर, कमाडेंट एसडीआरएफ, पहली बटालियन, निदेशक वित्त आपदा प्रबंधन विभाग, डा. अजय कुमार निदेशक जीएसआई जेएंडके, डा. मुख्तियार अहमद निदेशक आईएमडी जेएंडके, डा. बिनय कुमार जीएलओएफ विशेषज्ञ, सी-डीएसी, प्रो. विक्रम सिंह बाली एचओडी स्कूल आफ अर्थ साइंसेस जम्मू विश्वविद्यालय, प्रो. अवतार सिंह जसरोटिया एचओडी रिपोट सेंसिंग जम्मू विश्वविद्यालय, प्रो. परवेज अहमद एचओडी ज्योग्राफी व आपदा प्रबंधन जम्मू विश्वविद्यालय, डा. जुबेर अली वैज्ञानिक अतिरिक्त निदेशक डीजीआरई, डा. पीयूष गौरव वरिष्ठ सलाहकार जीएलओएफ, एनडीएमए और वसीम शफी डार वरिष्ठ सलाहकार आपदा प्रबंधन विभाग शामिल हैं। एफजीएमसी की सभी बैठकों में संबंधित जिला उपायुक्त विशेष आमंत्रित होंगे। चेयरपर्सन तकनीकी मदद के लिए अन्य किसी सह सदस्य को नामित कर सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में चिन्हित हिमनद झीलों में हिमनद के खतरे को कम करने के लिए उचित उपाय किए जाएंगे। इसके लिए साइट विशिष्ट सर्वोत्तम तकनीकी उपायों और विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को तय किया जाएगा। इस दिशा में उच्च स्तरीय केंद्रित हिमानी झील विस्फोट बाढ़ (फोकस्ड ग्लेशियल लेक आउटब्रस्ट फ्लड), (जीएलओएफ) निगरानी समिति (एफजीएमसी) का गठन किया गया है।
समिति चिन्हित हिमनद झीलों में हिमनद के खतरे को कम करने के लिए अपने सुझाव देगी। जीएलओएफ के संदर्भ में कमजोर हिमनद झीलों की पहचान की जाएगी। हिमनदों के पीछे हटने और संबंधित खतरों के अध्ययन और प्रबंधन के लिए मानव संसाधन सृजन/क्षमता निर्माण पर आवश्यक कार्रवाई के सुझाव लिए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में हिमनदों के खतरे को कम करने के लिए किसी अन्य विशिष्ट उपाय का सुझाव देने के लिए, प्रस्तावित समिति आवश्यकता पड़ने पर प्रमुख विशेषज्ञों/संगठनों से भी परामर्श कर सकती है। समिति को आपदा प्रबंधन, राहत व पुनर्वास विभाग द्वारा सेवा प्रदान की जाएगी। समिति में प्रधान सचिव गृह विभाग को चेयरमैन बनाया गया है। सचिव आपदा प्रबंधन विभाग को सदस्य सचिव और सदस्यों में निदेशक पर्यावरण यूटी, प्रो. ए रामसो उपकुलपति इस्लामिक यूनिवर्सिटी आफ साइंसेस एंड टेक्नोलाजी जेएंडके, उप इंस्पेक्टर जनरल आईटीबीपी श्रीनगर, कमाडेंट एसडीआरएफ, पहली बटालियन, निदेशक वित्त आपदा प्रबंधन विभाग, डा. अजय कुमार निदेशक जीएसआई जेएंडके, डा. मुख्तियार अहमद निदेशक आईएमडी जेएंडके, डा. बिनय कुमार जीएलओएफ विशेषज्ञ, सी-डीएसी, प्रो. विक्रम सिंह बाली एचओडी स्कूल आफ अर्थ साइंसेस जम्मू विश्वविद्यालय, प्रो. अवतार सिंह जसरोटिया एचओडी रिपोट सेंसिंग जम्मू विश्वविद्यालय, प्रो. परवेज अहमद एचओडी ज्योग्राफी व आपदा प्रबंधन जम्मू विश्वविद्यालय, डा. जुबेर अली वैज्ञानिक अतिरिक्त निदेशक डीजीआरई, डा. पीयूष गौरव वरिष्ठ सलाहकार जीएलओएफ, एनडीएमए और वसीम शफी डार वरिष्ठ सलाहकार आपदा प्रबंधन विभाग शामिल हैं। एफजीएमसी की सभी बैठकों में संबंधित जिला उपायुक्त विशेष आमंत्रित होंगे। चेयरपर्सन तकनीकी मदद के लिए अन्य किसी सह सदस्य को नामित कर सकता है।
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