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गोलाबारी के प्रभावितों को सुविधाएं मुहैया कराए प्रशासन

Fri, 29 Aug 2014 12:04 AM IST
Updated Fri, 29 Aug 2014 12:04 AM IST
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Administration services provided to victims of fire
सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी गोलाबारी के कारण अपने घरों को छोड़ने वालों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। जेएनएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट के जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव के अलावा डीसी जम्मू और सांबा को निर्देश दिए हैं कि गोलाबारी के शिकार लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाई जाए।
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खंडपीठ ने कहा कि  जम्मू और सांबा जिले के डीसी शरणार्थियों के लिए खाने-पीने के सामान के अलावा रहने की उचित व्यवस्था करें। इसके लिए वे संबंधित जिलों की रेड क्रास सोसाइटी का भी सहयोग लें।

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इसके अलावा भेड़ व पशुपालन विभाग के निदेशक को आदेश दिया कि गोलाबारी में जख्मी होने वाले पशुओं का इलाज करें और घटना में मारे गए पशुओं को तत्काल रिहायशी इलाकों से हटाने की व्यवस्था करें।
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डिवकॉम के नेतृत्व में टीम बनाने का निर्देश

Administration services provided to victims of fire

खंडपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि जम्मू के डिवीजनल कमिश्नर के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया जाए, जो सीमावर्ती इलाकों का जायजा लेकर स्टेटस रिपोर्ट बनाएं।

साथ ही बताएं कि इस मामले में क्या कदम उठाए गए। इसकी जांच मुख्य सचिव स्वयं करें। साथ ही याचिका की अगली सुनवाई पर अदालत में स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए।

आईजी पद से रिटायर्ड होने के बाद राजनीति में कदम रखने वाले फारूक खान ने याचिका दायर कर अदालत से अपील की कि आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी के शिकार हुए लोगों को चिकित्सा सुविधा, खाना, रहने की सुविधा मुहैया करवाने के आवश्यक निर्देश प्रशासन को दिए जाएं।

सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश

Administration services provided to victims of fire

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने पाया कि पाक गोलाबारी के शिकार होने वाले लोग अपने घर के अलावा खेतीबाड़ी छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

फायरिंग में एक ही परिवार के दो लोगों की मौत हो गई, जिसमें 12 साल का बच्चा भी शामिल है। इसके अलावा उसकी मां और तीन अन्य लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। कई अन्य लोग भी फायरिंग में जख्मी हुए हैं।

घायलों को जीएमसी अस्पताल व अन्य स्थानों पर रखा गया है, लेकिन उनकी उचित देखभाल नहीं हो रही है। इसके अलावा उन्हें दवाइयां, खाना और अन्य सुविधाएं तक मुहैया नहीं हो पा रहीं।

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