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कश्मीर में 25 स्थानीय और 25 से 30 विदेशी आतंकी सक्रिय: एडीजीपी
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- कहा-पाकिस्तान में छिपे स्थानीय आतंकी सरगनाओं के खिलाफ करेंगे कड़ी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के एडीजीपी (कानून व्यवस्था) विजय कुमार ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर घाटी में केवल 25 स्थानीय आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनमें से केवल एक श्रीनगर में है। इसके अलावा 25 से 30 विदेशी आतंकवादी भी हैं, जोकि कश्मीर घाटी में सक्रिय हैं। एडीजीपी के अनुसार, कुछ दहशतगर्दों के अभी भी जंगली इलाकों में छिपे होने की आशंका है। जैसे ही इनपुट पूरी तरह से पुख्ता होंगे तो इन आतंकियों को मार गिराने के लिए ऑपरेशन लांच किए जाएंगे। पुलिस उन आतंकी सरगनाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी, जो स्थानीय हैं, लेकिन पाकिस्तान में छिपकर बैठे हैं।
एडीजीपी ने कहा, ऐसे आतंकी हैंडलरों की संपत्ति को जब्त किया जा रहा है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने के लिए स्थानीय आतंकियों को टारगेट सौंप रहे हैं। हाल ही में श्रीनगर में पंजाब के दो नागरिकों पर किए गए हमले के पीछे जिम्मेदार आतंकवादी आदिल मंजूर लंगू के बारे में एडीजीपी ने कहा कि वह श्रीनगर के जाल डगर इलाके से है। आतंकी आदिल सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था और उसे जनवरी में पिस्तौल उपलब्ध कराई गई थी।
एडीजीपी ने कहा कि कश्मीर में आतंकी वारदातों से निपटने के लिए पुलिस पेशेवर तरीके से काम कर रही है। श्रीनगर में आतंकियों की मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि श्रीनगर में एक स्थानीय आतंकी मूमिन सक्रिय है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखें। खासकर उन पर जो ज्यादातर समय सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बिताते हैं, ताकि उन्हें गलत रास्ते पर जाने से बचाया जा सके।
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कुछ दहशतगर्दों ने जंगलों में बनाया ठिकाना
एडीजीपी विजय कुमार ने कहा, पिछले 30 साल के आंकड़े देखे जाएं तो ऊपरी जंगली इलाकों में आतंकी ठिकानों पर कई मुठभेड़ हुई हैं। कुछ तो अभी भी ठिकाने बनाकर रह रहे होंगे, जिसकी हमें खबर नहीं है। हम खुफिया तंत्र से इसका पता लगा रहे हैं। आशंका है कि अभी भी कुछ आतंकी जंगल में हैं। जब भी विशेष इनपुट मिलेंगे तो हम ऑपरेशन लांच कर इन दहशतगर्दों को मार गिराएंगे।
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दहशतगर्दों के नीचे न आने से मुठभेड़ें कम हुईं
एडीजीपी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से गांवों में एरिया डोमिनेशन किया जाता है, उसके कारण दहशतगर्द जंगलों में जा रहे है। वहां एक तो वह आसानी से छिप जाते हैं दूसरे मुठभेड़ होने पर नुकसान भी कम पहुंचता है। हालांकि सर्दियों में जंगलों में रहना मुश्किल हो जाता है। लेकिन, इस बार ठंड वैसी नहीं हुई जिसके कारण दहशतगर्द नीचे नहीं आए और अभी तक मुठभेड़ें कम हुई हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के एडीजीपी (कानून व्यवस्था) विजय कुमार ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर घाटी में केवल 25 स्थानीय आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनमें से केवल एक श्रीनगर में है। इसके अलावा 25 से 30 विदेशी आतंकवादी भी हैं, जोकि कश्मीर घाटी में सक्रिय हैं। एडीजीपी के अनुसार, कुछ दहशतगर्दों के अभी भी जंगली इलाकों में छिपे होने की आशंका है। जैसे ही इनपुट पूरी तरह से पुख्ता होंगे तो इन आतंकियों को मार गिराने के लिए ऑपरेशन लांच किए जाएंगे। पुलिस उन आतंकी सरगनाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी, जो स्थानीय हैं, लेकिन पाकिस्तान में छिपकर बैठे हैं।
एडीजीपी ने कहा, ऐसे आतंकी हैंडलरों की संपत्ति को जब्त किया जा रहा है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने के लिए स्थानीय आतंकियों को टारगेट सौंप रहे हैं। हाल ही में श्रीनगर में पंजाब के दो नागरिकों पर किए गए हमले के पीछे जिम्मेदार आतंकवादी आदिल मंजूर लंगू के बारे में एडीजीपी ने कहा कि वह श्रीनगर के जाल डगर इलाके से है। आतंकी आदिल सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था और उसे जनवरी में पिस्तौल उपलब्ध कराई गई थी।
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एडीजीपी ने कहा कि कश्मीर में आतंकी वारदातों से निपटने के लिए पुलिस पेशेवर तरीके से काम कर रही है। श्रीनगर में आतंकियों की मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि श्रीनगर में एक स्थानीय आतंकी मूमिन सक्रिय है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखें। खासकर उन पर जो ज्यादातर समय सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बिताते हैं, ताकि उन्हें गलत रास्ते पर जाने से बचाया जा सके।
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कुछ दहशतगर्दों ने जंगलों में बनाया ठिकाना
एडीजीपी विजय कुमार ने कहा, पिछले 30 साल के आंकड़े देखे जाएं तो ऊपरी जंगली इलाकों में आतंकी ठिकानों पर कई मुठभेड़ हुई हैं। कुछ तो अभी भी ठिकाने बनाकर रह रहे होंगे, जिसकी हमें खबर नहीं है। हम खुफिया तंत्र से इसका पता लगा रहे हैं। आशंका है कि अभी भी कुछ आतंकी जंगल में हैं। जब भी विशेष इनपुट मिलेंगे तो हम ऑपरेशन लांच कर इन दहशतगर्दों को मार गिराएंगे।
दहशतगर्दों के नीचे न आने से मुठभेड़ें कम हुईं
एडीजीपी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से गांवों में एरिया डोमिनेशन किया जाता है, उसके कारण दहशतगर्द जंगलों में जा रहे है। वहां एक तो वह आसानी से छिप जाते हैं दूसरे मुठभेड़ होने पर नुकसान भी कम पहुंचता है। हालांकि सर्दियों में जंगलों में रहना मुश्किल हो जाता है। लेकिन, इस बार ठंड वैसी नहीं हुई जिसके कारण दहशतगर्द नीचे नहीं आए और अभी तक मुठभेड़ें कम हुई हैं।