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Jammu News: औषधीय पौधों के अत्यधिक दोहन पर हो कार्रवाई
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। लद्दाख में एक व्यवहार्य औषधीय पौधों का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इनका व्यापार स्थानीय या यूटी बाजारों के बाहर किया जा रहा है। समय-समय पर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे दोहन को कम किया जा सकेगा। यह बात न्यायिक अधिकारियों और जम्मू-कश्मीर वन विभाग के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सहयोग से जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित वन्यजीव और वन संरक्षण कानून पर दो दिवसीय सेमिनार के समापन मौके पर मौलिका अराभी और तेजस सिंह कपूर ने कही।
सेमिनार में 1952 की वन नीति, राष्ट्रीय कृषि आयोग, 1976 (एनसीए) और 1988 की वन नीति पर विस्तृत जानकारी दी गई। संसाधन व्यक्ति ने जम्मू में संरक्षण के मुद्दों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जुड़वां केंद्र शासित प्रदेशों को तीन मुख्य भौगोलिक क्षेत्रों अर्थात् पीर पंजाल, ज़ांस्कर और लघु हिमालय के मध्य पर्वत में विभाजित किया गया है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासी व्यक्तिगत लाभ के लिए कुछ व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य औषधीय पौधों का अत्यधिक दोहन करते हैं। इनका व्यापार स्थानीय या यूटी बाजारों के बाहर किया जाता है। लद्दाख में एक बायोस्फीयर रिजर्व, 4 राष्ट्रीय उद्यान और 15 वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। सभी सत्र इंटरैक्टिव थे। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का समापन जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी के निदेशक यश पॉल बॉर्नी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत कर किया।
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जम्मू। लद्दाख में एक व्यवहार्य औषधीय पौधों का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इनका व्यापार स्थानीय या यूटी बाजारों के बाहर किया जा रहा है। समय-समय पर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे दोहन को कम किया जा सकेगा। यह बात न्यायिक अधिकारियों और जम्मू-कश्मीर वन विभाग के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सहयोग से जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित वन्यजीव और वन संरक्षण कानून पर दो दिवसीय सेमिनार के समापन मौके पर मौलिका अराभी और तेजस सिंह कपूर ने कही।
सेमिनार में 1952 की वन नीति, राष्ट्रीय कृषि आयोग, 1976 (एनसीए) और 1988 की वन नीति पर विस्तृत जानकारी दी गई। संसाधन व्यक्ति ने जम्मू में संरक्षण के मुद्दों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जुड़वां केंद्र शासित प्रदेशों को तीन मुख्य भौगोलिक क्षेत्रों अर्थात् पीर पंजाल, ज़ांस्कर और लघु हिमालय के मध्य पर्वत में विभाजित किया गया है।
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उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासी व्यक्तिगत लाभ के लिए कुछ व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य औषधीय पौधों का अत्यधिक दोहन करते हैं। इनका व्यापार स्थानीय या यूटी बाजारों के बाहर किया जाता है। लद्दाख में एक बायोस्फीयर रिजर्व, 4 राष्ट्रीय उद्यान और 15 वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। सभी सत्र इंटरैक्टिव थे। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का समापन जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी के निदेशक यश पॉल बॉर्नी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत कर किया।
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