{"_id":"57e3f4a84f1c1b3e34a831eb","slug":"action-plan-to-prevent-infiltration","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"LoC से आतंकी नहीं कर पाएंगे घुसपैठ, इजरायल की मदद से तैयार हुआ एक्शन प्लान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
LoC से आतंकी नहीं कर पाएंगे घुसपैठ, इजरायल की मदद से तैयार हुआ एक्शन प्लान
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 23 Sep 2016 04:41 AM IST
विज्ञापन
एलओसी पर तैनात जवान
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एलओसी पर पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा घुसपैठ की लगातार कोशिशों को रोकने के एक्शन प्लान पर अमल शुरू हो गया है। भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर तारबंदी में पैदा हुए स्थायी सुराखों पर अब इजरायली आखें नजर रखेंगी।
नियंत्रण रेखा को पूरी तरह सील करने के लिए रडार और लेजर दीवार की तकनीक इजरायल से आ गई है। कश्मीर और जम्मू संभाग में फैले एलओसी पर कई स्थान पर तारबंदी नहीं हो सकी है, नतीजतन पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकी घुसपैठ के लिए इन लंबी सुराखों का इस्तेमाल करते हैं।
सेना के सूत्रों के मुताबिक केंद्र द्वारा इस मामले पर गठित विशेषज्ञ समिति ने अगस्त में ही गृह और रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट सौंप दी थी। अब केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी देकर सिफारिशों पर अमल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नियंत्रण रेखा को पूरी तरह सील करने के लिए रडार और लेजर दीवार की तकनीक इजरायल से आ गई है। कश्मीर और जम्मू संभाग में फैले एलओसी पर कई स्थान पर तारबंदी नहीं हो सकी है, नतीजतन पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकी घुसपैठ के लिए इन लंबी सुराखों का इस्तेमाल करते हैं।
विज्ञापन
सेना के सूत्रों के मुताबिक केंद्र द्वारा इस मामले पर गठित विशेषज्ञ समिति ने अगस्त में ही गृह और रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट सौंप दी थी। अब केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी देकर सिफारिशों पर अमल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
एलओसी
- फोटो : File Photo
जम्मू संभाग में दो स्थानों पर नदियों और नालों पर लगभग पांच किलोमीटर से अधिक लंबे इलाके में तारबंदी नहीं है। इन स्थानों पर इजरायली तकनीक से निगरानी रखी जाएगी। इससे संबंधित कुछ उपकरण सेना के नार्दर्न कमांड के पास पहुंच गए हैं। इससे पहले बाड़ लगाने और फ्लड लाइट के स्वीकृत प्रोजेक्टों का 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
उड़ी हमले के बाद एलओसी और बार्डर पर नदियों और नालों में तैरने वाली सीमा चौकियों को अधिक सक्रिय किया गया है। जलयानों और स्पीड बोट की तैनाती बढ़ाई गई है। सांबा और कठुआ के पाकिस्तान से जुड़ने वाले नालों पर भी स्पीड बोट से निगरानी तेज की गई है। उड़ी में आतंकी सलामाबाद नाले से आए थे।
आतंकवादियों ने तारबंदी काटकर प्रवेश किया था और दो सैन्य शिविर की तारबंदी को दो स्थानों पर काटा। इसके बावजूद इसकी भनक नहीं लग पाई। इस चूक के मद्देनजर अब पहले से की गई तारबंदी को अलार्म सिस्टम से जोड़ने और कुछ इलाकों में तारों में विद्युत प्रवाह जैसी तकनीकी के इस्तेमाल पर भी विचार हो रहा है। सेना सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में तारबंदी के सुराखों के तकनीकी समाधान के पायलट प्रोजेक्ट पर काम इसी माह शुरू हो जाएगा।
उड़ी हमले के बाद एलओसी और बार्डर पर नदियों और नालों में तैरने वाली सीमा चौकियों को अधिक सक्रिय किया गया है। जलयानों और स्पीड बोट की तैनाती बढ़ाई गई है। सांबा और कठुआ के पाकिस्तान से जुड़ने वाले नालों पर भी स्पीड बोट से निगरानी तेज की गई है। उड़ी में आतंकी सलामाबाद नाले से आए थे।
आतंकवादियों ने तारबंदी काटकर प्रवेश किया था और दो सैन्य शिविर की तारबंदी को दो स्थानों पर काटा। इसके बावजूद इसकी भनक नहीं लग पाई। इस चूक के मद्देनजर अब पहले से की गई तारबंदी को अलार्म सिस्टम से जोड़ने और कुछ इलाकों में तारों में विद्युत प्रवाह जैसी तकनीकी के इस्तेमाल पर भी विचार हो रहा है। सेना सूत्रों के मुताबिक जम्मू कश्मीर में तारबंदी के सुराखों के तकनीकी समाधान के पायलट प्रोजेक्ट पर काम इसी माह शुरू हो जाएगा।
सीमा प्रबंधन का बजट बढ़ाया गया
मुठभेड़ के दौरान मोर्चा संभाले सेना के जवान
- फोटो : PTI
एलओसी के अलावा बार्डर प्रबंधन की विशेष कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई है। पहले सीमा प्रबंधन के लिए 3777 करोड़ 40 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था। अब इसे बढ़ाकर लगभग 5000 करोड़ कर दिया गया है।
पिछले साल इस मद में 3824 करोड़ रुपये का प्रावधान था जबकि 2908 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए थे। इसी तरह 2014-15 में 1885 करोड़, 2013 में 1886 करोड़, 2012 में 1205 करोड़ और 2011 में 1268 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
पिछले साल इस मद में 3824 करोड़ रुपये का प्रावधान था जबकि 2908 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए थे। इसी तरह 2014-15 में 1885 करोड़, 2013 में 1886 करोड़, 2012 में 1205 करोड़ और 2011 में 1268 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।