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Line of Control: किशनगंगा के तट पर विभाजन के बाद पहली बार हुई आरती, टीटवाल में लगी आस्था की डुबकी
Wed, 10 Apr 2024 04:56 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 10 Apr 2024 04:56 PM IST
सार
एलओसी के पास किशनगंगा के तट पर बुधवार को आजादी के 75 वर्षों में पहली बार गंगा आरती हुई। इसके साथ ही देश भर से आए श्रद्धालुओं ने किशनगंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई।
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किशनगंगा नदी के तट पर हुई आरती
- फोटो : संवाद
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विस्तार
उत्तरी कश्मीर के जिला कुपवाड़ा के टीटवाल में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास किशनगंगा के तट पर बुधवार को आजादी के 75 वर्षों में पहली बार गंगा आरती हुई। किशनगंगा नदी के तट पर नवनिर्मित घाट पर आयोजित हुई आरती में माता शारदा के मंदिर में पहुंचे तीर्थयात्रियों ने भाग लिया।
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देश भर से आए श्रद्धालुओं ने किशनगंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई। आरती का नेतृत्व सेव शारदा कमेटी कश्मीर के संस्थापक रविंदर पंडिता ने किया। रविंदर पंडिता ने कहा कि भारत पाकिस्तान के विभाजन से पहले यह घाट अस्तित्व में था। लेकिन फिर कवाइलियों के हमले के बाद यहां पूजा बंद हो गई। अब एक फिर मंदिर और घाट का जीर्णोद्धार किया गया है। भविष्य में इस पारंपरिक घाट पर आरती कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।'
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बता दें कि पिछले साल 22 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह ने शारदा माता मंदिर का वर्चुअली उद्घाटन किया। इन दिनों शारदा मंदिर एलओसी टीटवाल में नवरात्र उत्सव जारी है।
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