जम्मू-कश्मीर में खून की कमी से जूझ रहे 73 फीसदी बच्चे, गांदरबल और किश्तवाड़ में स्थिति सबसे खराब
जम्मू-कश्मीर में पांच साल से कम उम्र केे ज्यादातर बच्चे एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी होने की बीमारी से जूझ रहे हैं। यह तस्वीर केंद्र सरकार की हाल में आई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की पांचवीं रिपोर्ट में सामने आई है। एनएफएचएस की इस रिपोर्ट में सामने आया कि जम्मू-कश्मीर में बच्चों में एनीमिया के मामले में तेजी आई है। जम्मू-कश्मीर के शहरी क्षेत्र में 71.1 फीसदी, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 73.5 फीसदी बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं।
एनएफएचएस की वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट से तुलना करें तो जम्मू-कश्मीर में पांच साल तक की उम्र के बच्चों में एनीमिया के कुल मामले 53.8 फीसदी थे, जो 18.9 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 72.7 पहुंच गए हैं। प्रदेश में शोपियां एक मात्र ऐसा जिला है, जहां मामले में थोड़ी कमी आई है। यहां वर्ष 2015-16 के सर्वे में 58.4 बच्चों एनीमिया से ग्रस्त थे, जो कम होकर अब 57.1 फीसदी रहे हैं।
पूरे प्रदेश में पुंछ और शोपियां जिले में सबसे कम बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। एनीमिया ग्रस्त बच्चों के मामले में 89.8 फीसदी के साथ गांदरबल पहले स्थान पर है जबकि दूसरे स्थान पर किश्तवाड़ में 88.5 बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं। जम्मू जिले में मामले में दोगुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015-16 में जम्मू जिले में 33.7 बच्चे एनीमिया ग्रस्त थे, जो बढ़कर 68.4 फीसदी हो गए हैं।
ऐसे में सरकार की पोषण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बावजूद प्रदेश के बच्चों में बड़े एनीमिया के मामले खुद सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर सवाल खड़ा करते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 12 दिसंबर को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की इस पांचवीं रिपोर्ट का पहला हिस्सा जारी किया है। रिपोर्ट के इस हिस्से में देश के 17 राज्यों समेत पांच केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इसमें ज्यादातर राज्यों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में बढ़ते एनीमिया के मामले चिंताजनक स्थिति बयां करते हैं। इस सर्वेक्षण में जम्मू-कश्मीर के 18,086 घरों, 23,037 महिलाओं और 3,087 पुरुषों को शामिल किया गया था।
2022 तक हर साल तीन फीसदी कम करने थे मामले
एनीमिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने साल 2018 में देश में पोषण अभियान के तहत एनीमिया मुक्त भारत अभियान की भी शुरुआत की थी ताकि वर्ष 2022 तक हर साल तीन फीसदी तक एनीमिया के प्रसार को कम किया जा सके।
इसके तहत बच्चों को भी आयरन की गोलियां देना, पेट में कीड़े मारने की दवा देना, एनीमिया पीड़ित पुरुषों और महिलाओं को पोषण संबंधी आहार की जानकारी देना जैसे कई कदम शामिल हैं। फिलहाल एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हर साल तीन फीसदी तक एनीमिया के प्रसार को रोकने का लक्ष्य तय किया है, मगर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की हालिया रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर राज्यों में पांच साल तक के बच्चों में ही एनीमिया के मामले काफी बड़े हैं।
जम्मू संभाग
जिला 19-20 सर्वे 2015-16 सर्वे
जम्मू 68.4 33.7
कठुआ 67.0 41.6
किश्तवाड़ 88.5 65.3
पुंछ 54.3 51.5
राजोरी 76.4 52.0
रामबन 62.0 51.6
रियासी 69.7 63.5
सांबा 69.0 45.9
उधमपुर 70.4 64.0
डोडा 80.7 56.3
कश्मीर संभाग
जिला 19-20 सर्वे 2015-16 सर्वे
अनंतनाग 79.2 41.1
बडगाम 85.0 71.3
बांदीपोरा 75.1 58.9
बारामुला 70.4 63.6
गांदरबल 89.8 52.7
कुलगाम 77.7 59.7
कुपवाड़ा 78.8 75.2
पुलवामा 67.4 53.7
शोपियां 57.1 58.4
श्रीनगर 77.0 51.4
एनीमिया का प्रमुख कारण शरीर में आयरन की कमी होना है। आयरन की कमी से रेड ब्लड सेल का निर्माण नहीं हो पाता है, जिससे शरीर में थकान अथवा दूसरे प्रकार की समस्याएं सामने आती हैं। एनीमिया आज देश के लिए चिंताजनक स्थिति है। जम्मू-कश्मीर में बच्चों में एनीमिया के मामलों का बढ़ते जाना गंभीर स्थिति है। -डॉ. रोमेश गुप्ता, पूर्व अधीक्षक, जीएमसी जम्मू।