फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   70% of the people in Salani village are full of country lovers in army or police

देश प्रेमियों से भरा है सलानी गांव, यहां के 70 प्रतिशत लोग सेना या पुलिस में है

Sat, 16 Jun 2018 05:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पुंछ
अमर उजाला ब्यूरो, पुंछ Updated Sat, 16 Jun 2018 05:00 AM IST
विज्ञापन
70% of the people in Salani village are full of country lovers in army or police
aurangzeb
जिले की मेंढर तहसील का कस्सबलाड़ी बाउल में अन्य गांव की तरह ही एक गांव है सलानी। यह दो दशकों तक आंतकवादियों का गढ़ रहा है। यहां के दर्जनों लोगों को आतंकियों ने दहशत का शिकार बनाते हुए मौत के घाट उतार दिया। गांव के 70 प्रतिशत लोग सेना या पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे है अथवा दे चुके हैं। गांव के लोगों का कहना है कि कस्सबलाड़ी जिसे आतंकियों ने पीओके बाद अपना दूसरा घर समझ रखा था जो मन में आता था करते थे परन्तू उसके बावजूद भी हमारे गांव के किसी ने भी देशभक्ति की राह नहीं छोड़ी गांव निवासी नजीर अहमद, मंजूर, मोहमद का कहना है कि एक वक्त था जब इस गांव में आतंकियों के बड़े-बड़े दल घूमते थे तब भी हमारे गांव के नोजवान क्षेत्र में आयोजित होने वाली सेना, सीआरपीएफ, पुलिस एंव बीएसएफ की भर्ती में सबसे आगे होते थे।
विज्ञापन


गांव के सैंकड़ों युवकों ने एस पी ओ बन कर क्षेत्र के आतंकियों का सफाया करवाने में अहम भूमिका निभाई है। आज उन्होने एक औरंगजेब को शहीद कर गांव के युवाओं के खून को ललकारा है जिसका उन्हें जवाब जरूर मिलेगा। जिस प्रकार आज कस्सबलाड़ी बाउल में आतंकियों का नाम लेने वाला कोई नहीं वैसा ही पूरी रियासत में होगा क्योंकि आज हमारे गांव के सैंकड़ों नोजवान सुरक्षाबलों में राज्य के अलग अलग हिस्सों में तैनात हैं।
विज्ञापन


14 साल पहले औरंगजेब के चाचा की भी आतंकियों ने की थी हत्या

मेंढर तहसील के गांव सलानी निवासी मोहम्मद हनीफ के परिवार पर 14साल बाद एक बार फिर आतंकवाद की मार पड़ी है। आतंकवादियों ने वीरवार को उसके जवान बेटे औरंगजेब  की कश्मीर से घर लौटते समय अपहरण करने के बाद हत्या कर दी। यह पूरा परिवार देश की सेवा के लिए अपने गांव में पहचाना जाता है। इस घटना से पूरे परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है।  जो परिवार ईद की खुशियां मनाने की तैयारी कर रहा था वह आंसूओं में डूब गया है। पूरे गांव में मातम है।  मोहमद हनीफ के छोटे भाई सेना से सेवानिवृत्त मोहम्मद लतीफ का कहना है कि करीब14वर्ष पहले इसी तरह आतंकियों ने हमारे छोटे भाई अब्दुल रहमान को घर से अगवा करने के बाद गांव के बाहर ले जा कर हत्या कर दी थी। आज एक बार फिर आतंकियों ने हमारे परिवार पर कहर बरपा दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


परिवार के एक दर्जन लड़के फौज में

हमने तो कभी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा हम गरीब लोग हैं गांव में न ज्यादा खेती बाड़ी है न ही कोई रोजगार अपना और परिवार का पेट पालने साथ ही देख का कर्ज चुकाने के लिए फौज की नौकरी करते हैं मैंने बीस साल फौज में दिए। मेरे भाई हनीव ने 22साल फौज में दिए औरंगजेब और उसका बड़ा भाई भी फौज में है हमारे परिवार में अभी भी दर्जन भर लड़के फौज में हैं और इतने ही फौज से रिटायर हो चुके हैं।

तीन दिन पहले हुई थी चाचा से मुलाकात

मोहम्मद लतीफ कहता हैकि मेरी तीन दिन पहले भतीजे औरंगजेब से मुलाकात हुई थी जब मैं कश्मीर घूमने गया था तो पुलवामां में उसकी यूनिट के पास  उससे मुलाकात की थी तो उसने मुझे भी रुकने के लिए कहा था कि दोनों एक साथ वीरवार को ईद के एक दिन पहले घर चलेंगे परन्तू मेरे पास इतना समय नहीं था तो मैं उससे मिलने के बाद लौट आया था मुझे इस बात का पता होता तो मैं उसे साथ लेकर ही आता।


अब आतंकवाद का अंत होना चाहिए

औरंगजेब के परिवार में 17 भाई-बहन थे। उससे बड़ा भाई कासिम अली 15वर्ष की उम्र में बीमारी से चल बसा था जिसके गम को उसकी मां आज तक नहीं भूला पाई थी। अब उसके कलेजे का एक और  टुकड़ा छिन गया। हमारा तो परिवार ही लुट गया। लतीफ कहते हैं कि बस अब बहुत हो गया आतंकवाद अब इसका अंत किया जाना चाहिए ताकि किसी ओर को अपने जिगर के टुकड़े न गंवाने पड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed